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    वैज्ञानिकों ने खोजी कोरोना वायरस से लड़ सकने में सक्षम एंटीबॉडी, शोध में दावा

    कोरोना वायरस को लेकर हुआ शोध.
    कोरोना वायरस को लेकर हुआ शोध.

    शोधकर्ताओं के अनुसार यह जांच उन लोगों को एंटीबॉडी देने में काम आ सकती है, जिन्‍हें कोरोना वायरस संक्रमण (Coronavirus) हो चुका है.

    • News18Hindi
    • Last Updated: October 20, 2020, 10:06 AM IST
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    नई दिल्‍ली. कोरोना वायरस (Coronavirus) का इलाज खोजने के लिए दुनिया भर में वैज्ञानिक युद्ध स्‍तर पर काम कर रहे हैं. कोविड 19 (Covid 19) का टीका और दवा विकसित करने के लिए कई देशों के वैज्ञानिक जुटे हुए हैं. कोरोना वायरस को लेकर रोजाना नए-नए शोध भी सामने आ रहे हैं. इस बीच अमेरिका की ओहायो स्टेट यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने एक लैब टेस्टिंग प्रक्रिया विकसित की है. यह उन एंटीबॉडी की पहचान करने में सहायक है, जो हमारी कोशिकाओं में होने वाले कोरोना वायरस संक्रमण से हमें बचाती हैं. इस खोज से कोरोना वायरस के इलाज की राह में भी उम्‍मीद जगी है.

    वैज्ञानिकों के अनुसार कोरोना वायरस से ठीक हो चुके एक मरीज के शरीर में एंटीबॉडी विकसित होने की संभावना रहती है. लेकिन इससे असल में यह नहीं पता चल पाता है कि उनके शरीर में कितनी इम्‍युनिटी विकसित हुई है. कुछ एंटीबॉडी शरीर की रक्षा करती हैं जबकि कुछ एंटीबॉडी शरीर को नुकसान पहुंचाती हैं. ओहायो स्‍टेट यूनवर्सिटी के वैज्ञानिक डॉ. शान लू लियू के अनुसार मौजूदा समय में कई तरह की जांच मौजूद हैं, जो एंटीबॉडी की पहचान करने में मदद करती हैं. लेकिन यह हमें यह नहीं बताती कि क्‍या ये एंटीबॉडी को निष्क्रिय कर सकती हैं. हम इनके जरिये सिर्फ यह जान पाते हैं कि किसी व्‍यक्ति के शरीर में कितनी एंटीबॉडी मौजूद हैं.

    डॉ. लियू इस शोध के वरिष्‍ठ शोधकर्ता हैं. यह शोध जेसीआई इनसाइट जर्नल में प्रकाशित हुआ है. शोधकर्ताओं के अनुसार यह जांच इस बात का जानने में मदद करती है कि क्‍या एंटीबॉडी में बचाव क्षमता है. ऐसे में यह किसी मरीज को दोबारा संक्रमण होने से बचा सकती हैं. इस शोध में यह सबूत मिले हैं कि आईसीयू में भर्ती सभी मरीजों के शरीर में खराब एंटीबॉडी को खत्‍म करने की क्षमता विकसित हुई. वहीं प्‍लाज्‍मा डोनर और स्‍वास्‍थ्‍यकर्मियों में एंटीबॉडी का कम स्‍तर मिला.

    इससे यह बात पता चलती है कि जितनी गंभीर बीमारी से मरीज पीडि़त होगा, उसके शरीर में उतनी ही अधिक एंटीबॉडी बनेंगी. ऐसे में उसके शरीर में संक्रमण के बाद विभिन्‍न एंटीबॉडी बनने का दायरा काफी बड़ा होगा. शोधकर्ताओं के अनुसार यह जांच उन लोगों को एंटीबॉडी देने में काम आ सकती है, जिन्‍हें कोरोना वायरस संक्रमण हो चुका है.
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