लेबनान धमाका: हर तरफ तबाही का मंजर, अब एक महीने से भी कम का बचा है अनाज

लेबनान धमाका: हर तरफ तबाही का मंजर, अब एक महीने से भी कम का बचा है अनाज
विस्फोट के बाद का मंजर

Lebanon Blast: लेबनान की राजधानी बेरूत में भयानक विस्फोट के बाद जहां बचाव अभियान में जुटे कर्मी शवों की गिनती और मलबों में जिंदा लोगों की तलाश में जुटे हैं, वहीं कई देशों ने संकटग्रस्त देश की मदद के लिए हाथ बढ़ाया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 6, 2020, 4:57 PM IST
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बेरूत. लेबनान की राजधानी बेरूत में मंगलवार को हुए धमाके के बाद हर तरफ तबाही का मंजर दिख रहा है. यहां अब एक बड़ा आर्थिक संकट देखने को मिल सकता है. समाचर एजेंसी रॉटर्स के मुताबिक यहां अब एक महीने से भी कम समय का अनाज बचा (reserves of the grain) है. लेबनान ज़्यादातर खाद्य सामग्री आयात करता है. अनाज का बड़ा हिस्सा पोर्ट पर स्टोर करके रखा जाता है. 85 फीसदी अनाज इसी भंडार में रखा हुआ था जहां ये धमाका हुआ.

15 हज़ार टन अनाज बर्बाद
धमाके के पहले से ही लेबनान आर्थिक संकट से जूझ रहा है. अनाज खरीदने के उसके पास पैसे नहीं हैं. लेबनान के वित्त मंत्री के मुताबिक कम से कम तीन महीने के सुरक्षित अनाज होने चाहिए. वित्त मंत्री ने कहा कि धमाके में तबाह हुए अनाज गोदामों में कम से कम 15 हज़ार टन अनाज की बर्बाद हुई है. लेबनान अपनी जरूरत का 80 फीसदी अनाज दूसरे देशों से आयात करता है जिसमें गेहूं सबसे ज्यादा खरीदा जाता है. पिछले महीने यहां आटे की कीमत बढ़ने के बाद लोगों ने जम कर हंगामा किया था.


अब तक 135 की मौत


लेबनान की राजधानी बेरूत में भयानक विस्फोट के बाद जहां बचाव अभियान में जुटे कर्मी शवों की गिनती और मलबों में जिंदा लोगों की तलाश में जुटे हैं, वहीं कई देशों ने संकटग्रस्त देश की मदद के लिए हाथ बढ़ाया है. लेबनान पहले से ही आर्थिक संकट से गुजर रहा है और इस संकट में उसकी मुश्किल को और बढ़ा दिया है. इस विस्फोट से कम से कम 135 लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों घायल हैं.

हर देश से मदद
ऑस्ट्रेलिया से लेकर इंडोनेशिया और यूरोप से लेकर अमेरिका तक सहायता पहुंचाने और तलाश दल को भेजने के लिए तैयार हैं.फ्रांस और लेबनान के बीच विशेष संबंधों को प्रदर्शित करते हुए फ्रांसीसी राष्ट्रपति एमैनुएल मैक्रों बृहस्पतिवार को लेबनान का दौरा करने वाले हैं. साइप्रस भी बचाव कर्मियों का दल और खोजी कुत्ते भेज रहा है.रूस ने मोबाइल अस्पताल स्थापित किए हैं और 50 आपातकर्मी और चिकित्सा कर्मियों को भेजा है। इसके अलावा रूस के तीन और विमान अगले 24 घंटे में लेबनान पहुंचने वाले हैं. वहीं ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री ने शुरुआत में 20 लाख ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की मदद लेबनान को देने का संकल्प लिया है, ताकि राहत कार्य में सहायता पहुंचाई जा सके.
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