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लंदन के 'भूतिया' मेट्रो स्टेशनों में दफन द्वितीय विश्वयुद्ध के कई राज़ अब खुलेंगे


Updated: November 14, 2019, 3:19 PM IST
लंदन के 'भूतिया' मेट्रो स्टेशनों में दफन द्वितीय विश्वयुद्ध के कई राज़ अब खुलेंगे
London Tube

उनका इस्तेमाल न होने से अब लोग उन्हें घोस्ट स्टेशन (London Ghost Stations) या भूतिया स्टेशन कहने लगे हैं. इन भूतिया स्टेशनों में द्वितीय विश्वयुद्ध ( World War II Secrets) और उसके समकालीन कई राज दफ्त हैं.

  • Last Updated: November 14, 2019, 3:19 PM IST
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लंदन. दुनिया भर में ट्यूब (London Metro) के नाम से प्रसिद्ध है लंदन की अंडरग्राउंड ट्रेन सर्विस (Underground Train Service in London) . लंदन ट्यूब (London Tube) में कई स्टेशन ऐसे हैं जो वक्त के साथ बैन हो गए. उनका इस्तेमाल न होने से अब लोग उन्हें घोस्ट स्टेशन (London Ghost Stations) या भूतिया स्टेशन कहने लगे हैं. इन भूतिया स्टेशनों में द्वितीय विश्वयुद्ध  ( World War II Secrets) और उसके समकालीन कई राज दफ्त हैं.

कहीं चमगादड़ का अड्डा तो कहीं पेड़-पौधों का जंगल लंदन की भूमिगत दुनिया आश्चर्य से भरी पड़ी है. अति उत्साही लोगों के लिए अब लंदन ट्रांसपोर्ट म्यूजियम में एक नई प्रदर्शनी शुरु की गई है. इसमें लोगों को यहां के भूतिया स्टेशनों का दौरा कराया जाएगा.

London Tube station
लंदन ट्यूब में कई स्टेशन ऐसे हैं जो वक्त के साथ बैन हो गए.


सालों से इस्तेमाल नहीं किए जाने वाले स्टेशन के एक हिस्से को देखने के लिए पिछले दिनों पर्यटकों का एक समूह पिकाडिली सर्कस स्टेशन पर इकट्ठा हुआ. एक ऐसा स्टेशन देखने के लिए जो है तो यहां से कुछ ही दूरी पर लेकिन अभी भी यह सदियों पुरानी पट्टिकाओं के साथ इतिहास में बना हुआ है.

इस स्टेशन की जगह को अब उपकरण रखने के स्टोर और वेंटिलेशन के रूप उपयोग किया जाता है. हिडेन लंदन टूर के आयोजक सड्डी होलोवे बताते हैं कि कैसे विरान पड़ा यह स्टेशन द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अमूल्य कलाकृतियों को बमबारी से बचाने के काम आया था.

Inside London Tube
1982 में लंदन ट्यूब के अंदर सफर करतीं दो युवतियां.


जनवरी तक चलने वाली इस प्रदर्शनी में बंद पड़े स्टेशनों के जरिए इतिहास में झांकने की कोशिश की जा रही है. इस प्रदर्शनी को तैयार करने वाले मैट ब्रोसनैन के मुताबिक यहां आकर लोग इतिहास की गहराइयों में डूब सकते हैं. दर्शकों को यह समझने का मौका मिलेगा कि आखिर इन स्टेशनों को क्यों बंद कर दिया गया और कैसे इनका इस्तेमाल गुत्त गतिविधियों के लिए किया जाता है.हाईगेट स्टेशन पर ओवरग्राउंड प्लेटफॉर्म 1950 के दशक का अंत होते होते बंद कर दिया गया था. यहां पड़ी रेलवे लाइनों की सुरंगों में अब चमगादड़ संरक्षण का काम चल रहा है. जमगादड़ों के लिए यह सुरक्षित स्थान है. द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान भी जर्मन बमों से बचाने के लिए इन्हें इंसानों को सुरक्षित करने के लिए किया गया था.

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First published: November 14, 2019, 3:15 PM IST
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