युद्ध से जूझ रहे सीरिया पर भी मंडराया कोरोना का खतरा, वैज्ञानिकों ने कहा- बुरा हाल होगा!

सीरिया में भी सामने आए कोरोना वायरस के केस
सीरिया में भी सामने आए कोरोना वायरस के केस

सीरिया (Syria) में कोरोना वायरस (Coronavirus) को फैलने से रोकने के प्रयासों के तहत दमिश्क सरकार ने सीमाएं बंद कर दी हैं, प्रांतों के बीच आवाजाही प्रतिबंधित कर दी है और स्कूल एवं रेस्तरां बंद कर दिए हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 13, 2020, 2:09 PM IST
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दमिश्क. युद्ध से जूझ रहे सीरिया (Syria) में अब कोरोना संक्रमण (Coronavirus) के केस भी सामने आने लगे हैं. विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि युद्धग्रस्त सीरिया में अगर कोरोना फैलाता है तो इसके नतीजे बेहद बुरे होंगे. सीरिया के कई हिस्सों में अभी भी जंग जारी है और न तो देश के मौजूदा अस्पताल (Hospitals) और न ही अर्थव्यवस्थ इस तरह के संकट का सामना कर पाने में सक्षम है. युद्ध के बाद से ही सीरिया में पर्सनल हाइजीन के पैमाने दुनिया के औसत स्टैण्डर्ड से काफी कम हैं.

कोरोना वायरस के प्रकोप ने दुनिया भर में 18 लाख से ज्यादा लोगों को संक्रमित किया है और करीब 1,12,000 लोगों की जान ले ली है. सीरिया में वायरस को फैलने से रोकने के प्रयासों के तहत दमिश्क सरकार ने सीमाएं बंद कर दी हैं, प्रांतों के बीच आवाजाही प्रतिबंधित कर दी है और स्कूल एवं रेस्तरां बंद कर दिए हैं. आधिकारिक संख्या कम है जहां दो मौत और 19 संक्रमितों की पुष्टि हुई है लेकिन केवल 100 मरीजों की रोजाना जांच हो रही है और उनमें भी आधे से ज्यादा जांच राजधानी दमिश्क में हो रही हैं. सीरिया में असद सरकार ने करीब दशक भर चले गृह युद्ध के बाद देश के ज्यादातर हिस्सों पर नियंत्रण पा लिया है वहीं कुछ इलाके अब भी अंकारा समर्थित विद्रोहियों और कुर्द लड़ाकों के कब्जे में हैं.

सरकार नहीं बता रही है असल आंकड़े!
विशेषज्ञ दमिश्क की असद सरकार पर राजनीतिक उद्देश्यों से मृतक संख्या कम करने का आरोप लगा रहे हैं. लंदन के थिंक टैंक चैटहम हाउस के वरिष्ठ परामर्शी शोधार्थी जकी मेहची ने कहा, 'चिकित्सा स्टाफ का मानना है कि सीरिया में कई लोग वायरस के लक्षणों के साथ मर रहे हैं.' उन्होंने कहा, 'लेकिन सुरक्षा एजेंसियां उनसे इसका जिक्र नहीं करने को कह रही हैं, खासकर मीडिया के सामने.' लंदन में रणनीतिक अध्ययन के लिए अंतरराष्ट्रीय संस्थान में पश्चिम एशिया के विश्लेषक एमिले होकायम ने कहा, 'यह बड़ी आपदा का संकेत है.'
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक 2019 के अंत तक दो तिहाई से भी कम अस्पताल चल रहे थे और 2011 में युद्ध शुरू होने के बाद से 70 प्रतिशत स्वास्थ्य कर्मी यहां से भाग गए. रेड क्रॉस अंतरराष्ट्रीय समिति ने आगाह किया कि इदलिब में विस्थापितों के लिए बने शिविरों में सामाजिक दूरी असंभव है और विद्रोहियों के कब्जे वाला यह प्रांत वैश्विक महामारी शुरू होने से पहले से ही मानवीय संकट से गुजर रहा है.



 

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