जर्मनी की अमेरिका से तनातनी के बीच मोदी ने किया मर्केल का समर्थन

(Photo: PTI)
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूरोपीय संघ को एकजुट करने में जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल के मजबूत नेतृत्व का समर्थन किया है.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूरोपीय संघ को एकजुट करने में जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल के मजबूत नेतृत्व का समर्थन किया है. मोदी ने मंगलवार को कहा कि भारत ईयू में एकता को मजबूत करने में सकारात्मक भूमिका अदा करेगा.

मर्केल को मोदी का समर्थन ऐसे महत्वपूर्ण वक्त में मिला है जब मर्केल पिछले साल जून में एक जनमत-संग्रह के माध्यम से ब्रिटेन के इस 28 सदस्यीय समूह से अलग होने के बाद से पृथकतावादी प्रवृत्तियों से जूझ रही हैं.

मोदी की इस यात्रा से एक हफ्ते से भी कम समय पहले मर्केल ने इस बात के अभी तक के सबसे पुरजोर संकेत दिए थे कि ईयू और राष्ट्रपति ट्रंप के शासन में अमेरिका के बीच दूरियां बढ़ रही हैं. प्रधानमंत्री ने उनके मजबूत नेतृत्व की प्रशंसा करते हुए कहा कि दुनिया को ईयू की तरह की सोच की जरूरत है.



उन्होंने मर्केल के साथ संयुक्त बयान में संवाददाताओं से कहा, ‘वैश्विक विकास के लिए ईयू की एकता, अग्रसक्रियता और दूसरे देशों के साथ मजबूत संबंध अत्यंत महत्वपूर्ण हैं. हम चाहते हैं कि ईयू और मजबूत बने तथा भारत, जर्मनी के माध्यम से इसमें सकारात्मक भूमिका अदा करेगा.’
मर्केल ने पिछले सप्ताह कहा था कि द्वितीय विश्व युद्ध के अंत के बाद से बने विश्वसनीय संबंध कुछ हद तक समाप्त हो रहे हैं. जर्मनी के विदेश मंत्री सिगमर गैबरील ने अमेरिका पर निशाना साधते हुए कहा था कि ट्रंप प्रशासन की अदूरदर्शी नीतियां यूरोपीय संघ के हितों के खिलाफ हैं. ये टिप्पणियां जी7 और नाटो शिखर-सम्मेलनों के समाप्त होने के बाद आईं.

खबरों के अनुसार मर्केल और ट्रंप के बीच सबकुछ ठीक नहीं है. ट्रंप अमेरिका को आर्थिक मुद्दों पर और भी अधिक संरक्षणवादी रख की ओर ले जा रहे हैं. दोनों देश जलवायु परिवर्तन संबंधी नीतियों पर भी एकमत नहीं हैं. ट्रंप ने ऐतिहासिक पेरिस समझौते से इत्तेफाक नहीं जताया है जबकि मर्केल इसका समर्थन करती हैं.

मोदी ने कहा, ‘यूरोप और विश्व कई चुनौतियों का सामना कर रहे हैं.' उन्होंने कहा कि जर्मनी ने कौशल विकास के क्षेत्र में वैश्विक मानदंड स्थापित किए हैं, जो भारत के लिए अहम है ।

जर्मनी ने परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह एनएसजी) की सदस्यता के लिए भारत की दावेदारी का समर्थन भी किया. जी-4 में शामिल दोनों देशों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार और इसके विस्तार की तत्काल जरूरत पर जोर दिया. जी-4 में भारत, जर्मनी, जापान और ब्राजील शामिल हैं और उनका मकसद सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता हासिल करना है.

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