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ठीक हो चुके लोगों की ज़िंदगी में कोरोना लौटेगा न दोबारा, इसका सबूत नहीं - WHO

ठीक हो चुके लोगों की ज़िंदगी में कोरोना लौटेगा न दोबारा, इसका सबूत नहीं - WHO

उन्होंने कहा कि यह नर्स पिछले  2 हफ्ते से अस्पताल में अलग-अलग जगहों पर ड्यूटी कर रही थी. (प्रतीकात्मक फोटो)

उन्होंने कहा कि यह नर्स पिछले 2 हफ्ते से अस्पताल में अलग-अलग जगहों पर ड्यूटी कर रही थी. (प्रतीकात्मक फोटो)

एक वैज्ञानिक शोधपत्र में ये दावा किया गया है कि जो लोग कोरोना वायरस के संक्रमण से ठीक हो चुके हैं उन्हें संक्रमण दोबारा नहीं होगा इसका कोई सबूत नहीं है

    कोविड19 को लेकर रोज़ नए नए दावे किए जा रहे हैं. लेकिन कोरोनावायरस का संक्रमण अलग अलग लक्षणों के साथ हमले कर रहा है. जहां अब तक बिना लक्षण के कोरोना संक्रमण के मामले सामने आ रहे हैं वहीं कोरोनावायरस से ठीक हो चुके लोगों में दोबारा संक्रमण हो रहा है. ऐसे में विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO ने उस थ्योरी को खारिज़ कर दिया कि कोविड 19 से ठीक हो चुके व्यक्ति को दोबारा संक्रमण नहीं होगा. WHO ने कहा है कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि कोरोना संकमण दूसरी बार नहीं होगा.

    चीन में कोरोना के चौंकाने वाले मामले वुहान से सामने आए जहां संक्रमण से ठीक हो चुके लोगों में दो महीने बाद फिर से संक्रमण दिखाई दिया. ऐसे ही कई मामले दुनिया के दूसरे हिस्सों से भी सामने आ रहे हैं.

    एक वैज्ञानिक शोधपत्र में ये दावा किया गया है कि जो लोग कोरोना वायरस के संक्रमण से ठीक हो चुके हैं उन्हें संक्रमण दोबारा नहीं होगा इसका कोई सबूत नहीं है. कोरोना महामारी पर प्रकाशित शोधपत्र में बताया गया है कि प्राकृतिक रूप से संक्रमण के जरिए हुई बीमारी के रोगाणु से लड़ने के लिए शरीर में प्रतिरक्षा तंत्र का विकास कई चरणों में होता है. शोधपत्र में कहा गया कि जो लोग कोविड19 से ठीक हो चुके हैं उनके ब्लड में मौजूद एंटीबॉडीज़ कोरोना वायरस के संक्रमण को रोक सकता है या नहीं इसके कोई सबूत नहीं मिले हैं. ऐसे में कोविड 19 से ठीक हो चुके मरीज़ के दोबारा संक्रमित न होने को लेकर कुछ कहा नहीं जा सकता है.

    विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि इस बात के कोई सबूत नहीं मिले हैं कि जो लोग कोरोना संक्रमण से लड़कर स्वस्थ हो चुके हैं और जिनमें एंटीबॉडी विकसित हो चुकी है वो लोग दोबारा कोरोना वायरस से संक्रमिति नहीं होंगे. एंटीबॉडी के जरिये शरीर किसी रोग से लड़ता है. एंटीबॉडी एक तरह का प्रोटीन होता है जो कि शरीर में मौजूद बैक्टेरिया, वायरस या किसी दूसरी बीमारी से लड़ने के लिए बनता है. पांच तरह के एंटीबॉडी होते हैं. ये एंटीजन को खत्म कर बॉडी के इंफेक्शन को कम करने का काम करते हैं. ऐसे में कोरोना वायरस के खिलाफ एंटीबॉडी बनाने की कोशिश की जा रही है. वहीं डॉक्टर प्लाज़्मा थैरेपी का भी कोरोना मरीज़ों के इलाज में इस्तेमाल कर रहे हैं. प्लाज़्मा थैरेपी के जरिए कई मरीज़ ठीक हो चुके हैं और वो प्लाज़्मा डोनेट कर दूसरे मरीज़ों का इलाज करवा रहे हैं. जबकि शोधपत्र में कहा गया कि कोविड19 से ठीक हो चुके लोगों के ब्लड में मौजूद एंटीबॉडीज़ से कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने में कोई सबूत नहीं मिले हैं.

    Tags: Coronavirus

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