लॉकडाउन की वजह से साफ हुई यूरोप की हवा, 11 हजार मौतें हुईं कम

लॉकडाउन की वजह से साफ हुई यूरोप की हवा, 11 हजार मौतें हुईं कम
लॉकडाउन की वजह से वायु प्रदूषण काफी कम हो गया है.

एक स्टडी में बताया गया है कि लॉकडाउन (lockdown) की वजह से यूरोप (Europe) की हवा इतना साफ हो गई है कि वहां 11 हजार मौतें कम हुई हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 30, 2020, 9:13 PM IST
  • Share this:
दुनिया के कई हिस्सों में लगाए लॉकडाउन (Lockdown) का बहुत ही सकारात्मक असर रहा है. खासकर लॉकडाउन की वजह से प्रदूषण (Air Pollution) की समस्या काफी कम हुई है और इससे वातावरण बिल्कुल स्वच्छ हो गया है. लॉकडाउन की वजह से यूरोप की हवा इतनी साफ हो गई है कि नतीजे में वहां 11 हजार मौतें कम हुई हैं. एक स्टडी के मुताबिक यूरोप की साफ हवा की वजह से पिछले दिनों 11 हजार मौतें कम हुई हैं.

स्टडी में लॉकडाउन के सकारात्मक असर पर हैरान करने वाली जानकारी दी गई है. सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर ने ये स्टडी की है. स्टडी में बताया गया है कि ट्रैफिक और इंडस्ट्रियल पॉल्यूशन कम होने की वजह से करीब 13 लाख दिन की वर्क अबसेंस कम हुई हैं, कम से कम 6 हजार बच्चों में अस्थमा अटैक के मामले कम आए हैं, हॉस्पिटल की इमरजेंसी भर्ती के 1900 मामले कम हुए हैं और प्रीटर्म बर्थ के 600 मामले कम हुए हैं.

साफ हवा का सबसे ज्यादा फायदा जर्मनी को मिला
स्टडी में बताया गया है कि यूरोपिय देशों में प्रदूषण कम होने का सबसे ज्यादा फायदा जर्मनी को मिला है. जर्मनी में साफ हवा की वजह से 2,083 मौतें कम हुई हैं. इसके बाद ब्रिटेन का नंबर आता है. यहां 1,752 मौतें कम हुई हैं. इटली में साफ हवा की वजह से 1,490 मौतें कम हुई हैं. फ्रांस में 1,230 और स्पेन में 1,083 मौत के मामले कम हुए हैं.
कोरोना वायरस की महामारी की वजह से एक तरफ जहां पूरी दुनिया में 2 लाख 20 हजार से ज्यादा लोगों ने अपनी जान गंवाई है, वहीं लॉकडाउन की वजह से भविष्य की एक नई झलक देखने को मिली है. स्टडी में कहा गया है कि अब वक्त आ गया है जब फॉसिल फ्यूल की जगह रिन्यूएबल एनर्जी से काम चलाया जाए.



पिछले साल की तुलना में 40 फीसदी कम हुआ नाइट्रोजन ऑक्साइड
रिपोर्ट के नतीजों का कई तरह से विश्लेषण किया जा रहा है. एयर क्वालिटी के आंकड़ों को मौसम की स्थिति और प्रदूषण में आई कमी से जोड़कर देखा जा रहा है.

रिपोर्ट के मुताबिक अगर इस वक्त की तुलना पिछले साल इसी दौरान से की जाए तो इस साल नाइट्रोजन ऑक्साइड का लेवल 40 फीसदी तक कम हुआ है. पीएम 2.5 का लेवल पिछले साल की तुलना में 10 फीसदी कम हुआ है. ऐसा कोयले से पैदा होने वाली उर्जा और गाड़ियों से निकलने वाले प्रदूषण दोनों के कम होने से हुआ है.

ये भी पढ़ें:

कोरोना: यूके में 26,488 पहुंचा मौत का आंकड़ा, इंग्लैंड में 391 नई मौतें
ब्रिटिश पीएम बोरिस बने छठे बच्चे के पिता, जानिए क्या है उनके सातवें बच्चे का राज
डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा झटका, अमेरिकी जनता ने कोरोना से निपटने में नाकाम माना
डॉक्टर को नहीं पता था कैसे काम करता है वेंटिलेटर, कोरोना मरीज की गई जान
कोरोना संक्रमण के डर से अमेरिका में रोज मारे जा रहे हैं लाखों जानवर
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज