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प्रचंड का आरोप- भारत के कहने पर PM ओली ने भंग की नेपाल की संसद, RAW भी शामिल

नेपाली पीएम केपी शर्मा ओली और पुष्प कमल दहल (फाइल फोटो)
नेपाली पीएम केपी शर्मा ओली और पुष्प कमल दहल (फाइल फोटो)

Nepal political crisis: पूर्व प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ (Pushpa Kamal Dahal 'Prachanda') ने आरोप लगाया है कि कार्यकारी प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली (KP Sharma Oli) ने भारत के इशारे पर कम्युनिस्ट पार्टी को तोड़ने की कोशिश की है और इस पूरी साजिश में भारतीय ख़ुफ़िया एजेंसी RAW भी शामिल है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 14, 2021, 12:14 PM IST
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काठमांडू. नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (NCP) के एक धड़े के अध्यक्ष और पूर्व प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ (Pushpa Kamal Dahal 'Prachanda') ने बुधवार को आरोप लगाया कि कार्यकारी प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली (KP Sharma Oli) ने भारत के इशारे पर कम्युनिस्ट पार्टी को तोड़ने की कोशिश की है और इसलिए ही संसद भंग की गयी है. प्रचंड के इन आरोपों से पहले एक भारतीय चैनल को दिए इंटरव्यू में ओली ने चीन को नेपाल के आंतरिक मामलों में दखल न देने की कड़ी हिदायत दी थी और भारत को सबसे करीबी दोस्त (India-Nepal Border Dispute) भी बताया था.

काठमांडू के नेपाल एकेडमी हॉल में अपने धड़े के नेताओं एवं कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए प्रचंड ने कहा कि प्रधानमंत्री ने निकट अतीत में आरोप लगाया था कि 'एनसीपी के कुछ नेता भारत की शह पर उनकी सरकार को गिराने की साचिश रच रहे थे.' प्रचंड ने कहा कि उनके धड़े ने बस इसलिए ओली को इस्तीफ देने के लिए बाध्य नहीं किया क्योकि इससे एक संदेश जाता कि ओली का बयान सच है. पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा, 'अब क्या ओली ने भारत के निर्देश पर पार्टी को विभाजित कर दिया और प्रतिनिधि सभा को भंग कर दिया?' उन्होंने कहा कि सच नेपाल की जनता के सामने आ गया.

भारतीय ख़ुफ़िया एजेंसी पर भी लगाए आरोप
प्रचंड ने आरोप लगाया, 'ओली ने भारत की खुफिया शाखा रॉ के प्रमुख सामंत गोयल के बालुवतार में अपने निवास पर किसी भी तीसरे व्यक्ति की गैरमौजूदगी में तीन घंटे तक बैठक की जो स्पष्ट रूप से ओली की मंशा दर्शाता है.' उन्होंने प्रधानमंत्री पर बाहरी ताकतों की गलत सलाह लेने का आरोप लगाया. प्रचंड ने कहा कि प्रतिनिधि सभा को भंग करके ओली ने संविधान एवं लोकतांत्रिक व्यवस्था को एक झटका दिया जिसे लोगों के सात दशक के संघर्ष के बाद स्थापित किया गया था. नेपाल 20 दिसंबर को तब राजनीतिक संकट में फंस गया जब चीन समर्थक समझे जाने वाले ओली ने प्रचंड के साथ सत्ता संघर्ष के बीच अचानक प्रतिनिधि सभा भंग करने की सिफारिश कर दी. राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी ने उनकी अनुशंसा पर उसी दिन प्रतिनिधि सभा को भंग कर 30 अप्रैल और 10 मई को नए चुनावों की तारीख का ऐलान भी कर दिया.



ओली ने चीन को दी चेतावनी
इससे पहले नेपाल में जारी राजनीतिक कलह के बीच कार्यकारी प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के सुर बदले नज़र आए. चीन समर्थक माने जाने वाले ओली ने कहा जिनपिंग सरकार को सख्‍त संदेश देते हुए कहा है कि वे नेपाल की आंतरिक राजनीति में दखल देने से बाज आए. ओली ने कहा कि हमें अपनी आजादी पसंद है और हम दूसरों के आदेशों को नहीं मानते हैं. ओली ने इस दौरान भारत की तारीफ की और कहा कि भारत के साथ नेपाल की दोस्ती स्वाभाविक है और इसके बीच में कोई नहीं आ सकता.
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