लाइव टीवी

नस्लभेद रोकने में नाकाम रहीं ब्रिटिश यूनिवर्सिटीज


Updated: October 24, 2019, 11:49 AM IST
नस्लभेद रोकने में नाकाम रहीं ब्रिटिश यूनिवर्सिटीज
Students

EHRC ने अपने शोध में ब्रिटेन के अलग-अलग संस्थानों में 1000 से अधिक छात्रों से विस्तार पूर्वक बात की.

  • Last Updated: October 24, 2019, 11:49 AM IST
  • Share this:
 

लंदन. ब्रिटेन के शिक्षण संस्थान (British Universities) अपने कैम्पस में नस्लीय भेदभाव (Racial Discrimination) रोक पाने में असफल रहे हैं. एक शोध में इस बात की पुष्टि हुई है. चौकाने वाली बात यह है कि युनिवर्सिटिज में नस्लभेद तेजी से बढ़ने के बावजूद संस्थान इससे अनजान हैं. लगातार बढ़ रहे भेदभाव की खबरों के बाद इक्वालिटी एण्ड ह्यूमैन राइट्स कमीशन (Equality and Human Rights Commission, EHRC) ने यह सर्वे कराया.

रिपोर्ट के मुताबिक इंग्लैंड के विश्वविद्यालयों में लगभग 25 फीसदी अल्पसंख्यक छात्र (Ethnic Minority) कैम्पस में नस्लीय भेदभाव के शिकार हुए हैं. 44 फीसदी विदेशी छात्रों ने यह तो माना कि उन्होंने भेदभाव का सामना किया है लेकिन इनमें से एक तिहाई ने इसकी शिकायत दर्ज नहीं की. इन संस्थानों को यह भ्रम था कि उनके कैम्पस में किसी भी तरह का भेदभाव होने पर शिकायत हो रही है.

इक्वालिटी एण्ड ह्यूमैन राइट्स कमीशन (EHRC) की मुख्य कार्यकारी रेबेका हिलसेराथ ने शिक्षण संस्थानों के इस रवैये की आलोचना करते हुए कहा, ''हमारे यहां इस तरह का नस्लभेद का खुलासा होने बेहद निराशाजनक है. उससे भी ज्यादा अफसोस इस बात का है कि विश्वविद्यालय प्रगतिशील होने की बजाय अभी भी मध्यकालीन युग की तरह काम कर रहे हैं.''

रेबेका ने आगे कहा कि कोई भी नस्लीय भेदभाव का शिकार नहीं होना चाहिए. उन्होंने कहा, ''हमारी रिपोर्ट में यह बात भी निकलकर आई है कि विश्वविद्यालयों को कैम्पस में हो रहे नस्लभेद को रोक पाना तो दूर की बात है, इन्हें इन घटनाओं की जानकारी तक नहीं है."

EHRC ने अपने शोध में ब्रिटेन के अलग-अलग संस्थानों में 1000 से अधिक छात्रों से विस्तार पूर्वक बात की.

By Diliff - Own work, CC BY-SA 3.0
यूनिवर्सिटी ऑफ कैम्ब्रिज का एक कॉलेज. (चित्र- By Diliff - Own work, CC BY-SA 3.0)

Loading...

पिछले साल मार्च में नॉटिंघम ट्रेंट यूनिवर्सिटी (University of Nottingham Trent) से कुछ छात्रों का वीडियो बाहर आया था. इस वीडियो में ये छात्र 'वी हेट द ब्लैक्स' जैसे नस्लभेदी नारे लगाते दिखाई दे रहे थे. इसी तरह पिछले साल मई में यूनिवर्सिटी ऑफ एक्सटर (University of Exter) के लॉ सोसायटी वॉट्सऐप ग्रुप में कई छात्रों ने नस्लीय टिप्पणी की थी. जिसके बाद इन सभी छात्रों को इस वॉट्सऐप ग्रुप से बाहर कर दिया गया.

यूनिवर्सिटी ऑफ लिसस्टर (University of Leicester ) में इसी हफ्ते एक छात्र को हिटलर के समर्थन में लिखे नारे की शर्ट पहले हुए देखा गया. यह नारा हाथ से लिखा गया था जिसकी तस्वीर सोशल मीडिया पर भी वायरल हो गई. इंग्लैंड (England), वेल्स (Wales), स्कॉटलैंड (Scotland) और उत्तरी आयरलैंड (Northern Ireland) के 136 शिक्षण संस्थानों के संगठन यूनिवर्सिटी यूके (University UK) ने इस रिपोर्ट को गंभीरता से लेने की बात कही है. संगठन के  अध्यक्ष जूलिया बकिंघम ने कहा कि वो अपने सभी सदस्यों को ऐसे मामलों को प्राथमिकता से निपटाने और भविष्य में इन्हें रोकने की हिदायत दी है.

हर साल लगभग बीस हजार भारतीय छात्र बिटेन पढ़ने जाते हैं. साल 2017-18 में 19,750 ब्रिटेन पढ़ने गए थे. इनमें से 17,105 इंग्लैंड, 16,660 स्कॉटलैंड, 800 वेल्स और 190 छात्रों ने उत्तरी आयरलैंड के शिक्षण संस्थानों में दाखिला लिया था.

ये भी पढ़ें:

भारतीय मूल के इस शख्स को मिलेगा ब्रिटेन के प्रधानमंत्री से भी ज्यादा शक्तिशाली पद!

कनाडा के किंगमेकर को 2013 में नहीं मिला था भारत आने का वीजा 

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए दुनिया से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: October 24, 2019, 11:25 AM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...