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Pfizer-BioNTech के डेटा सेंटर पर साइबर अटैक, वैक्सीन से संबंधित फाइल्स चोरी हुईं

हर घर तक कोरोना वैक्सीन पहुंचाने का ब्लू प्रिंट तैयार
हर घर तक कोरोना वैक्सीन पहुंचाने का ब्लू प्रिंट तैयार

Cyber Attack on Pfizer-BioNTech: फाइजर-बायोनटेक ने बताया है कि यूरोपियन मेडिसिन एजेंसी के सर्वर पर मौजूद उनकी वैक्सीन से सम्बंधित डेटा को गैरकानूनी तरीके से एक्सेस किया गया है. हैकर्स के निशाने पर उन लोगों की जानकारी इकठ्ठा करना था जो कि वैक्सीन के ट्रायल में शामिल हुए थे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 10, 2020, 3:51 PM IST
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बर्लिन/वाशिंगटन. जर्मन कंपनी बायोनटेक (BioNTech) और अमेरिका की दवा कंपनी फाइजर (Pfizer) के डेटा सेंटर पर साइबर अटैक हुआ है. कंपनी ने बताया है कि इस साइबर हमले में कोरोना वायरस वैक्सीन (COVID-19 Vaccine) से संबंधित फाइल्स को गैरकानूनी तरीके से एक्सेस किया गया है. कंपनियों ने बयान जारी कर बताया कि वैक्सीन से जुड़ी संयुक्त रिसर्च का डेटा यूरोपियन मेडिसिन एजेंसी के सर्वर पर मौजूद था और इसी पर साइबर हमला किया गया है.

बयान में बताया गया है कि इस साइबर हमले के दौरान 'गैरकानूनी रूप से वैक्सीन से जुड़ी फाइलें एक्सेस' की गयी हैं. एम्स्टर्डम की एजेंसी ने अपनी कोरोना वायरस वैक्सीन के इस्तेमाल के लिए यूरोपीय संघ के मेडिसिन रेगुलेटर (EMA) के पास अपील डाली है. कंपनी ने बुधवार को कहा कि उसकी वैक्सीन पर साइबर हमला हुआ है. इएमए ने हमले की जानकारी देने से इन्कार कर दिया और मामले की जांच जारी है. दोनों कंपनियों ने बाद में एक बयान जारी किया इसमें कहा गया कि इएमए सर्वर पर स्टोर फाइजर और बायोनटेक की कोरोना वैक्सीन, बीएनटी162बी2 से संबंधित कुछ दस्तावेज को गैरकानूनी रूप से एक्सेस किया गया है. उन्होंने कहा कि घटना के संबंध में बायोनटेक या फाइजर से जुड़े किसी भी सिस्टम में सेंध नहीं लग पायी. उन्होंने यह भी कहा है कि इस बात की जानकारी नहीं मिली है कि डेटा के एक्सेस होने के परिणामस्वरूप हमारे स्टडी में शामिल लोगों की पहचान की गई है या नहीं, लेकिन निशाने पर वही थे.






जिन लोगों पर ट्रायल हुआ, उनका डेटा चुराया गया
कंपनियों ने कहा कि इस समय हम इएमए की जांच को लेकर और जानकारी का इंतजार कर रहे हैं. उचित रूप से और यूरोपीय संघ के कानून के अनुसार इस पर प्रतिक्रिया देंगे. इएमए ने हमें आश्वासन दिया है कि साइबर हमले की समीक्षा के लिए समयसीमा पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा. फाइजर और बायोनटेक द्वारा बनाया गया टीके को पिछले हफ्ते ब्रिटेन में और बुधवार को कनाडा में आपातकालीन इस्तेमाल के लिए अनुमति मिली. यूएस एफडीए से गुरुवार को अनुमोदन के लिए प्रस्तुत करने पर विचार करने की उम्मीद है. कोरोना वायरस वैक्सीन के डेटा पर पहली बार साइबर अटैक नहीं हुआ है. पिछले महीने, माइक्रोसॉफ्ट ने कहा कि उसने रूसी और उत्तर कोरियाई हैकर्स द्वारा प्रमुख दवा कंपनियों और वैक्सीन शोधकर्ताओं से मूल्यवान डेटा चोरी करने के प्रयासों का पता लगाया है.

अमीर देशों ने खरीद ली है वैक्सीन
उधर के एमनेस्टी इंटरनेशनल और अन्य संगठनों का कहना है कि अमीर देशों ने अपनी आबादी को वर्ष 2021 के अंत तक सुरक्षित रखने के लिए कुल जनसंख्या से तीन गुना अधिक कोरोना वैक्सीन खरीद ली है. इससे गरीब क्षेत्रों में करोड़ों लोगों के वैक्सीन से वंचित रह जाने की आशंका है. ब्रिटेन ने फाइजर की वैक्सीन को इसी महीने मंजूरी दी है. उनकी उम्मीद है कि इस वैश्विक महामारी से लोगों को निजात मिलेगी. हालांकि, एमनेस्टी, फ्रंटलाइन एड्स, ग्लोबल जस्टिस नाव, ऑक्सफेम व अन्य संगठनों ने सरकारों और फार्मासुटिकल उद्योगों से आग्रह किया है कि वह वैक्सीनों की बौद्धिक संपदा को व्यापक तौर पर साझा करना सुनिश्चित करें. विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने भी इस साल सरकारों से आह्वान किया है कि वैक्सीन जनता के हित में है.



डब्ल्यूएचओ ने कोवैक्स नामक वैश्विक वैक्सीन कार्यक्रम के तहत कोविड वैक्सीन के समानुपातिक वितरण की अपील की है. इस कार्यक्रम के तहत इसमें शामिल 189 देशों को देना सुनिश्चित करने पर है लेकिन अमेरिका जैसे देश इस कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए हैं. अमेरिका और कुछ अन्य देशों ने कोरोना वैक्सीन के संबंध में केवल द्विपक्षीय समझौते ही किए हैं. कोवैक्स का मानना है कि वह वर्ष 2021 के अंत तक दो अरब लोगों को वैक्सीन उपलब्ध करा पाएंगे.
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