कोरोना से लड़ने के लिए 41 अफ्रीकी देशों के पास 2 हज़ार से भी कम वेंटीलेटर्स,5 हज़ार से कम ICU बेड्स

कोरोना से लड़ने के लिए 41 अफ्रीकी देशों के पास 2 हज़ार से भी कम वेंटीलेटर्स,5 हज़ार से कम ICU बेड्स
अफ्रीका के सारे देश कोरोना वायरस के संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं.

कुल 2000 से भी कम वेंटीलेटर्स (Ventilators) के ऊपर सार्वजनिक अस्पतालों में करोड़ों लोगों के इलाज की जिम्मेदारी है जिसमें से 10 अफ्रीकी (African) देशों के पास एक भी वेंटीलेटर नहीं है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 19, 2020, 2:36 PM IST
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अफ्रीकी (African) महाद्वीप पर अब कोरोनावायरस (Coronavirus) का संकट गहराने लगा है.  इस महाद्वीप के देशों को लेकर सबसे चिंता की बात ये है कि यहां कोरोना से लड़ने के लिए इलाज की सुविधा नहीं है. 41 अफ्रीकी देशों में 2000 से कम वेंटीलेटर्स (Ventilators) हैं जिसमें 10 देशों में तो वो भी नहीं है.

दक्षिण सूडान में उपराष्ट्रपतियों की तादाद वेंटीलेटर्स से ज्यादा है. एक करोड़ 10 लाख की आबादी वाले सूडान  में 5 उपराष्ट्रपति हैं जबकि कुल वेंटीलेटर्स सिर्फ 4 हैं. सेंट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक  के पास इसकी 50 लाख की  आबादी के लिए सिर्फ 3 वेंटीलेटर्स हैं. लाइबेरिया में 6 वेंटीलेटर्स हैं जिसमें से एक अमेरिकी दूतावास के लिए सुरक्षित रखा गया है. कुल 2000 से भी कम वेंटीलेटर्स के ऊपर सार्वजनिक अस्पतालों में करोड़ों लोगों के इलाज की जिम्मेदारी है. जिसमें से 10 अफ्रीकी देशों के पास एक भी वेंटीलेटर नहीं है.

जबकि वहीं अमेरिका से तुलना करें तो उसके पास 1 लाख 70 हज़ार से ज्यादा वेटींलेटर्स हैं.यही वजह है कि अफ्रीकी देशों में कोरोनावायरस की दस्तक से  खौफ़ पसर गया है क्योंकि वहां स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं हैं. यहां तक कि बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं की भी यहां इस कदर किल्लत है कि महामारी फैलने पर हालात बहुत भयावह हो सकते हैं. मास्क, ऑक्सीजन के अलावा बुनियादी चीजें जैसे साबुन-पानी तक की कमी है. संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक लाइबेरिया में हालात इतने बदतर हैं कि साल 2017 तक लाइबेरिया में 97 प्रतिशत घरों  में साफ पानी और साबुन नहीं था.



विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक 41 अफ्रीकी देशों में इंटेंसिव केयर बेड भी 5000 से कम हैं. WHO के मुताबिक अफ्रीकी देशों में जहां कोरोना संक्रमण फैला है वहां दस लाख लोगों के लिए सिर्फ 5 बेड की व्यवस्था है जबकि यूरोपीय देशों से तुलना करके देखें तो 10 लाख लोगों के लेए 4000 बेड्स हैं.
अफ्रीका में फैलते कोरोना संक्रमण पर चिंता जताते हुए संयुक्त राष्ट्र आर्थिक आयोग की रिपोर्ट ने अफ्रीका में 3 लाख लोगों की मौत की आशंका जताई है. ये आंकड़ा जारी करते हुए कहा है कि सामान्य स्थिति में 3 लाख मौतें हो सकती हैं जबकि हालात खराब हुए और संक्रमण को रोकने की कोशिश की नहीं की गई तो अफ्रीका में 33 लाख लोगों की जान जा सकती है और 120 करोड़ लोग संक्रमित हो सकते हैं.

बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं से जूझ रहे अफ्रीकी देशों में हालात बेहद ही चिंताजनक हैं. कोरोनावायरस के संक्रमण के इलाज में जहां आईसीयू और वेंटीलेटर्स की जरूरत आम हो चली है ऐसे में अफ्रीकी देशों के पास बुनियादी स्वास्थ्य जरूरतें ही मौजूद नहीं हैं. यही वजह है कि अफ्रीकी देश के नेताओं और वैश्विक आर्थिक संस्थाओं ने अफ्रीकी महाद्वीप के लिए अतिरिक्त निधि के तौर पर कई अरब डॉलर की मांग की.

हालांकि अफ्रीकी देशों में दूसरे देशों के मुकाबले कोरोना के मामले अभी कम ही सामने आए हैं. इसकी एक वजह ये भी मानी जा रही है कि कोरोना संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए कई शहरों में लॉकडाउन कर दिया गया है.
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