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संयुक्त राष्ट्र ने कहा- पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों को करना पड़ रहा हिंसा का सामना

भाषा
Updated: February 27, 2020, 9:14 PM IST
संयुक्त राष्ट्र ने कहा- पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों को करना पड़ रहा हिंसा का सामना
UNHRC प्रमुख ने कहा ईशनिंदा कानून के प्रावधानों में संशोधन करने में पाकिस्तान सरकार की असफलता का नतीजा धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हिंसा के रूप में निकला है. (File Photo)

पाकिस्तान (Pakistan) में ईशनिंदा (Blasphemy) एक बेहद संवेदनशील मुद्दा है जिसके चलते असिद्ध आरोपों में भी भीड़ हिंसा में व्यक्ति की जान जा सकती है.

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जिनेवा. संयुक्त राष्ट्र मानवधिकार प्रमुख मिशेल बैश्लेट (UN Human Rights Chief Michelle Bachelet) ने गुरुवार को कहा कि पाकिस्तान (Pakistan) में धार्मिक अल्पसंख्यकों को लगातार हिंसा और अपने धर्मस्थलों पर बार-बार हमलों का सामना करना पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि ईशनिंदा कानून के प्रावधानों में संशोधन करने में पाकिस्तान सरकार (Pakistan Government) की असफलता का नतीजा धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हिंसा के रूप में निकला है.

विश्वभर में मानवाधिकार घटनाक्रमों पर जिनेवा में चल रहे संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 43वें सत्र को संबोधित करते हुए संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त बैश्लेट ने पाकिस्तान के एक विश्वविद्यालय के व्याख्ता जुनैद हफीज का उल्लेख किया जिन्हें दिसंबर में ईशनिंदा के मामले में मौत की सजा सुनाई गई थी.

बैश्लेट ने कहा, ‘‘पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों को लगातार हिंसा, अपने धर्मस्थलों पर बार-बार हमलों और भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है.’’

बार-बार कहने पर भी सुधर नहीं रहा पाकिस्तान



चिली की पूर्व राष्ट्रपति ने पाकिस्तान के विवादित ईशनिंदा कानून पर एक बयान में कहा, ‘‘अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार तंत्रों से सिफारिशों के बावजूद पाकिस्तान सरकार ने ईशनिंदा कानून के प्रावधानों को खत्म या संशोधित नहीं किया है जिसके चलते धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हिंसा हो रही है, और मनमाने ढंग से गिरफ्तारियां की जा रही हैं तथा मुकदमे चलाए जा रहे हैं.’’

पाकिस्तान में काफी संवेदनशील है ये मुद्दा
पाकिस्तान में ईशनिंदा एक बेहद संवेदनशील मुद्दा है जिसके चलते असिद्ध आरोपों में भी भीड़ हिंसा में व्यक्ति की जान जा सकती है. इस कानून के तहत दोषी पाए जाने वाले, या महज इस्लाम के अपमान का आरोप लगने पर आरोपी व्यक्ति को इस्लाम के तथाकथित रक्षकों के हाथों अपनी जान गंवानी पड़ती है.

मानवाधिकार समूह प्राय: आरोप लगाते रहे हैं कि बदला लेने या व्यक्तिगत दुश्मनी निकालने के लिए ईशनिंदा कानून का आए रोज दुरुपयोग किया जाता है.

क्या है पाकिस्तान का ईश निंदा कानून
19वीं सदी के ब्रिटिश साम्राज्य के नियमों पर आधारित इस कानून को 1980 में जिया उल हक के राष्ट्रपति बनने के बाद फिर से पेश किया गया. इस कानून के तहत इस्लाम या पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ बोले वाले व्यक्ति को मौत की सज़ा का प्रावधान है. सज़ा-ए-मौत न मिलने पर उसे उम्र कैद की सज़ा दी जाती है, साथ ही उसे जुर्माना देना पड़ता है.

वैसे तो ईशनिंदा के मामले में अभी तक किसी को फांसी नहीं दी गई है, लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो 2009 में ईशनिंदा के आरोप में भीड़ ने सात ईसाइयों की जलाकर हत्या कर दी थी. 2010 में भी फैसलाबाद में दो ईसाई भाइयों की गोली मारकर हत्या कर दी गई

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First published: February 27, 2020, 9:14 PM IST
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