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इस देश में सैन्य तख्तापलट करने की मांग कर रहे हैं लोग, जानें क्यों हुए मजबूर

इस देश में सैन्य तख्तापलट करने की मांग कर रहे हैं लोग, जानें क्यों हुए मजबूर

शनिवार को देश में राजनीतिक संकट गहराते ही कई हजार प्रदर्शनकारी खारतूम में राष्ट्रपति भवन के बाहर जमा हो गए. (AP)

शनिवार को देश में राजनीतिक संकट गहराते ही कई हजार प्रदर्शनकारी खारतूम में राष्ट्रपति भवन के बाहर जमा हो गए. (AP)

सैन्य समर्थक प्रदर्शनकारियों ने 'भूखी सरकार को गिराओ' का नारा दिया. इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने सशस्त्र बलों के प्रमुख जनरल अब्देल फत्ताह अल-बुरहान और सूडान (Sudan) की संयुक्त सैन्य-नागरिक संप्रभु परिषद से तख्तापलट (Military Coup)की अपील की.

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    खारतूम. उत्तरी अफ्रीकी देश सूडान (Sudan) में राजनीतिक और आर्थिक संकट गहराता जा रहा है. सरकार के फैसलों से आक्रोशित लोग सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं. प्रदर्शनकारियों (Protestors) ने सेना से मांग की है कि वो तख्तापलट (Military Coup)कर शासन का कंट्रोल अपने हाथ में लें.

    दरअसल, 2019 में राष्ट्रपति उमर अल-बशीर के तख्तापलट के बाद से सैन्य और नागरिक समूह सत्ता साझा कर रहे हैं. तब से हालात खराब हो गए हैं. शनिवार को देश में राजनीतिक संकट गहराते ही कई हजार प्रदर्शनकारी खारतूम में राष्ट्रपति भवन के बाहर जमा हो गए. प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी करते हुए सैन्य तख्तापलट की मांग की.

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    सैन्य समर्थक प्रदर्शनकारियों ने ‘भूखी सरकार को गिराओ’ का नारा दिया. इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने सशस्त्र बलों के प्रमुख जनरल अब्देल फत्ताह अल-बुरहान और सूडान की संयुक्त सैन्य-नागरिक संप्रभु परिषद से तख्तापलट की अपील की.

    एक प्रदर्शनकारी ने एएफपी को बताया, “हमें एक सैन्य सरकार की जरूरत है, वर्तमान सरकार न्याय और समानता लाने में विफल रही है.”

    सूडान में इससे पहले सितंबर में तख्तापलट की नाकाम कोशिश हुई थी. साजिशकर्ताओं के नाम का खुलासा अभी नहीं हुआ है. समाचार एजेंसी एएफपी से बात करते हुए एक शीर्ष सरकारी सूत्र ने बताया कि साजिशकर्ताओं ने सरकारी मीडिया की इमारत पर कब्जा करने की भी कोशिश की, जो ‘विफल’ हो गई.

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    देश में सबसे लंबे समय तक सत्ता में रहे राष्ट्रपति ओमर अल-बशीर (Omar al-Bashir) को दो साल पहले साल 2019 में सत्ता से हटा दिया गया था. इसके बाद सत्ता को बांटने के लिए एक अग्रीमेंट साइन किया गया. इसमें एक ऐसी सरकार बनाने पर सहमति बनी, जिसमें सेना, नागरिक प्रतिनिधि और विरोध प्रदर्शन करने वाले समूह शामिल हों. हालांकि देश की अर्थव्यवस्था बुरी तरह चरमराई हुई है. इस सरकार पर आर्थिक और राजनीतिक सुधार करने का दबाव है.

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