फाइजर कंपनी का दावा, 2020 के अंत तक अमेरिकियों को मिल जाएगा कोरोना का टीका

फाइजर कंपनी का दावा, 2020 के अंत तक अमेरिकियों को मिल जाएगा कोरोना का टीका
फाइजर कंपनी ने यह दावा किया 2020 के अंत तक अमेरिकियों को कोरोना टीका लग जाएगा.

फाइजर इन्कॉर्पोरेटेड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अल्बर्ट बोरला ने कहा कि इस साल के अंत से पहले ही कंपनी कोविड-19 (Covid-19) की वैक्सीन ले आएगी. वर्ष 2020 के अंत से पहले ही अमेरिकियों को कोरोनवायरस वायरस का टीका दिया जा सकेगा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 14, 2020, 1:44 PM IST
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न्यूयॉर्क. वर्ष 2020 के अंत से पहले ही अमेरिकियों को फाइजर कंपनी (Pfizer) का कोरोनवायरस वायरस का टीका (Coronavirus Vaccine) दिया जा सकेगा. फाइजर इन्कॉर्पोरेटेड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अल्बर्ट बोरला ने कहा कि इस साल के अंत से पहले ही कंपनी कोविड-19 (Covid-19) की वैक्सीन ले आएगी. सीईओ अल्बर्ट ने कहा कि फाइजर कंपनी बायोएनटेक (BioNTech) के साथ साझेदारी में जो वैक्सीन विकसित कर रही है वह बहुत सुरक्षित है और 2021 से पहले ही अमेरिकियों के लिए उपलब्ध हो सकेगी. बोरला ने यह भी कहा कि वैक्सीन का विकास यूएस फ़ूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन के अमेरिकी नियामकों के अप्रूवल पर निर्भर करता है.

फाइजर और बायोएनटेक टीका बनाने की होड़ में सबसे आगे

न्यूयॉर्क स्थित फाइजर और जर्मनी की बायोएनटेक को कोरोनोवायरस वैक्सीन विकसित करने की दौड़ में सबसे आगे देखा जाता है. इनके साथ इस दौड़ में मॉडर्न इंक और एस्ट्राजेनेका पीएलसी भी दो महत्वपूर्ण नाम हैं. फाइजर इंक के सीईओ अल्बर्ट बोरला ने कहा कि उनके पास अक्टूबर के अंत तक प्रायोगिक वैक्सीन की प्रभावकारिता जानने का 60% मौका है. क्लिनिकल ट्रायल्स के रिजल्ट का समय इस बात निर्भर करता है कि निश्चित समय में गणना करने के लिए अध्ययन में शामिल अधिकतम लोगों को कोरोना हो जाए. पॉजिटिव रिजल्ट से ही अप्रूवल का रास्ता साफ़ हो पाएगा.



क्लिनिकल ट्रायल में इस कैटोगरी के लोग होंगे शामिल
फाइजर और बायोएनटेक ने क्लिनिकल ट्रायल प्रतिभागियों की संख्या बढ़ा दी है ताकि अलग अलग पृष्ठभूमि वाले अधिक से अधिक लोगों को शामिल किया जा सके. दोनों कंपनियों ने शनिवार को एक बयान में कहा कि वे इस सप्ताह इसके अंतिम चरण के क्लीनिकल ट्रायल में 30,000 मरीजों को भर्ती करने की उम्मीद कर रहे हैं. इसके साथ ही दोनों कंपनियां अपने लक्ष्य को बढ़ाकर 44 हजार मरीज तक कर रहे हैं, जिसमें 16 साल की आयु के युवा से लेकर एचआईवी और हेपेटाइटिस बी और हेपेटाइटिस सी संक्रमित व्यक्तियों को भी शामिल करेंगे.

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बोर्ला ने सीबीएस पर दिए इंटरव्यू में कहा कि आने वाले हफ्तों में लेट-स्टेज ट्रायल में अफ्रीकी अमेरिकियों और लैटिनो सहित गैर-श्वेत लोगों को भर्ती करने पर भी ध्यान केंद्रित करेंगे. फिलहाल इस अध्ययन में भाग लेने वाले लोगों में 60% श्वेत और 40% गैर-श्वेत लोग हैं. आगे 44 प्रतिशत बूढ़े लोग इसका हिस्सा बनेंगे.
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