रिसर्चर्स का खुलासा- वायु प्रदूषण से और बढ़ सकता है Coronavirus का खतरा

प्रतीकात्मक तस्वीर.
प्रतीकात्मक तस्वीर.

साइंस एडवांस पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन के अनुसारयह निष्कर्ष अमेरिका (America) के तीन हजार से ज्यादा काउंटी में किए गए विश्लेषण के आधार पर निकाला गया है. इसमें हवा में मौजूद सूक्ष्म कण पार्टिकल मैटर (पीएम2.5) का कोरोना (Corona) से होने वाली मौतों की दर पर पड़ने वाले प्रभाव को परखा गया.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 6, 2020, 9:27 PM IST
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वॉशिंगटन. कोरोना वायरस (Covid-19) के कहर से इस समय पूरी दुनिया जूझ रही है. अभी तक इस खतरनाक वायरस से मुकाबले के लिए कोई प्रभावी इलाज और वैक्सीन (Vaccine) तक मुहैया नहीं हो पाई है. ऐसे हालात में बढ़ते वायु प्रदूषण ने चिंता बढ़ा दी है. एक नए अध्ययन में पाया गया है कि लंबे समय तक वायु प्रदूषण में रहने वाले लोगों के लिए कोरोना घातक हो सकता है. इनमें कोरोना संक्रमण के कारण मौत का खतरा ज्यादा हो सकता है.

साइंस एडवांस पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, यह निष्कर्ष अमेरिका के तीन हजार से ज्यादा काउंटी में किए गए विश्लेषण के आधार पर निकाला गया है. इसमें हवा में मौजूद सूक्ष्म कण पार्टिकल मैटर (पीएम2.5) का कोरोना से होने वाली मौतों की दर पर पड़ने वाले प्रभाव को परखा गया. अध्ययन में यह पता चला है कि इस तरह के प्रदूषक कणों वाले माहौल में लंबे समय तक रहने का संबंध कोरोना से मौत की उच्च दर से होता है.

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अमेरिका की हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं का मानना है कि फेफड़ों में एसीई-2 रिसेप्टर की अत्यधिक उत्पत्ति में पीएम2.5 की भूमिका हो सकती है. कोरोना वायरस इसी रिसेप्टर के जरिये कोशिकाओं में दाखिल होता है. शोधकर्ताओं का यह भी कहना है कि लंबे समय तक वायु प्रदूषण में रहने से इम्यून सिस्टम (प्रतिरक्षा प्रणाली) को भी नुकसान पहुंच सकता है. पूर्व के अध्ययनों में यह बात सामने आ चुकी है कि वायु प्रदूषण के चलते कोरोना और घातक बन सकता है. खासतौर से पीएम2.5 और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड के कारण यह वायरस ज्यादा खतरनाक बना सकता है.
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