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कनाडा चुनाव: दोनों पार्टियों में कड़ी टक्कर, ट्रूडो को पूर्ण बहुमत मिलना मुश्किल

भाषा
Updated: October 21, 2019, 4:09 PM IST
कनाडा चुनाव: दोनों पार्टियों में कड़ी टक्कर, ट्रूडो को पूर्ण बहुमत मिलना मुश्किल
जस्टिन ट्रूडो 2015 का चुनाव जीता था. लेकिन इस बार उनकी राह मुश्किल दिख रही है. फाइल फोटो: रॉयटर्स

जस्टिन ट्रूडो (Justin Trudeau)को इस साल हुए एक घोटाले से भी जूझना पड़ रहा है. चुनावों से संकेत मिल रहे हैं कि ट्रूडो की लिबरल पार्टी (Liberal Party) प्रतिद्वंद्वी कंजर्वेटिव पार्टी से हार सकती है, या शायद जीत भी जाए तो भी संसद में बहुमत पाने में नाकाम रह सकती है.

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टोरंटो: कनाडा (Canada) में सघन चुनाव अभियान के बाद सोमवार को एक नई संसद का चुनाव हो रहा है. इस चुनाव में प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो (Justin Trudeau) के सत्ता से बाहर होने का खतरा है. ट्रूडो ने अपने उदारवादी पिता एवं दिवंगत प्रधानमंत्री पियर ट्रूडो की अपार लोकप्रियता को आगे बढ़ाते हुए 2015 का चुनाव जीता था, लेकिन घोटाले और लोगों की भारी उम्मीदों ने उनकी संभावनाओं को नुकसान पहुंचाया है.

चुनावों से संकेत मिल रहे हैं कि ट्रूडो की लिबरल पार्टी (Liberal Party) प्रतिद्वंद्वी कंजर्वेटिव पार्टी से हार सकती है, या शायद जीत भी जाए तो भी संसद में बहुमत पाने में नाकाम रह सकती है. ऐसे में उन्हें सत्ता में बने रहने के लिए विपक्षी पार्टी पर निर्भर रहना पड़ेगा. पिछले 84 वर्षों में ऐसा कभी नहीं हुआ है कि पूर्ण बहुमत के साथ पहली बार कनाडा का प्रधानमंत्री बना कोई व्यक्ति अगले चुनाव में हार गया हो. ट्रुडो ने कनाडा में करीब 10 साल तक चले कंजर्वेटिव पार्टी के शासन के बाद 2015 में उदारवादी सरकार बनाई थी और वह दुनिया के चुनिंदा उदारवादी नेताओं में एक हैं.

घोटालों से जूझ रही है जस्टिन ट्रुडो की सरकार
ट्रूडो (Justin Trudeau)को इस साल हुए एक घोटाले से भी जूझना पड़ रहा है, जिसमें उनकी पूर्व अटॉर्नी जनरल ने कहा था कि उन्होंने क्यूबेक कंपनी के मुकदमे को रोकने के लिए उन पर दबाव डाला. इस बारे में ट्रूडो ने अपनी सफाई में कहा कि वह नौकरियां बचाना चाहते थे, लेकिन फिर भी इस घटना से उन्हें नुकसान हुआ और एंड्रयू शीयर के नेतृत्व वाली कंजर्वेटिव पार्टी को बढ़त मिली.

सत्ता के लिए छोटे दलों पर निर्भर
चुनावी पोल के अनुसार ट्रूडो और लिबरल पार्टी का अपनी प्रतिद्वंद्वी कंजर्वेटिव पार्टी से कड़ा मुकाबला है. पोल के अनुसार ट्रूडो और लिबरल पार्टी को बहुमत के लिए जरूरी सीटें मिलनी मुश्किल हैं. इससे वे कमजोर पड़ जाएंगे और शासन के लिए छोटे दलों पर निर्भर होंगे.

कनाडा की संसद यानी हाउस ऑफ कॉमंस में कुल 338 सीटें हैं और किसी भी पार्टी को बहुमत की सरकार बनाने के लिए 170 सीटों की जरूरत होती है. जस्टिन ट्रूडो ने सर्वाधिक चुनाव अभियान ओंटारियो में किया. यह कनाडा का सर्वाधिक आबादी वाला राज्‍य है. कुल 338 सीटों में से यहां की 108 सीटें हैं. इनमें से 76 सीटें लिबरल पार्टी के पास हैं और अगर उन्‍हें चुनाव में जीत हासिल करनी है तो इन सीटों को बचाना पड़ेगा.
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First published: October 21, 2019, 4:06 PM IST
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