अपना शहर चुनें

States

PM मोदी 17 मार्च को जाएंगे बांग्लादेश, CAA और NRC पर दूर करेंगे भ्रम

बांग्‍लादेश जाएंगे पीएम मोदी.
बांग्‍लादेश जाएंगे पीएम मोदी.

प्रधानमंत्री मोदी को उनकी बांग्लादेशी समकक्ष शेख हसीना ने बांग्लादेश के संस्थापक शेख मुजीबुर रहमान के शताब्दी समारोह में शामिल होने का न्योता दिया है.

  • Share this:
नई दिल्ली. भारत के संशोधित नागरिकता कानून (CAA) और प्रस्तावित एनआरसी (NRC) को लेकर बांग्लादेश (Bangladesh) की चिंताओं के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) 17 मार्च को ढाका के दौरे पर जाएंगे. प्रधानमंत्री को उनकी बांग्लादेशी समकक्ष शेख हसीना ने बांग्लादेश के संस्थापक शेख मुजीबुर रहमान के शताब्दी समारोह में शामिल होने का न्योता दिया है.

सूत्रों ने बताया कि इस दौरे में प्रधानमंत्री सीएए और एनआरसी को लेकर बांग्लादेश की चिंताओं को दूर करेंगे. इससे पहले दिसंबर में बांग्लादेश के विदेश मंत्री एके अब्दुल मोमेन और गृह मंत्री असदुज्जमां खान ने नए नागरिकता कानून को लेकर बने हालात के मद्देनजर अपना भारत दौरा रद्द कर दिया था.

पांच साल में अधिकांश बांग्लादेशियों को दी भारतीय नागरिकता
पिछले पांच सालों में भारतीय नागरिकता पाने वाले पड़ोसी देशों के नागरिकों में सर्वाधिक 80 प्रतिशत बांग्लादेश के हैं. गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय द्वारा बुधवार को राज्यसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में पेश आंकड़ों में यह जानकारी दी गई. सरकार द्वारा जारी बयान के अनुसार पड़ोसी देशों अफगानिस्तान, बांग्लादेश, पाकिस्तान, श्रीलंका और म्यांमा के 18999 नागरिकों को 2014 से 2019 के दौरान भारत की नागरिकता दी गई.
15 हजार लोगों को मिली नागरिकता


ब्योरे के अनुसार इनमें सर्वाधिक, बांग्लादेश के 15036 नागरिकों को भारत की नागरिकता दी गई है. इनमें पाकिस्तान के 2935, अफगानिस्तान के 914, श्रीलंका के 113 और म्यांमा का सिर्फ एक नागरिक शामिल है. इसमें स्पष्ट किया गया है कि 2015 में भारत बांग्लादेश सीमा समझौते के बाद बांग्लादेश के 14864 नागरिकों को भारत की नागरिकता दी गई. पिछले पांच सालों में पाकिस्तान के सर्वाधिक 809 आवेदकों को 2019 में भारत की नागरिकता दी गई, जबकि 2016 में यह संख्या 670 थी.

मंत्रालय के ब्योरे के मुताबिक अफगानिस्तान के नागरिकों को भारत की नागरिकता देने के मामले में 2015 के बाद से लगातार गिरावट दर्ज की गई है. अफगानिस्तान के 249 आवेदकों को 2015 में भारत की नागरिकता दी गई थी, यह संख्या 2019 में घटकर 40 रह गई. मंत्रालय ने बताया कि नागरिकता के बारे में धार्मिक पहचान के आधार पर आंकड़े एकत्र नहीं किए गए.

यह भी पढ़ें: राणा कपूर ने कहा- यस बैंक में जो कुछ हुआ, मुझे उसकी कोई जानकारी नहीं
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज