दुनिया के सबसे खुशहाल देश को सता रही एक चिंता, कामगारों के लिए लगा रहा गुहार

वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट' में फिनलैंड को लगातार चौथी बार पहला स्थान प्राप्त हुआ है. (AP)

'वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट' में लगातार चौथी बार सबसे ऊपर रहा फिनलैंड इन दिनों कामगारों की कमी से जूझ रहा है. यहां काम करने के लिए लोग नहीं मिल रहे. ऐसे में फिनलैंड चाहता है कि दूसरे देशों के लोग (Migrants) यहां आकर बसे.

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    हेलसिंकी. दुनिया के सबसे खुशहाल देश फिनलैंड (Finland) अपने सबसे अच्छे जीवन स्तर, सुख-सुविधाओं और सिस्टम के लिए जाना जाता है. कहा जाता है कि इस देश में ऐसा कोई भी नहीं है जो खुश न हो, लेकिन सबसे खुशहाल वाला देश फिनलैंड एक बात को लेकर चिंतित है. वो है इस देश की बूढ़ी होती आबादी. इस वजह से यह देश कामगारों की कमी से जूझ रहा है. यहां काम करने के लिए लोग नहीं मिल रहे. ऐसे में फिनलैंड चाहता है कि दूसरे देशों के लोग (Migrants) यहां आकर बसे.

    टैलेंटेड सॉल्यूशंस के रिक्रूटर साकू तिहवेरेन ने न्यूज एजेंसी एएफपी को बताया, 'अब यह व्यापक रूप से स्वीकार किया गया है कि हमें देश में बड़ी संख्या में लोगों की जरूरत है. बूढ़ी होती आबादी को कवर करने और उन्हें रिप्लेस करने के लिए हमें युवाओं जरूरत है. हमें श्रमिकों की जरूरत है." फिनलैंड के उलट की पश्चिमी देश जनसंख्या वृद्धि से जूझ रहे हैं.

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    संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, प्रति 100 कामकाजी उम्र के लोगों में 39.2 फीसदी लोग 65 साल या उससे ऊपर के हैं. बूढ़ी आबादी में फिनलैंड जापान के बाद दूसरे स्थान पर है. संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, 2030 तक यहां वृद्धावस्था निर्भरता अनुपात बढ़कर 47.5 हो जाएगा.

    सरकार ने चेतावनी दी है कि 55.2 लाख की आबादी (2019 की जनगणना के मुताबिक) वाले राष्ट्र को सार्वजनिक सेवाओं को बनाए रखने और बढ़ती पेंशन घाटे को कम करने के लिए इमिग्रेशन को हर साल 20,000-30,000 तक करने की जरूरत है.

    बता दें कि 'वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट' में फिनलैंड को लगातार चौथी बार पहला स्थान प्राप्त हुआ है. वहीं संयुक्त राज्य अमेरिका जो पांच साल पहले 13वें स्थान पर था, 18वें पायदान से फिसलकर 19वें स्थान पर चला गया है. ब्रिटेन में कोरोना से सवा लाख लोगों की मौत के बावजूद लिस्ट में यह देश 17वें नंबर पर है.

    एकेडमी ऑफ फिनलैंड के रिसर्च फेलो चार्ल्स मैथीज कहते हैं, 'बिजनेस और सरकार की कई वर्षों की निष्क्रियता के बाद फिनलैंड आज मुश्किल दौर से गुजर रहा है. आबादी बुजुर्ग हो रही है. हमें लोगों की जरूरत है. 2013 में आठ स्पेनिश नर्सों में पांच को पश्चिमी शहर वासा में भर्ती किया गया था. कुछ महीनों के बाद उन्होंने मंहगाई, अत्यधिक ठंडे मौसम और जटिल भाषा का हवाला देते हुए नौकरी और देश छोड़ दिया.

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    सिस्टम में है दिक्कत
    प्रवासियों के फिनलैंड नहीं आने के पीछे कई राजनीतिक और सामाजिक दिक्कतें बताई जाती है. मसलन गैर-फिनिश आवेदकों के प्रति भेदभाव की शिकायत आती है. हेलसिंकी के मेयर जान वापावुरी ने एएफपी से कहा- 'स्टार्टअप्स ने बताया है कि वे दुनिया में किसी को भी आने और उनके लिए हेलसिंकी में काम तलाशने में मदद कर सकते हैं, लेकिन व्यक्ति को अकेले आना होगा. उनकी पत्नी या पति को नौकरी पाने में दिक्कत आती है. इस वजह से भी लोग फिनलैंड नहीं बसना चाह रहे हैं.

    बता दें कि फिनलैंड भी यूरोपीय संघ का सदस्य है. फिनलैंड का क्षेत्रफल 3,38,145 वर्ग किलोमीटर है. 1917 तक ये रूस के शासन में था. 1917 में रूस में क्रांति के बाद उसने स्वयं को आजाद घोषित कर दिया. वहां 1906 में महिलाओं और पुरुष दोनों को मतदान और चुनाव लड़ने का अधिकार दे दिया गया था. फिनलैंड लैंगिक समानता अपनाने वाला दुनिया का पहला देश बना.

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