नीरव मोदी मामला: UK कोर्ट ने CBI-ED के सबूतों को स्वीकारा, जल्द होगा फैसला

नीरव मोदी की रिमांड बढ़ाई गईनीरव मोदी प्रत्यर्पण मामला में आज ब्रिटिश कोर्ट में सुनवाई हुई. (फाइल फोटो)
नीरव मोदी की रिमांड बढ़ाई गईनीरव मोदी प्रत्यर्पण मामला में आज ब्रिटिश कोर्ट में सुनवाई हुई. (फाइल फोटो)

नीरव मोदी (Nirav Modi Extradition) के प्रत्यर्पण की कार्यवाही की सुनवाई कर रहे ब्रिटिश न्यायाधीश ने मंगलवार को फैसला दिया कि भगोड़े हीरा कारोबारी के खिलाफ धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग (Money Laundering) का प्रथम दृष्टया मामला स्थापित करने के लिए भारतीय अधिकारियों द्वारा पेश सबूत व्यापक रूप से स्वीकार्य हैं.

  • Share this:
लंदन. नीरव मोदी (Nirav Modi Extradition) के प्रत्यर्पण की कार्यवाही की सुनवाई कर रहे ब्रिटिश न्यायाधीश ने मंगलवार को फैसला दिया कि भगोड़े हीरा कारोबारी के खिलाफ धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग (Money Laundering) का प्रथम दृष्टया मामला स्थापित करने के लिए भारतीय अधिकारियों द्वारा पेश सबूत व्यापक रूप से स्वीकार्य हैं. जिला न्यायाधीश सैमुअल गूजी ने यहां वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट अदालत में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा पेश कुछ गवाहों के बयानों की स्वीकार्यता के खिलाफ और पक्ष में दलीलें सुनीं. इसके बाद न्यायाधीश ने कहा कि वह अपने आपको किंगफिशर एयरलाइंस के पूर्व प्रमुख विजय माल्या के प्रत्यर्पण मामले में ब्रिटिश अदालतों के फैसलों से ‘बंधा हुआ’’ मानते हैं।

पीएनबी घोटाले में वांछित हैं नीरव मोदी

मामले की अगली सुनवाई अगले साल सात और आठ जनवरी को दो दिनों तक होगी. उस समय मामले में अंतिम दलीलें सुनी जाएंगी. उसके कुछ हफ्ते बाद मामले में फैसला सुनाया जाएगा. गौरतलब है कि नीरव मोदी भारत में पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) के साथ करीब दो अरब डॉलर के घोटाला मामले में वांछित हैं.



वीडियो लिंक के जरिये जेल से ही कोर्ट की सुनवाई में हुए पेश
नीरव मोदी (49) दक्षिण-पश्चिम लंदन के वैंड्सवर्थ जेल से वीडियो लिंक के माध्यम से कार्यवाही में शामिल हुए. उन्होंने जेल प्रशासन द्वारा मुहैया कराए गए कपड़े पहन रखे थे और उनकी दाढ़ी बढ़ी हुई थी.

ये भी पढ़ें: US ELECTION 2020: अमेरिका में मतदान शुरू, हैम्पशायर में ओटन ने डाला पहला वोट

थाईलैंड में पोर्नहब समेत 190 पोर्न वेबसाइट पर बैन, सोशल मीडिया पर फूटा लोगों का गुस्सा

इथियोपिया में बंदूकधारियों ने 32 लोगों की हत्या की, 20 से ज्यादा घर जला डाले

भारतीय अधिकारियों की ओर से बहस करते हुए क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस (सीपीएस) ने जोर दिया कि दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 161 के तहत गवाहों के बयान सहित अन्य साक्ष्य ब्रिटिश अदालत के लिए आवश्यक सीमा को पूरा करते हैं.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज