आर्मीनिया, आजरबैजान के बीच लड़ाई चौथे दिन भी जारी

दशकों पुराने संघर्ष में कई लोगों की मौत हो चुकी है और कई घायल हुए हैं (फोटो- AP)
दशकों पुराने संघर्ष में कई लोगों की मौत हो चुकी है और कई घायल हुए हैं (फोटो- AP)

आर्मीनियाई अधिकारियों (Armenian Officers) ने आरोप लगाया कि तुर्किश ड्रोनों (Turkish Drones) और एफ-16 लड़ाकू विमानों (F-16 Fighter Jets) का इस्तेमाल किया गया. नागोरनो-काराबाख (Nagorno-Karabakh) में रविवार को संघर्ष शुरू हुआ था और दुनियाभर से संघर्ष विराम (Ceasefire) की अपीलों के बाजवूद यह जारी है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 30, 2020, 10:51 PM IST
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येरेवान (आर्मीनिया). विवादित क्षेत्र (Disputed area) नागोरनो-काराबाख (Nagorno-Karabakh) को लेकर आर्मीनिया (Armenia) और आजरबैजान (Azerbaijan) के बलों के बीच भारी संघर्ष (Heavy struggle) बुधवार को चौथे दिन भी जारी रहा. दशकों पुराने संघर्ष में कई लोगों की मौत (death) हो चुकी है और कई घायल हुए है. आजरबैजान के रक्षा मंत्रालय (Defence Ministry) ने बताया कि बुधवार की सुबह आर्मीनियाई बलों (Armenian Forces) ने तरतार शहर में गोलाबारी शुरू की जिससे नागरिक बुनियादी ढांचे (Civil Infrastructure) को नुकसान पहुंचा और कई लोग घायल हो गये.

आर्मीनियाई अधिकारियों (Armenian Officers) ने आरोप लगाया कि तुर्किश ड्रोनों (Turkish Drones) और एफ-16 लड़ाकू विमानों (F-16 Fighter Jets) का इस्तेमाल किया गया. नागोरनो-काराबाख (Nagorno-Karabakh) में रविवार को संघर्ष शुरू हुआ था और दुनियाभर से संघर्ष विराम (Ceasefire) की अपीलों के बाजवूद यह जारी है.

आर्मीनिया की सीमा से करीब 50 किमी दूर है नागोरनो-काराबाख का इलाका
इस बीच तुर्की के विदेश मंत्री मेवलुत कैवुसोग्लू ने बुधवार को कहा कि यदि आजरबैजान सहायता का अनुरोध करता है तो वह उपलब्ध कराने को तैयार है. युद्ध की शुरुआत से ही माना जा रहा था कि आजरबैजान का साथ देने के लिए तुर्की जरूर आगे आयेगा. तुर्की इस इलाके का ताकतवर मुल्क है.
गौरतलब है कि अधिकतर पहाड़ी इलाके से घिरा नागोरनो-काराबाख 4,400 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है और आर्मीनिया की सीमा से करीब 50 किलोमीटर दूर है. यह इलाका अंतरराष्ट्रीय मान्यता के मुताबिक आजरबैजान का हिस्सा है. लेकिन यहां पर आर्मीनियाई मूल के लोग बड़ी मात्रा में रहते हैं.



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लंबे समय तक इस इलाके को लेकर दोनों देशों में चली थी बातचीत
लंबे समय से इस इलाके को लेकर दोनों देशों के बीच बातचीत भी हो चुकी है लेकिन यह बातचीत किसी निर्णय पर नहीं बहुत चुकी. आजरबैजान के साथ आर्मीनिया की लड़ाई छिड़ने से पहले आजरबैजान इस लंबे समय से चली आ रही बातचीत से ऊबा हुआ लग रहा था. कई मंचों से ऐसा संदेश सामने आया था. आर्मीनिया की सेना के समर्थन के चलते  स्थानीय लोगों ने आजरबैजान के कुछ इलाकों पर भी कब्जा कर रखा है.
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