फाइजर, मॉडर्ना के कोविड टीके पुरुषों की प्रजनन क्षमता को प्रभावित नहीं करते: अध्ययन

कोरोना वैक्‍सीन को लेकर नया अध्‍ययन सामने आया है. (प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर)

COVID 19 vaccine: अध्ययन के लेखकों में शामिल अमेरिका की मियामी यूनिवर्सिटी के एक अध्ययनकर्ता ने कहा, 'टीका लगवाने में लोगों की हिचक का एक कारण प्रजनन क्षमता पर नकारात्मक असर होने की धारणा भी है.'

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    वाशिंगटन. फाइजर और मॉडर्ना के कोविड-19 टीकों (COVID-19 Vaccine) से पुरुषों की प्रजनन क्षमता को नुकसान नहीं होने का दावा करने वाले एक अध्ययन में पाया गया कि इसमें प्रतिभागी लोगों को टीके की दो खुराक लगने के बाद भी उनके शुक्राणुओं के स्तर पर प्रभाव नहीं पड़ा. 'जामा' जर्नल में गुरुवार को प्रकाशित अध्ययन में 18 से 50 वर्ष के 45 स्वस्थ लोगों को शामिल किया गया जिन्हें फाइजर-बायोएनटेक और मॉडर्ना के एमएआरएनए कोविड-19 टीके लगने थे.

    इस अध्ययन में प्रतिभागियों की पूर्व में ही जांच कर यह भी पता लगाया कि उन्हें पहले से कोई प्रजनन संबंधी समस्या नहीं हो. इसमें 90 दिन पहले तक कोविड-19 से ग्रस्त हुए या उसके लक्षण वाले लोगों को शामिल नहीं किया गया. इसमें पुरुषों को टीके की पहली खुराक लगाये जाने से पहले उनके वीर्य के नमूने लिये गये और दूसरी खुराक के करीब 70 दिन बाद नमूने लिये गये.

    विश्व स्वास्थ्य संगठन के दिशानिर्देशों के अनुसार प्रशिक्षित विशेषज्ञों ने विभिन्न मानकों पर शुक्राणुओं की जांच की. अध्ययन के लेखकों में शामिल अमेरिका की मियामी यूनिवर्सिटी के एक अध्ययनकर्ता ने कहा, ‘‘टीका लगवाने में लोगों की हिचक का एक कारण प्रजनन क्षमता पर नकारात्मक असर होने की धारणा भी है.’’

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    बच्चों में कोरोना के खिलाफ बेहद कारगर हैं फाइजर और मॉडर्ना की वैक्सीन
    मॉडर्ना और फाइजर ने अपने आंकड़ों को जारी कर दिया है, जिससे संकेत मिलता है कि उनके टीके किशोरों के लिये उपयुक्त और कोविड-19 की रोकथाम में बेहद प्रभावी हैं. कनाडा, अमेरिका और यूरोपीय संघ पहले ही 12 साल से ज्यादा उम्र के बच्चों को फाइजर का टीका लगाए जाने के लिये मंजूरी दे चुके हैं. ब्रिटेन ने भी अब 12 से 15 साल की उम्र के बच्चों को फाइजर के टीके के इस्तेमाल की मंजूरी दे दी है, लेकिन कई कारणों से इसे तत्काल लागू करने को लेकर सवाल हो सकते हैं.

    कोई टीका किसी के लिये लाभदायक है, यह तीन चीजों पर निर्भर करता है: संक्रमण के बाद उनके गंभीर रूप से बीमार पड़ने की आशंका कितनी है, टीका कितना प्रभावी है और टीकाकरण का जोखिम कितना है. वयस्कों के मुकाबले बच्चों में कोविड-19 कम गंभीर होता है. सात देशों में हुए एक हालिया अध्ययन से संकेत मिलता है कि कोविड-19 से हुई 10 लाख मौत के मामलों में बच्चों की मौत के दो से भी कम मामले सामने आते हैं. भले ही टीका बच्चों पर बेहद प्रभावी हो, यह पहले से ही बेहद मामूली जोखिम को सिर्फ खत्म कर सकता है. निश्चित रूप से, अन्य समस्याएं, जैसे दीर्घकालिक कोविड आदि हैं, लेकिन हम अभी यह नहीं जानते के बच्चों में यह कितनी सामान्य हैं.

    (Disclaimer: यह खबर सीधे सिंडीकेट फीड से पब्लिश हुई है. इसे News18Hindi टीम ने संपादित नहीं किया है.)

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