राजशाही के खिलाफ जनता का हल्ला बोल, कहा- थाईलैंड जनता का है, राजा का नहीं

थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में राजशाही के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन (फोटो:AP)
थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में राजशाही के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन (फोटो:AP)

थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक (Thailand) में लोकतंत्र समर्थक प्रदर्शनकारियों (Democratic Suppoters Protest) द्वारा रखी गई एक पट्टिका को 24 घंटे से भी कम समय में पुलिस ने वहाँ से हटा दिया है. इस पट्टिका में घोषणा की गई थी कि थाईलैंड जनता का है, राजा का नहीं.

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  • Last Updated: September 21, 2020, 11:39 AM IST
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बैंकॉक. थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक (Thailand) में ग्रांड पैलेस के पास थाई लोकतंत्र समर्थक प्रदर्शनकारियों (Democratic Suppoters Protest) द्वारा रखी गई एक पट्टिका को 24 घंटे से भी कम समय में पुलिस ने वहाँ से हटा दिया है. इस पट्टिका में घोषणा की गई थी कि थाईलैंड जनता का है, राजा का नहीं. पुलिस ने सोमवार को चेतावनी दी थी कि वे इस पट्टिका के पीछे के प्रतीकात्मक इशारे को समझते हुए उन लोगों पर कार्यवाही कर सकते हैं जिन्होंने इसे यहाँ लगाया है. राजा महा वजिरलॉन्गकोर्न के राजशाही (Monarchy) में सुधार और नए चुनावों के लिए सुधार के लिए मांग कर रहे हजारों लोगों द्वारा निकाली गई एक रैली के बाद रविवार को वह पट्टिका लगाई गई थी.

राजशाही को हटाने की मांग के लिए हुआ प्रदर्शन

थाईलैंड में सालों बाद इतना बड़ा प्रदर्शन हुआ है. इस प्रदर्शन में प्रदर्शनकारियों ने राजशाही के सुधार की मांग के साथ ही साथ प्रधान मंत्री प्रथु चान-ओखाजो को हटाने, एक नए संविधान की मांग के साथ चुनाव करवाने के लिए भी मांग की. विरोध के बाद लोग पट्टिका के बगल में तस्वीरें लेने के लिए कतार में खड़े हो गए जिसमें लोकतंत्र समर्थक प्रदर्शनकारियों द्वारा अपनाई गई तीन-उंगली की सलामी देने वाले हाथ भी थे.



नई पट्टिका पूर्ण राजशाही के अंत की याद दिलाती है
नई पट्टिका 1932 में पूर्ण राजशाही के अंत की याद दिलाती है जिसे 2017 में थाईलैंड के वर्तमान राजा वजिरालोंगकोर्न के सिंहासन पर बैठने के बाद शाही महल के बाहर से हटा दिया गया था. प्रमुख दक्षिणपंथी राजनेता वारॉंग देचिगितविग्रोम ने रविवार को कपट्टिका लगाए जाने अनुचित करार देते हुए कहा कि पट्टिका लगाना ठीक कदम नहीं था और राजा किसी भी तरह की राजनीति से ऊपर है. उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की पट्टिका लगाने से कुछ भी हासिल नहीं होगा. उनके अनुसार ये कार्रवाई प्रतीकात्मक रूप से राजा के खिलाफ है, लेकिन राजा हमारा प्रतिद्वंद्वी नहीं है.

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थाईलैंड के राजशाही और मिलिट्री के प्रभुत्व वाले इस देश में उनके खिलाफ दो महीने से हो रहे प्रदर्शनों के दौरान थाई प्रदर्शनकारी दिन प्रतिदिन निर्भीक होते जा रहे हैं. थाईलैंड में राजशाही की आलोचना करना राजद्रोह माना जाता है. ऐसे में जनता का लगातार प्रदर्शन करना एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है. अगला विरोध गुरूवार को किया जायेगा. विरोध प्रदर्शन करने वाले नेताओं ने भी थाई जनता को 14 अक्टूबर को काम से छुट्टी लेकर आने के लिए कहा है ताकि बड़ी संख्या में समर्थन दिखाया जा सके.
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