ये ट्रेन वहां तक जाती है, जहां दुनिया खत्म हो जाती है

19 वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में, इसला ग्रांडे डे टिएरा डेल फुएगो को अर्जेंटीना सरकार ने खतरनाक अपराधियों को सजा देने के लिए एक दंड कॉलोनी में बदल दिया था. (सांकेतिक फोटो, News18 Bangla)
19 वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में, इसला ग्रांडे डे टिएरा डेल फुएगो को अर्जेंटीना सरकार ने खतरनाक अपराधियों को सजा देने के लिए एक दंड कॉलोनी में बदल दिया था. (सांकेतिक फोटो, News18 Bangla)

असली रेलवे (Railway) लकड़ी की पटरियों के साथ बनाया गया था, जिसे बैलों ने वैगनों को खींचा. 1909 में, जेल अधिकारियों ने स्टील रेल और स्टीम लोकोमोटिव के साथ नैरो गेज में लाइन को अपग्रेड किया. इसके बाद ट्रेन को "बंदियों की ट्रेन" (Train of the Prisoners) के रूप में जाना जाता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 12, 2020, 6:19 AM IST
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दक्षिण अमेरिका (South America) के दक्षिणी छोर पर, एंडीज़ पहाड़ियों से आगे एक सुंदर और रंगीन शहर उशुआईया है, जिसे दुनिया के सबसे दक्षिणी शहर (Southern most city) के रूप में जाना जाता है. इसी शहर के बाहरी इलाके में छोटा भाप से चलने वाला रेलवे (Railway) है. दरअसल यह रेलवे, मूल रूप से उशुआईया की कॉलोनी के लिए ही बनाया गया था. यह फिलहाल दक्षिणी फ़्यूज़ियन रेलवे पर्यटकों को पिको वैली के घने जंगलों वाले टोरो गॉर्ज और बेहद सुंदर नेशनल पार्क (Stunning National Park) से होते हुए लेकर जाता है.

'इस्ला ग्रांडे दे टिएरा डेल फुएगो' (Isla Grande de Tierra del Fuego) यानि वह द्वीप जहां उशुआईया स्थित है, दक्षिणी अमेरिकी इलाकों में उपनिवेश बनाए जाने वाले अंतिम क्षेत्रों में से एक था. पहली बार 1520 में फर्डिनेंड मैगेलन (Ferdinand Magellan) ने इसे खोजा था, और यह वही द्वीप था जिसका नाम "टिएरा डेल फुएगो" रखा गया था, जिसका अर्थ होता है- 'आग की धरती.' उसने द्वीपों पर देशी बस्तियों से उठते हुए आग और धुएं को देखकर यह नाम दिया था. कुछ यूरोपीय लोगों ने यहां प्रवास के लिए प्रयास किया था. और जब उन्होंने ऐसा किया तो चेचक और खसरा (smallpox and measles) जैसी बीमारियां फैल गईं, जिससे स्थानीय आबादी लगभग मिट ही गई. ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि यहां के मूल निवासियों के अंदर इन बीमारियों के लिए कोई प्रतिरक्षा नहीं थी. 19वीं शताब्दी के अंत यहां पर सबसे पहले बसने वाले और मिशनरी पहुंचे. और उस शहर ने आकार लेना शुरू कर दिया, जैसा हम इसे आज जानते हैं.

अर्जेंटीना सरकार सजा देने के लिए यहां खतरनाक अपराधियों को भेजती थी
19 वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में, इसला ग्रांडे डे टिएरा डेल फुएगो को अर्जेंटीना सरकार ने खतरनाक अपराधियों को सजा देने के लिए एक दंड कॉलोनी में बदल दिया था. एक जेल को डिजाइन किया गया था जिसमें एक केंद्रीय टॉवर से वॉर्डन कैदियों को देखते थे. इसके मुख्य भूमि से अलग होने के कारण, द्वीप से भागना लगभग असंभव था. ये अपराधी जेल के चारों ओर जंगल से लकड़ी से कस्बे का निर्माण करते थे. उन्होंने यातायात और परिवहन, निर्माण सामग्री को ले आने- ले जाने के लिए रेलवे का निर्माण भी किया.
असली रेलवे लकड़ी की पटरियों के साथ बनाया गया था, जिसे बैलों ने वैगनों को खींचा. 1909 में, जेल अधिकारियों ने स्टील रेल और स्टीम लोकोमोटिव के साथ नैरो गेज में लाइन को अपग्रेड किया. इसके बाद ट्रेन को "बंदियों की ट्रेन" के रूप में जाना जाता है.



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असली रेलवे लकड़ी की पटरियों के साथ बनाया गया था, जिसे बैलों ने वैगनों को खींचा. 1909 में, जेल अधिकारियों ने स्टील रेल और स्टीम लोकोमोटिव के साथ नैरो गेज में लाइन को अपग्रेड किया. इसके बाद ट्रेन को "बंदियों की ट्रेन" के रूप में जाना जाता है. इसके अलावा ट्रेन को 'ट्रेन देल फिन देल मुंडो' यानि दुनिया के खात्मे की ट्रेन कहा जाता है. क्योंकि दुनिया में इसके दक्षिण में कुछ नहीं है.
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