अजरबैजान को क्यों कहा जाता है लैंड ऑफ फायर? पानी में भी कैसे लग जाती है आग.. जानें

अजरबैजान: इस जगह पर 12 महीने यूं ही धधकती रहती है आग (Photo- Facebook)
अजरबैजान: इस जगह पर 12 महीने यूं ही धधकती रहती है आग (Photo- Facebook)

अजरबैजान-अर्मेनिया के बीच जंग (Azerbaijan-Armenia War) जारी है. लेकिन इससे इतर यहां पर कई रहस्यमयी जगहें (Mysterious Places) भी हैं. ऐसी ही एक जगह राजधानी बाकू (Capital Baku) के पास यानार डग (Yanar dag) नाम की पहाड़ी है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 20, 2020, 2:24 PM IST
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पिछले कुछ दिनों से अर्मेनिया (Armenia) और अजरबैजान (Azerbaijan) के बीच युद्ध जारी है. अब तक इसमें सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है. इन दोनों देशों के बीच शांति बहाल करने की कोशिश कई अन्य देश कर रहे हैं. ऐसे में देखना ये है कि कब इन दोनों देशों के बीच की जंग (Armenia-Azerbaijan War) खत्म होती है. हालांकि, आज ये दोनों देश भले ही जंग के कारण चर्चा में हैं, लेकिन असल में टूरिज्म (Tourism in Azerbaijan) के लिहाज से भी ये काफी महत्वपूर्ण हैं. इन दोनों ही देशों में कई ऐसे टूरिस्ट प्लेसेस हैं, जो विदेशी सैलानियों (Foreign Tourists) को भी लुभाते हैं. ऐसी ही एक जगह लैंड ऑफ फायर (Land of Fire) है, जो अजरबैजान की राजधानी बाकू (Baku) के पास है.

इसकी वजह से पूरे अजरबैजान को भी 'आग की धरती' के नाम से जाना जाता है. दरअसल, राजधानी बाकू के पास यानार डग (Yanar dag) नाम का पहाड़ है, जहां प्राकृतिक गैसों के रिसाव के कारण हमेशा आग लगी रहती है. इतना ही नहीं, आग के कारण यहां के वातावरण में भी गैस की गंध आती है. इसी जगह पर एक दुर्गा मां का प्राचीन मंदिर भी है, जिसे टेम्पल ऑफ फायर (Temple of Fire) के नाम से जाना जाता है. अजरबैजान को दुनिया का सबसे पुराना तेल उत्पादक देश माना जाता है. यह कॉकेशस के पूर्वी भाग में मौजूद एक गणराज्य है, जो पूर्वी यूरोप और एशिया के बीच बसा हुआ है.

जहां देखेंगे, वहीं लगी रहती है आग



प्राकृतिक गैस (Natural Gas) की वजह से इस पहाड़ी पर हमेशा आग लगी रहती है. लोग इसे पवित्र मानते हैं, लेकिन सन् 1969 में इसे बुझा दिया गया. बावजूद इसके अभी भी आग लगी रहती है. अजरबैजान के शहर एस्ट्रा में एक जगह है यानारा बूलग. यहां पर भी रहवासियों के लिए मेटल के पाइप से जरिए पानी उपलब्ध कराया जाता है, लेकिन जमीन के पानी में तेल का अंश घुला होता है और पानी में भी आसानी से आग लगाई जा सकती है. बहरहाल, यहां रहने वालों का मानना है कि इस पानी से उपचार किया जा सकता है, इसलिए वे इसे पीते हैं.
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