भारत में कम हुई है गरीबी, 27.3 करोड़ लोग आए बाहर: संयुक्त राष्ट्र

भारत में कम हुई है गरीबी, 27.3 करोड़ लोग आए बाहर: संयुक्त राष्ट्र
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार भारत में 27.3 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए हैं. (File Photo)

दुनिया में गरीबी से बाहर निकलने में भारत का प्रदर्शन बहुत बेहतर रहा है. भारत में करीब 27.3 करोड़ लोग गरीबी के जाल से बाहर निकल पाने में कामयाब हुए हैं.

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जेनेवा. संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (United Nations Development Programme) और ऑक्सफोर्ड गरीबी और मानव विकास पहल (Oxford Poverty and Human Development Initiative) द्वारा जारी डेटा में बताया गया है कि 2000 और 2019 के बीच 75 देशों में से 65 देशों में बहुआयामी गरीबी (Multidimensional Poverty Index) के स्तर में काफी कमी आई है. इस मामले में भारत का प्रदर्शन बहुत बेहतर रहा है. भारत में करीब 27.3 करोड़ लोग गरीबी के जाल से बाहर निकल पाने में कामयाब हुए हैं. बहुआयामी गरीबी लोगों द्वारा अनुभव किए जाने वाले विभिन्न अभावों से संबंधित है. उदाहरण के बतौर खराब स्वास्थ्य, शिक्षा की कमी, खराब जीवन स्तर, काम की खराब गुणवत्ता, हिंसा का खतरा, और ऐसे इलाकों में रहना जो पर्यावरण की दृष्टि खतरनाक माने जाते हैं.

65 देशों में से 50 ​देशों में कम हुई गरीबी

उन 65 देशों में से जिन्होंने अपने बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI) मूल्य को कम किया है, उनमें से 50 देश ऐसे भी हैं जहाँ गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले लोगों की संख्या भी कम हुई है. इस रिपोर्ट में सबसे महत्वपूर्ण बात भारत के संदर्भ में कही गई है कि बहुआयामी गरीबी के संदर्भ में सबसे बड़ी कमी भारत में थी.



भारत का प्रदर्शन बहुत बेहतर रहा
पिछले दस साल में भारत में लगभग लगभग 27.3 करोड़ बहुआयामी गरीबी से बाहर निकल चुके हैं. इस रिपोर्ट में कहा गया है कि चार देशों- आर्मेनिया (2010–2015 / 2016), भारत (2005/2014-15/2016), निकारागुआ (2001–2011/2012) और उत्तर मैसेडोनिया (2005/2014) ने अपने वैश्विक बहुआयामी गरीबी सूचकांक (Global MPIT Value) को आधा घटा दिया है. इस रिपोर्ट के अनुसार दुनिया की आबादी का लगभग पांचवां हिस्सा भारत की बड़ी आबादी के कारण है.

भारत में बच्चों को गरीबी से निकालने पर काम हुआ

भारत (2005/5/5/2016) ने राष्ट्रीय स्तर पर बच्चों के बीच काम किया और इस कारण बहुसंख्यक गरीब लोगों (273 मिलियन) की संख्या में सबसे बड़ी कमी आई। भारत और निकारागुआ की समयावधि क्रमशः 10 और 10.5 वर्ष है और उस समय के दौरान इन दोनों देशों ने बच्चों के बीच अपने बहुआयामी गरीबी को आधा कर दिया. रिपोर्ट में कहा गया कि बच्चों के लिए निर्णायक बदलाव संभव है लेकिन इसके लिए मत्वपूर्ण नीतिगत प्रयासों की आवश्यकता है. इस रिपोर्ट में बहुआयामी गरीबी को कोविड-19 से भी जोड़कर दिखाने का प्रयास है.

कोविड-19 से पहले बहुआयामी गरीबी से निपटने के लिए सफल कोशिशें की जा रही थी लेकिन अब यह सब कोशिशें खतरे में हैं. “कोविड -19 ने मानव विकास पर गहरा प्रभाव डाला है लेकिन यह डेटा- इस महामारी से पहले जगी आशा का संदेश है. गरीब लोगों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी में गरीबी का अनुभव करने के कई तरीकों से निपटने की सफल कहानियां दिखाती हैं कि किस तरह बेहतर तरीके से निर्माण किया जाए और लाखों लोगों के जीवन को बेहतर बनाया जाए.

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चीन अपने हित में नेपाल जैसे कमजोर राष्ट्र के भ्रष्ट नेताओं का उपयोग करता है: रिपोर्ट

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में सबसे ज्यादा लोग लगभग 270 मिलियन लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर निकले हैं. 2005/06 और 2015/16 के बीच गरीबी से बाहर निकल रहे 273 मिलियन लोगों की संख्या से संबंधित एक फुटनोट में कहा गया है कि भारत में बहुआयामी गरीबी में रहने वाले लोगों की संख्या संयुक्त राष्ट्र के आर्थिक और सामाजिक मामलों के विभाग (UNDESA) (2019) के जनसंख्या आंकड़ों पर आधारित है.
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