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चार दिन बाद भी दहशत के साए में जा रहा नेपाल

News18India
Updated: April 29, 2015, 9:23 AM IST

नेपाल में भूकंप की वजह से मौत का आंकड़ा 5 हजार के पार है, लेकिन खुद नेपाल के पीएम ने आशंका जताई है कि ये आंकड़ा 10 हजार के पार जाएगा।

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  • Last Updated: April 29, 2015, 9:23 AM IST
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नई दिल्ली। नेपाल में भूकंप की वजह से मौत का आंकड़ा 5 हजार के पार है, लेकिन खुद नेपाल के पीएम ने आशंका जताई है कि ये आंकड़ा 10 हजार के पार जाएगा। क्योंकि बहुत से इलाकों में नुकसान का अभी जायजा नहीं लिया जा सका है। नेपाल के लोग अभी भी सदमे और खौफ में हैं। इस बीच नेपाल सरकार ने इस आपदा के बाद नेपाल में तीन दिन के राष्ट्रीय शोक का एलान किया है। संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक 10 लाख बच्चों समेत 80 लाख लोग इससे प्रभावित हुए हैं।


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शनिवार को नेपाल में आया मौत का भूकंप उसके इतिहास का सबसे बड़ा और भयावह भूकंप बनता जा रहा है। ये भूकंप 1934 की तबाही को पीछे छोड़ता दिख रहा है। यह त्रासदी नेपाल में 1934 में आए भयंकर भूकंप की त्रासदी से भी बड़ी होती दिख रही है। 1934 में आए भूकंप में नेपाल में 8 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी। जबकि शनिवार को 7.8 तीव्रता के भूकंप से मौत का आंकड़ा बढ़कर 10 हजार तक जाने की आशंका है। आईबीएन7 की इस खबर पर खुद नेपाल के पीएम ने मुहर लगाई। नेपाली पीएम सुशील कोईराला ने कहा कि अभी बहुत से दूर दराज के गांवों में मदद नहीं पहुंच पाई है लिहाजा मौत का आंकड़ा 10 हजार को छू सकता है। उन्होंने ये बात भारत, चीन और अमेरिका के राजदूतों से कही। नेपाल सरकार ने तीन दिन के राष्ट्रीय शोक का भी एलान किया है।

बढ़ते मौत के आंकड़े के बीच नेपाल में राहत का काम तेजी से चल रहा है। मलबे में लोगों की तलाश अभी भी जारी है, लेकिन चार दिन बीत जाने के बाद अब मलबे में दबे लोगों के जिंदा होने की उम्मीद न के बराबर है। वहीं मौसम भी बार बार मुश्किल खड़ा कर रहा है। रह रह कर होती बारिश से राहत का काम रुक रहा है। अस्पतालों का भी बुरा हाल है कई अस्पतालों में तो डायरिया फैलने की खबरें भी आने लगी हैं। राहत शिविरों में छोटे छोटे बच्चे भी बारिश में भीगते हुए लाइनों में खड़े नजर आ रहे हैं।

नेपाल में लाखों लोगों ने एक और रात ठिठुरती ठंड में खुले आसमान के नीचे गुजारी, क्योंकि लोगों में अभी भी भूकंप का खौफ है, लोग अभी भी दहशत में हैं। लोग घरों में नहीं लौटना चाहते क्योंकि ज्यादातर घरों को नुकसान पहुंचा है। जो घर बचे भी हैं तो उनमें दरारें पड़ चुकी हैं। नेपाल सरकार और संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक नेपाल के 39 जिलों में 80 लाख लोग प्रभावित हुए हैं।

भूकंप से करीब 12 शहर बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। मंगलवार शाम काठमांडू में भूकंप में मारे गए लोगों की आत्मा की शांति के लिए कैंडिल मार्च निकाला गया। भारत में भी लोग अपने पड़ोसी मुल्क के इस दुख में उसके साथ हैं औैर उसके लिए दुआ कर रहे हैं। भूकंप ने टीवी और रेडियो स्टेशनों को भी नहीं बख्शा। तबाही के इस मंजर के बीच कुछ लोग ऐसे भी हैं जिन्होंने हार नहीं मानी है। काठमांडू में कांतिपुर न्यूज चैनल टीवी खबरों को मेकशिफ्ट स्टूडियो से प्रसारित कर रहा है। कांतिपुर न्यूज चैनल आजकल हाइवे के किनारे टेंट लगाकर खबरों का प्रसारण कर रहा है। शनिवार को जब भूकंप आया तो कांतिपुर न्यूज चैनल की इमारत में दरारें आ गई। इसके बाद न्यूज चैनल के प्रबंधन ने इमारत को खाली कर फुटपाथ से ही चैनल चलाना शुरू कर दिया।

चैनल ने टेंट में ही स्टुडियो से लेकर पीसीआर और एमसीआर तक खड़ा किया और खबरों के जरिए लगातार लोगों तक सही जानकारी पहुंचाने का काम शुरू कर दिया। ये सच है कि नेपाल इस वक्त त्रास्दी से जूझ रहा है लेकिन कांतिपुर न्यूज ने साबित कर दिया है कि जिंदगी चलते रहने का नाम है ।

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First published: April 29, 2015, 7:52 AM IST
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