Google Map ने बताया गलत रास्ता, 18 साल के लड़के की भीषण सर्दी में जमने से मौत

ठंड में जमने से युवक की मौत, गूगल मैप ने बताया था गलत रास्ता.

ROAD OF BONES: रूस में बदनाम 'रोड ऑफ़ बोन्स' पर दो युवक एक हफ्ते से ज्यादा तक फंसे रहे. यहां रात को तापमान -50 डिग्री तक हो जाता है जिससे एक की जमने से मौत हो गयी.

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    मॉस्को. कभी-कभी एक छोटी सी गलती आपके लिए जिंदगी और मौत का सवाल बन जाती है. रूस के साइबेरिया में भी एक ऐसा ही मामला सामने आया है जिसमें Google Map की एक छोटी सी गलती के चलते 18 साल का लड़का रास्ता भटक गया. लड़का जिस गलत रास्ते पर गया वहां रात में तापमान -50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया और उसकी सर्दी में जमने से मौत हो गयी. ये दोनों इस सड़क पर कई दिनों तक फंसे रहे थे.

    द सन की रिपोर्ट के मुताबिक सर्गे उस्तीनोव और वाल्दीस्लाव इस्तोमिन साइबेरिया के port of Magadan जा रहे थे लेकिन गूगल मैप्स की मदद लेने के चलते वे गलत दिशा में चले गए. वे गलती से Road of Bones पहुंच गए थे जो कि रात के वक़्त काफी खतरनाक मानी जाती है क्योंकि यहां अचानक तापमान गिर जाता है. गूगल मैप ने शार्टकट के चक्कर में दोनों को ऐसे रास्ते पर भेज दिया जो न सिर्फ बंद था बल्कि काफी जटिल भी था. ये दोनों दुनिया के सबसे ठंडे शहर Yakutsk से port of Magadan की यात्रा पर निकले थे.

    कार बंद पड़ गयी, एक हफ्ते तक फंसे रहे
    ये सड़क पूरी तरह से बर्फ से ढकी हुई थी और सर्दी बढ़ने के बाद कार के रेडियेटर ने भी काम करना बंद कर दिया. इन दोनों लड़कों को नहीं पता था कि भीषण सर्दी से कैसे निपटना है और इसलिए उनमें से एक की जमने से मौत हो गयी जबकि दूसरे के हाथ-पांव बुरी तरह जमे हुए हैं और उन्हें काटना पड़ सकता है. खबर के मुताबिक सर्गे का पूरा शरीर पत्थर की तरह जमा हुआ मिला है जबकि वाल्दीस्लाव अभी भी जिंदा है लेकिन बुरी हालत में है. सर्गे की मौत हाइपरथेमिया की वजह से हुई है.

    जिस सड़क पर सर्गे की मौत हुई है वह 'मौत की सड़क' के नाम से भी जानी जाती है. कहा जाता है कि इसे बनाने के लिए स्टालिन ने राजनीतिक कैदियों का सहारा लिया था. इसे बनाने के दौरान भी 10 लाख लोगों की जान गयी थी. Yakutsk से port of Magadan की दूरी कोलिमा फेडरल हाइवे के जरिए 1900 km है जबकि रोड ऑफ़ बोन्स से होते हुए ये 1733 km है. इसी के चलते गूगल मैप्स ने दोनों लड़कों को इस रास्ते पर जाने का सजेशन दिया था. बताया जाता है कि साल 1970 के बाद से ही इस सड़क का इस्तेमाल नहीं किया जाता है. इसी के चलते दोनों की मदद के लिए पुलिस पेट्रोल को भी यहां पहुंचने में कई दिन लग गए.

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