चीन हद में रहे, ‘टू प्लस टू’ में चर्चा करेंगे जापान और अमेरिका के मंत्री

जापान और अमेरिका के मंत्रियों के बीच चीन को लेकर चर्चा की संभावना है. (प्रतीकात्‍मक चित्र)

जापान और अमेरिका के मंत्रियों के बीच चीन को लेकर चर्चा की संभावना है. (प्रतीकात्‍मक चित्र)

‘टू प्लस टू’ वार्ता से पहले अमेरिका के रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन और विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने अपने जापानी समकक्षों रक्षा मंत्री नोबुओ किशि और विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोटोगी से अलग-अलग मुलाकात भी की. अमेरिका के दोनों मंत्री सोमवार को टोक्यो पहुंचे. पूर्वी और दक्षिण चीन सागर में बढ़ती चीन की सीमाई महत्वाकांक्षा को लेकर चर्चा होने की संभावना है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 16, 2021, 7:50 PM IST
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टोक्यो. जापान और अमेरिका के रक्षा तथा विदेश मंत्रियों के बीच मंगलवार को टोक्यो में हो रही बैठक में पूर्वी और दक्षिण चीन सागर में बढ़ती चीन की सीमाई महत्वाकांक्षा को लेकर चर्चा होने की संभावना है. दोनों देशों के शीर्ष मंत्रियों के बीच आज हो रही ‘टू प्लस टू’ वार्ता से पहले अमेरिका के रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन और विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने अपने जापानी समकक्षों रक्षा मंत्री नोबुओ किशि और विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोटोगी से अलग-अलग मुलाकात भी की. अमेरिका के दोनों मंत्री सोमवार को टोक्यो पहुंचे.

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अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने जापानी मंत्रियों को अमेरिका आने का न्योता देने की जगह अपने दो शीर्ष मंत्रियों को जापान यात्रा पर भेजा है, जो एशियाई देश के लिए बहुत महत्वपूर्ण है. जापान अमेरिका के साथ अपनी साझेदारी को अपनी कूटनीतिक और रक्षा नीतियों की नींव का पत्थर मानता है.



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ब्लिंकन ने कहा, ‘‘हमने यूं ही पहली कैबिनेट स्तरीय यात्रा के लिए जापान को नहीं चुना है.’’ उन्होंने कहा कि वह और ऑस्टिन, गठबंधन के प्रति समर्पण को दृढ़ता प्रदान करने और उसे और आगे ले जाने के लिए आए हैं. उन्होंने कहा कि अमेरिका और उसके सहयोगी देश जलवायु परिवर्तन, साइबर सुरक्षा और स्वास्थ्य सुरक्षा पर साथ मिलकर काम कर रहे हैं और ‘‘हमारे साझा मूल्यों का समर्थन कर रहे हैं.’’

ब्लिंकन ने कहा, ‘‘हम लोकतंत्र, मानवाधिकार और विधि के शासन में भरोसा करते हैं’’ लेकिन क्षेत्र में इन सभी पर खतरा है ‘‘फिर चाहे वह बर्मा हो या चीन.’’ मोटेगी ने कहा कि वह आशा करते हैं कि पूर्वी और दक्षिण चीन सागर में चीन की बढ़ती गतिविधियों पर चर्चा होगी और सहयोगी देश अपनी क्षमता का विकास कर सकेंगे.
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