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Opinion: PM मोदी ने दुनिया को दिखाई देश की ताकत, यूक्रेन से भारतीयों को लाए वापस

पीएम मोदी ने यूक्रेन से छात्रों को वापस लाकर दुनिया को देश की ताकत दिखाई है.

पीएम मोदी ने यूक्रेन से छात्रों को वापस लाकर दुनिया को देश की ताकत दिखाई है.

Opinion: पीएम मोदी खुद वाराणसी में युक्रेन से वापस आए छात्रों से मिले औऱ उनका हाल चाल पूछा। वाकई इन छात्रों के लिए बहुत बड़ा अवसर था। पीएम मोदी ने उन्हें तब सुरक्षित बाहर निकाला जब उन्हें युद्ध क्षेत्र से वापस निकल आने की उम्मीद नहीं बची थी। पीएम मोदी को इन युवाओ से संवेदना इतनी कि गोलीबारी में मारे गए एक छात्र के परिवार वालों से भी बात की.

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ऑपरेशन गंगा के तहत तमाम भारतीय नागरिकों को सुरक्षित युक्रेन की सीमा से बाहर निकाला जा चुका है। अपने नागरिकों को सुरक्षित निकालने के लिए पीएम मोदी द्वारा की गयी पहल और कुटनीति का डंका पूरी दुनिया में बजने लगा है। खास तौर पर तब जब एक पाकिस्तानी महिला ने ऑपरेशन गंगा के तहत युक्रेन से सुरक्षित बाहर निकालने के लिए पीएम मोदी का शुक्रिया अदा किया। बांग्लादेश की पीएम शेख हसीना ने 9 बांग्लादेशी नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए भी पीएम मोदी को धन्यवाद दिया है। सरकारी सूत्र बता रहे हैं कि भारत ने इसके अलावे नेपाल और अफ्रीकी देश ट्यूनीशिया के नागरिकों को भी सुरक्षित बाहर निकाला है। जानकारी के लिए बता दें कि पीएम मोदी ने ऑपरेशन गंगा शुरु होने के वक्त ही कहा था कि अगर पडोसी देशों को जरुरत हो तो उनके नागरिकों को भी भारत सुरक्षित निकालने में मदद कर सकता है।

रुस-यूक्रेन जंग के शुरु होने के ठीक बाद ही 24 फरवरी को पीएम मोदी ने एक कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्यूरिटी की उच्च स्तरीय बैठक बुलायी थी। इस बैठक का पहला एजेंडा था यूक्रेन से भारतीयों औऱ भारतीय छात्रों को सुरक्षित वॉर जोन से बाहर निकालना। साथ ही इस बात पर भी जम कर माथापच्ची हुई कि इस जंग का असर देश की अर्थव्यवस्था और डिप्लोमेसी पर क्या पडेगा। 24 फरवरी की देर रात विदेश मंत्रालय ने युक्रेन की सीमाओं पर बसे देशो में अपने नुमाइंदे भेज दिए ताकि वहां से सुरक्षित भारतीयों को वापस निकालने में आसानी हो सके। युक्रेन की जमीनी सीमा से लगे हंगरी, पोलैंड, स्लोवाक रिपब्लिक और रोमनिया में भारतीय विदेश विभाग के लोग सक्रिय हो गए थे। 27 फरवरी को पीएम मोदी ने एक बार फिर एक उच्च स्तरीय बैठक बुलायी। बैठ के बाद ऐलान किया गया कि सुरक्षित बापसी के लिए एक ट्वीटर अकाउंट बनाया जा रहा है और ऑपरेशन गंगा के नाम से एक हेल्पलाइन शुरु की गयी। इसके तहत 24 घंटे काम करने वाला एक कंट्रोंल सेंटर बनाया गया और फँसे लोगों के लिए एक टॉल फ्री नंबर भी जारी कर दिया गया।

अपने वरिष्ठ मंत्रियों को यूक्रेन की सीमा से सटे देशों में भेजा
27 फरवरी की पीएम मोदी की हाई लेवल बैठक दो घंटे चली। इसमें चर्चा इस बात पर हुई की युक्रेन के पडोसी देशों के साथ कैसे संपर्क और सहयोग बढा कर छात्रों को सुरक्षइत बाहर निकालने की प्रक्रिया में और तेजी लाया जाए। बैठक के बाद ये फैसला हुआ कि युक्रेन की सीमा से सटे चार देशों में चार वरिष्ठ मंत्री जाएंगे और वे वापसी के लिए चल रहे ऑपरेशन गंगा को कॉरडिनेट करेंगे। ये भारत के विशेष दूत बन कर उन देशों में जाएंगे। ये मंत्री थे ज्योतीरादित्य सिंधिया रोमानिया गए, जनरल वी के सिंह पहुंचे पोलैंड, किरेन रीजीजू को स्लोवाकि.या भेजा गया तो हरदीप पुरी हंगरी जा कर भारतीय नागरिकों की वापसी आसान करते रहे।

भारत में भी छात्रों की वापसी पर स्वागत करने के लिए तमाम मंत्रियों को काम पर लगाया गया था। जो खुद एयरपोर्ट जाकर उनका स्वागत करने में लगे थे। छात्रों का दिल जीतने मे केन्द्रीय मंत्री स्मृति इरानी आगे रहीं क्योंकि चलने में मुश्किल पा रह छात्रा को देखा तो उसे सहारा देकर बाहर लेकर आयीं और सुरक्षा कर्मियों को जरुरी निर्देश दे कर ही वापस गयीं ।

पीएम मोदी खुद वाराणसी में युक्रेन से वापस आए छात्रों से मिले औऱ उनका हाल चाल पूछा। वाकई इन छात्रों के लिए बहुत बड़ा अवसर था। पीएम मोदी ने उन्हें तब सुरक्षित बाहर निकाला जब उन्हें युद्ध क्षेत्र से वापस निकल आने की उम्मीद नहीं बची थी। पीएम मोदी को इन युवाओ से संवेदना इतनी कि गोलीबारी में मारे गए एक छात्र के परिवार वालों से भी बात की।

विशेष विमान भेज कर भारतीयों की वापसी शुरु की

पीएम मोदी हर रोज देर रात तक बैठकें करते रहे। 25 फरवरी को पहली बार भारत के दो विमान युक्रेन की सीमा तक पहुंचे और वहां तक पहुंचे भारतीय छात्रों को वापस ले कर दिल्ली और मुंबई पहुंचे। इसके बाद विशेष विमानों का भारतीयों को लेकर भारत आना अनवरत जारी रहा। कुल मिलाकर 55 से ज्यादा विशेष सामान्य विमानो से 18 हजार से ज्यादा भारतीय वापस लाए जा चुके हैं। खारकीव और सेमा जैसे युद्ध क्षेत्र से भी अपनी कुटनीति का परिचय देते हुए पीएम मोदी ने भारतीय नागरिकों को बाहर निकाल लिया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने जब ट्वीट कर बताया कि सेमा जैसे क्षेत्र से बचे हुए भारतीय लोगों की आखिरी खेप निकल चुकी है तो भी पीएम मोदी ने राहत की सांस ली।

वायु सेना को भी काम पर लगाया

1मार्च को सरकारी सूत्रों ने बताया की भारतीयो को लाने के लिए वायु सेना की मदद ली जा रही है। उस दिन सी-17 ग्लोबमास्टर ने भारत से उडान भरी। इससे न सिर्फ राहत सामग्री बेजी गयी बल्कि ज्यादा संख्या में भारतीयों को वापस लेकर आए। जानकारी के लिए बता दें कि ये सी-17 ग्लोबमास्टर न सिर्फ अफगानिस्तान से भारतीयों को सुरक्षित निकाल कर लाए थे बल्कि कोरोना के संकट के दौरान भी आक्सीजन के कंटेनर की सप्लाई में महत्वपूर्ण भुमिका निभायी थी। वायुसेना ने अपनी लगभग एक दर्जन सोर्टीज में 3000 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित वापस निकाला। साथ ही 26 टन राहत सामग्री भी इन विमानों से भएजी है।

मार्च 2 की सुबह वायु सेना के ये विमान रोमिया के लिए उड चुके थे। 2 मर्च को 3 विमानों ने उडान भरी। वायु सेना हर रोज 4 उडाने भेजने को तैयार थी। जब भारतीय वाय सेना के विमान पर वापस आ रहे छात्रों ने भारत माता की जय के नारे लगाए तो पुरी दुनिया में भारतीयों को मस्तक गर्व से चौडा हो गया। संदेश यही गया कि दुनिया के किसी भी कोने में रहें, आश्वस्त रहें की भारतीयों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए मोदी सरकार आगे जरुर आएगी। ये भरोसा भी बढा रहा है औऱ भारतीयों का मान भी।

दुनिया के दूसरे शक्तिशाली देशों ने अपने नागरिकों को भगवान भरोसे छोडा

भारत का ऑपरेशन गंगा पूरी तरह से सफळ रहा। पीएम मोदी की कूटनीति भी चमकी और नागरिक भी सुरक्षीत लौट आए। पीएम मोदी ने पहले ही ऐलान कर दिया थआ कि अगर कोई पडोसी देश चाहे तो भारत उनके नागरिकों को निकालने में मदद कर सकता है। हुआ भी ऐसा ही। पाकिस्तान की एक महिला ने यूक्रेन से सुरक्षित बाहर निकालने के लिए पीएम मोदी और कीव के भारतीय दूतावास को शुक्रिया कहा। तो बांग्लादेश के 9 नागरिकों को युक्रेन से सुरक्षित बाहर निकालने के लिए वहां की पीएम शेख हसीना ने पीएम मोदी को धन्यवाद दिया। सरकारी सूत्रों ने बताया कि ऑपरेशन गंगा के तहत नेपाल, ट्यूनिशिया के छात्रों को बाहर निकाला गया।

24 फरवरी के बाद से ही भारत अपने नागरिकों को सुरक्षित निकालने की योजना बनाने में लग गया था। 27 फऱवरी से ऑपरेशन गंगा की शुरुआत भई हो गयी थी। लेकिन दुनिया के बाकी ताकतवर देशों के अपने नागरिकों के लिए क्या किया ये जानना भी जरुरी है। सबसे पहले बात चीन की । 24 फरवरी को चीन ने ऐलान किया कि वो युक्रेन से अपने नागरिकों को निकालने के लिए चार्टर्ड प्लेनों का इस्तेमाल करेगा। और अपने नागरिकों को कहा कि वो कीव छोड़ते वक्ते अपने वाहनों पर चीनी झंडा लगाएं। लेकिन 26 फरवरी को ये निर्देश बदलने पड़े। चीनी राजदूत ने कहा कि ये खबरे गलत हैं कि कि उन्होने कीव छोड दिया है औऱ साथ ही सोशल मीडिया पर आयी चीनी नागरिकों पर हमलों की घबरों के बाद चीनी राजदूत ने चीन के नागरिकों से अपील की कि वो स्थानीय लोगों से नहीं झगडें और वाहनो से चीनी झँडे हटा दें। कुल मिला कर भारत स अंतर यही रहा कि चीनि ने अपरने नागरिकों को निकालने का प्लान रोक दिया और कोई ट्रेवल एडवाइजरी जारी नहीं की और साथ ही चीनी झंडों पर हमला होते रहा लेकिन भारत का दूतावास 24 घँटे हरकतम रहा, भारतीय झंडे लगे वाहनों पर हमला नहीं हुआ और लगातार एडवाइजरी जारी होती रही।

उधर अमरीका ने अपने नागरिकों को बाहर निकालने में असमर्थता जाहिर की. उन्होने एक एडवाइजरी जारी कर के कहा कि अमरीकी नागरिक निजी तरीके से सुरक्षित बाहर निकलने की कोशिश करें. हालांकि युक्रेन की सीमा पार कर जाने वाले देशों के दूतावासों का संपर्क नंबर जारी किया। यानि अमरीका ने अपने नागरिकों को निकालने के लिए कोई मिशन शुरु किया। आलम ये कि था कि अमरीकी नागरिकों को अपना दो दिनों का राशन पानी लेकर युक्रेन की सीमा पर जाने की एडवाइजरी दी जा रही थी। नतीजा ये रहा कि अमरीकी नागरिकों को भी यूक्रेन की सीमा पर लंबा इंतजार करना पड़ा। बिट्रेन की सरकार ने साप कि रुसी हमले के कारण उनके नागरिकों को कन्सूलर एक्सेस देना संभव नहीं होगा। और वहां के नागरिकों को इसकी उम्मीद भी नहीं करनी चाहिए। कीव का ब्रिटिश दूतावास को दूसरी जगह ले जाना पड़ा। जर्मनी ने भी कह दिया कि कि उनके सभी नागरिक जल्दी युक्रेन छोडें क्योंकि उन्हे निकालना संभव नहीं है।

क्योंकि उन्हे निकालना संभव नहीं है.. 

यही फर्क था। पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत के एक्शन में और बाकी विदेशी ताकतों में। यहां भारतीयों को वापस लाने के लिए प्लेन जा रहे थे, एडवाइजरी जारी की जा रही थी। भारत के झंडे लगाकर वाहन सुरक्षित थे। कीव का दूतावास 24 घंटे काम कर रहा था। ट्वीटर हैंडल, टॉल फ्री नंबर तक भारतीयों को उपलब्ध कराए गए। इसके पलट दुनिया की इन बड़ी ताकतों ने अपने नागरिकों को भगवान भरोसे छोड दिया।

राष्ट्रपति पुतिन से बात करने वाले पहले शासनाध्यक्ष बने, राष्ट्रपति जेलेंस्की से भी साधा संपर्क

पहली सीसीएस की बैठक करने के बाद पीएम मोदी ने रुस के राष्ट्रपति पुतिन से बात की। वो पुतिन से बात करने वाले पहले राषअट्राध्यक्ष तो बने ही लेकिन पहले नेता बने जिन्होने पुतिन से सीजफायर और हमले रोकने की अपील की। पीएम ने इस जंग से जुड़े तमाम स्चेक होल्डर्स को भी बात चीत के लिए आगे आने को तहा। लेकिन पुतिन से पीएम मोदी ने भारतीयो को सुरक्षित बाहर निकालने में मदद देने की अपील भी की। यानि शुरुआत हो गयी थी। 26 फरवरी को पीएम मोदी ने राष्ट्रपति झेलेंसकी से बात की। पीएम मोदी ने युक्रेन में जान माल के हुए नुकासन पर दुख जताया और तुरंसत सीजफायर की मांग भी की। पीएम मोदी ने दोस्ती का हाथ बढाते हुए कहा कि वे शांति प्रक्रिया में योगदान देने को तैयार हैं। राष्ट्रपति जेलेंस्की से भी बातचीत में पीएम मोदी ने भारतीयों की सुरक्षित वापसी के बारे भी च्रर्चा की।

जब युक्रेन की सीमा से लगे देशों से छात्रों को लाना था तो 1 मार्च को उन चारों राष्ट्रों रोमानिया, हंगरी, पोलैंड, स्लोवाक रिपब्लिक के प्रधानमंत्रियों से बात की ताकि युक्रेन से निकल रहे भारतीयों को उन देशों की सीमाओं में परेशानी नहीं खड़ी हो। 3 मार्च को पीएम मोदी ने एक बार फिर राष्ट्रपति पुतिन से बात की। खारकीव में फंसे भारतीयों को निकालने के लिए उनकी मदद की अपील की। यहां भी भारत को मदद मिली और भारतीय वहां से सुरक्षित निकल पाए।

सोमवार यानि 7 मार्च को पीएम मोदी ने एक बार राष्ट्रपति पुतिन और राष्ट्रपति जेलेंस्की से बात की। उन्होने पुतिन से अपील की कि वे राष्ट्रपति जेलेंस्की से सीधी बात करें। पीएम ने सीजफआयर की तारीफ की और युक्रेन में खासकर सूमी से एक मानवीय कॉरीडोर बना कर लोगों को सुरक्षइत निकलने का रास्ता देने की तारीफ भी की। उसी दिन दोपहल पीएम मोदी ने राषअट्रपति जेलंस्की से भी बात की। पीएम मोदी ने भआरतीयों को सुरक्षइत बाहर निकालने के लिए जेलेंस्की को धन्यवाद भी दिया। इन्ही फोन कॉल्स का ही नतीजा था कि सूमी से भारतीयों को सुरक्षित निकाला जा सका था।

सोमवार को ही पीएम मोदी ने आखिरी बार उच्चस्तरीय बैठक बुलायी थी। लेकिन अब लोगों को वापस लाकर सरकार ने राहत की सांस ली है। लेकिन पीएम मोदी जानते हैं कि अभी अंतराष्ट्रीय स्तर पर काफी खेल खेलने हैं। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत ने रुस के पक्ष में स्टैंड लिया है। पश्चिमी ताकतें इन मुद्दों पर पैनी निगाह बनाए हुए हैं। लेकिन असली चुनौती है तेल की कीमतें काबू करने की। पीएम मोदी ने इन मुद्दों पर पैनी नजर बनाए हुए हैं। तय है कि भारत को इसका असर बहुत ज्यादा नहीं झेलना पडेगा.

अंत में यही कहना चाहता हूं कि अपने नागरिकों को सुरक्षइत बाहर निकालने की इतनी बड़ी मुहिम किसी भी देश ने नहीं चलायी होगी। पीएम मोदी ने दुनिया के सामने एक उदाहरण पेश किया है कि जरुरी है अपने नागरिकों के जान माल की रक्षा बाकी चीजें तो मैनेज होती जाएंगी। केन्द्रीय मंत्री पीयुष गोयल ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि पीएम मोदी ने बिना विश्राम किए पूरा समय इसी चिंता मे बिताया कि वहां फँसे 18000 छात्रों को सुरक्षित कैसे निकाला जाए। जब तक मुहिम पूरी नहीं हुई, पीएम मोदी ने राहत की सांस नहीं ली। हर रोज उच्च स्तरिय बैठकों के दौर चलते रहे। कुछ राजनीतिक दलों ने बचाल मिशन देरी से शुरु करने के लिए सवाल उठाए तो जरुर लेकिन वो बेअसर साबित हुए क्योकि पीएम मोदी ने पूरी की पूरी सरकार को एकजुट होकर अपने नागरिकों को सुरक्षित रखा। इस मुहिम ने न सिर्फ देश को जनता का पीएम मोदी पर भरोसा बढ़ा दिया है बल्कि दुनिया भर में भारतीयों का मान भी बढाया है।

(डिस्क्लेमरः लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं और ये उनके निजी विचार हैं)

Tags: India russia, PM Modi, Ukraine

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