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लंदन में किसान प्रदर्शन के बहाने 'भारत विरोधी' नारे लगाए गए, कई गिरफ्तार और सुरक्षा बढ़ाई गई

कृषि कानूनों के विरोध में कंदन में हुए प्रदर्शन में लगे भारत विरोधी नारे. (फोटो- AFP)
कृषि कानूनों के विरोध में कंदन में हुए प्रदर्शन में लगे भारत विरोधी नारे. (फोटो- AFP)

London Anti-India Protest: लंदन स्थित भारत उच्चयोग के प्रवक्ता विश्वेश नेगी ने दावा किया है कि किसानों के समर्थन कि आड़ में किया गया प्रदर्शन भारत विरधी तत्वों की साजिश था और इसमें खुलकर भारत विरोधी नारेबाजी की जा रही थी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 7, 2020, 8:03 AM IST
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लंदन. नए कृषि कानूनों के खिलाफ भारत में जारी किसान प्रदर्शन (Farmer Proest in India) का असर अब ब्रिटेन (UK) और अमेरिका (US) की सड़कों पर भी नज़र आ रही है. रविवार को लंदन (London) स्थित भारतीय उच्चायोग के बाहर भी प्रदर्शन हुआ जिसमें भारत विरोधी (Anti-India) नारे लगाए गए. भारतीय हाई कमिश्नर के मिनिस्टर विश्वेश नेगी ने बताया कि प्रदर्शनकारियों में बड़ी संख्या में भारतविरोधी तत्व शामिल थे जिनका मकसद नए कृषि कानूनों के विरोध से ज्यादा भारत विरोधी एजेंडा आगे बढ़ाना था.

लंदन में रविवार को भारतीय उच्चायोग के बाहर भारत में तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे किसानों के समर्थन में किए गए प्रदर्शन के दौरान स्कॉटलैंड यार्ड पुलिस ने कई लोगों को गिरफ्तार किया. विश्वेश ने बताया कि ये प्रदर्शन कृषि कानूनों के खिलाफ न होकर मोदी विरोधी और भारत विरोधी बन गया था. कुछ अलगाववादी ताकतों ने कृषि कानूनों के विरोध का बहाना बनाकर भारत विरोधी एजेंडे को आगे बढ़ाने का काम किया है. ये लोग हमेशा से ही एंटी-इंडिया एजेंडे पर काम करते आए हैं.


कोरोना महामारी से जुड़े कानूनों का उल्लंघनANI के मुताबिक मध्य लंदन में 'हम पंजाब के किसानों के साथ खड़े हैं' प्रदर्शन को नियंत्रित करने के लिए कई पुलिसकर्मी सड़क पर उतरे और चेताया कि कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए कड़े नियम लागू हैं और अगर 30 से ज्यादा लोग जमा होते हैं तो गिरफ्तारी की जा सकती है और जुर्माना लगाया जा सकता है. मेट्रोपोलिटन पुलिस के कमांडर पॉल ब्रोगडेन ने कहा, 'अगर आप निर्धारित 30 लोगों से अधिक की संख्या में एकत्र होकर नियम तोड़ते हैं तो आप अपराध कर रहे हैं जो दंडनीय है और जुर्माना लगाया जाएगा.' उन्होंने लोगों से प्रदर्शन में शामिल नहीं होने की अपील भी की. प्रदर्शन में मुख्य रूप से ब्रिटिश सिख शामिल थे जो तख्तियां पकड़े हुए थे, जिनपर “किसानों के लिए न्याय' जैसे संदेश लिखे थे. उच्चायोग के प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान भारत विरोधी नारेबाजी की जा रही थी.



अमेरिका में भी प्रदर्शन
भारत में नए कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे भारतीय किसानों के समर्थन में अमेरिका के कई शहरों में सैकड़ों सिख अमेरिकियों ने शांतिपूर्वक विरोध रैलियां निकालीं. कैलिफोर्निया के विभिन्न हिस्सों के प्रदर्शनकारियों के सैन फ्रांसिस्को में भारतीय वाणिज्यदूतावास की ओर बढ़ने वाली कारों के बड़े काफिले ने शनिवार को ‘बे ब्रिज’ पर यातायात बाधित कर दिया. इसके अलावा सैकड़ों प्रदर्शनकारी इंडियानापोलिस में एकत्र हुए. इंडियाना निवासी प्रदर्शनकारी गुरिंदर सिंह खालसा ने कहा, 'किसान देश की आत्मा हैं. हमें अपनी आत्मा की रक्षा करनी चाहिए. अमेरिका और कनाडा के कई शहरों समेत दुनियाभर में लोग उन विधेयकों (कानूनों) के खिलाफ एकजुट हुए हैं, जो भारत के कृषि बाजार को निजी क्षेत्र के लिए खोल देंगे, जो बड़े कॉरपोरेट घरानों को स्वतंत्र कृषि समुदायों का अधिग्रहण करने की अनुमति देंगे और इससे फसलों के बाजार मूल्य में कमी आएगी.'



इससे एक दिन पहले शिकागो में सिख-अमेरिकी समुदाय के लोग एकत्र हुए और वाशिंगटन डीसी में भारतीय दूतावास के सामने विरोध रैली निकाली गई. रविवार को एक और रैली की योजना है. सिख-अमेरिकियों ने ‘किसान नहीं, भोजन नहीं’ और ‘किसान बचाओ’ जैसे पोस्टर थामकर प्रदर्शन किए. सिख नेता दर्शन सिंह दरार ने कहा, 'यह भारत सरकार से तीनों कानूनों को वापस लेने का आग्रह नहीं है, बल्कि यह हमारी मांग है.' उल्लेखनीय है कि हरियाणा, पंजाब और अन्य राज्यों के किसान भारत सरकार के नए कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली की सीमाओं पर पिछले 11 दिन से लगातार डटे हैं.
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