फ्रांस में पहली बार मिला Corona वायरस का 'भारतीय स्ट्रेन', तीन लोग संक्रमित

jabalpur. अस्पताल प्रबंधन वीडियो वायरल करने से नाराज़ है.

कॉन्सेप्ट इमेज.

jabalpur. अस्पताल प्रबंधन वीडियो वायरल करने से नाराज़ है. कॉन्सेप्ट इमेज.

फ्रांसीसी स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि फ्रांस में कोरोना वायरस के 'भारतीय प्रकार' B.1.617 के पहले तीन मामले सामने आए हैं. ये सभी हाल ही में भारत (India) की यात्रा करके वापस लौटे हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 30, 2021, 10:47 AM IST
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इटली. फ्रांस (France) में कोरोना वायरस के 'भारतीय प्रकार' B.1.617 के पहले तीन मामले सामने आए हैं. फ्रांसीसी स्वास्थ्य मंत्रालय ने इसकी जानकारी दी. गुरुवार को इस मामले की पुष्टि करते हुए मंत्रालय ने कहा कि यह वायरस उस महिला में पाया गया है जो हाल ही में भारत (India) की यात्रा कर के फ्रांस लौटी है और फिलहाल दक्षिण पश्चिमी फ्रांस में रह रही है. साथ ही दो अन्य व्यक्तियों में भी यह वायरस पाया गया है जिन्होंने भारत यात्रा की थी.

बता दें, कोरोना वायरस की इंडियन वेरिएंट (Indian Strain) दुनिया के दूसरे देशों में भी फैलने लगा है. इससे पहले अब तक करीब 17 देशों में इसके पाए जाने की पुष्टि हो चुकी है. यह कहना है विश्व स्वास्थ्य संगठन का. डब्ल्यूएचओ (WHO) के मुताबिक पूरी दुनिया में बीते हफ्ते में कोरोना संक्रमण के 57 लाख मामले सामने आ चुके हैं. इस बीच कोरोना वायरस का 'भारतीय प्रकार' जिसे बी.1.617 के नाम से या 'दो बार रूप परिवर्तित कर चुके प्रकार' के तौर पर जाना जाता है, वह कम से कम 17 देशों में पाया गया है. संयुक्त राष्ट्र स्वास्थ्य एजेंसी ने मंगलवार को अपने साप्ताहिक माहामारी संबंधी जानकारी में कहा कि सार्स-सीओवी-2 के बी.1.617 प्रकार या 'भारतीय प्रकार' को भारत में कोरोना वायरस के मामले बढ़ने का कारण माना जा रहा है, जिसे डब्ल्यूएचओ ने रुचि के प्रकार (वैरिएंट्स ऑफ इंटरेस्ट-वीओआई) के तौर पर निर्दिष्ट किया है.

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एजेंसी ने कहा कि 27 अप्रैल तक, जीआईएसएआईडी में करीब 1,200 अनुक्रमों (सीक्वेंस) को अपलोड किया गया और वंशावली बी.1.617 को कम से कम 17 देशों में मिलने वाला बताया. जीआईएसएआईडी 2008 में स्थापित वैश्विक विज्ञान पहल और प्राथमिक स्रोत है जो इंफ्लुएंजा विषाणुओं और कोविड-19 वैश्विक माहामारी के लिए जिम्मेदार कोरोना वायरस के जीनोम डेटा तक खुली पहुंच उपलब्ध कराता है. एजेंसी ने कहा कि पैंगो वंशावली बी.1.617 के भीतर सार्स-सीओवी-2 के उभरते प्रकारों की हाल में भारत से एक वीओआई के तौर पर जानकारी मिली थी और डब्ल्यूएचओ ने इसे हाल ही में वीओआई के तौर पर निर्दिष्ट किया है. डब्ल्यूएचओ ने कहा कि अध्ययनों ने इस बात पर जोर दिया है कि दूसरी लहर का प्रसार भारत में पहली लहर के प्रसार की तुलना में बहुत तेज है.
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