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यूक्रेन को 'अपनों' ने ही दिया दर्द, अब गद्दारों को चुन-चुन कर मारा जा रहा; भयावह थी रूस की वह बर्बरता

रूस से जंग में यूक्रेन को अपने लोगों ने ही सबसे ज्यादा चोटें पहुंचाईं. (फाइल फोटो)

रूस से जंग में यूक्रेन को अपने लोगों ने ही सबसे ज्यादा चोटें पहुंचाईं. (फाइल फोटो)

रूस के साथ जंग में यूक्रेन को अपने लोगों ने ही सबसे अधिक दर्द दिया है. रूस के कब्जे में बिताए छह महीनों के दौरान सैकड़ो ...अधिक पढ़ें

कीव: महीनों से चली आ रही रूस के साथ जंग में यूक्रेन को धोखा देने वाले अपने लोगों की लंबी फेहरिस्त है. यही वजह है कि अब यूक्रेन और वहां की सेना रूस का साथ देने वाले गद्दारों को ढूंढ-ढूंढकर निशाना बना रही है. रूसी अत्याचार से किसी तरह बचे यूक्रेन के लोगों ने रूस की क्रूरता की कहानी सुनाई है और उन्होंने बताया है कि कैसे अपने ही लोगों ने रूस का साथ देकर उनकी जिंदगी को नरक में धकेल दिया था. दरअसल, जब जंग के दौरान रूसियों ने पूर्वी यूक्रेन के बलाकलिया शहर पर कब्जा किया था तो रूसी सेना ने यूक्रेन के केंद्रीय पुलिस स्टेशन को क्रूरता के अड्डे में बदल दिया था. हालांकि, अब इस शहर पर यूक्रेन का दोबारा कब्जा हो चुका है.

अंग्रेजी वेबसाइट डेली मेल के मुताबिक, रूस के कब्जे में बिताए छह महीनों के दौरान सैकड़ों स्थानीय निवासियों को तहखाने में भीड़भाड़ वाले कक्षों में भेड़-बकरियों की तरह बंद कर दिया गया था. रूसी अत्याचार से बचे लोगों ने बताया कि उन्हें एक यातना कक्ष में रखा गया था, जहां उन्हें पीटा गया, बिजली का झटका दिया गया था और न जाने क्या-क्या यातनाएं दी गईं. पिछले महीने यूक्रेन के आश्चर्यजनक जवाबी हमले के दौरान शहर पर कब्जा करने के बाद भी रूस की संघीय सुरक्षा सेवा के अधिकारियों द्वारा इंटेरोगेशन किया गया था.

बताया गया कि शहर पर वापस यूक्रेन के कब्जे के बाद भी रूस को स्थानीय लोगों द्वारा मदद की गई. देश से गद्दारी करने वालों की लिस्ट में से एक नाम है ओलेग कलैदा का, जो एक मुर्गी फार्म में सुरक्षा प्रमुख का काम करता था. मगर रूसी कब्जे के बाद वह यहां का पुलिस प्रमुख बन बैठा था. रूस ने अपने कब्जे के दौरान किस कदर यूक्रेन में अत्याचार किया, अब उसकी डरावनी कहानियां भी सामने आ रही हैं. बालकलिया शहर में सामुहिक कब्रें मिली हैं. यूक्रेनी अधिकारियों ने कहा कि इस शहर ने रूसी क्रूरता को झेला है, फिर भी कुछ यूक्रेनी नागरिक आज भी रूस की मदद कर रहे हैं.

हालांकि, अब यूक्रेन ने देश के गद्दारों को सजा देना शुरू कर दिया है. कीव ने पहले ही 1309 संदिग्ध देशद्रोहियों की जांच शुरू कर दी है और अपने ही देश और पड़ोसियों के साथ विश्वासघात करने के आरोप में गद्दारों पर 450 मुकदमे चलाए हैं. इनता ही नहीं, अन्य गद्दारों का भी पता लगाया जा रहा है और यूक्रेनी रेसिस्टेंस फाइटर्स द्वारा उनका खात्मा किया जा रहा है. बताया जा रहा है कि अब तक 29 गद्दारों की हत्या कर दी गई है और 13 से अधिक गद्दार हमले में घायल हुए हैं.

आंतरिक मंत्रालय के एक सलाहकार एंटोन गेराशचेंको ने कहा, ‘देश के गद्दारों को चुन-चुन कर मारने की घोषणा कर दी गई है और हमारे इंटेलिजेंस सर्विस के सिपाही उनका खात्मा कर रहे हैं और उन्हें सूअरों की तरह गोली मार रहे हैं.’ यूक्रेन सरकार के एक मंत्री ने कहा कि यूक्रेन पर रूसी कब्जे को इन गद्दारों ने पद, पैसा और पावर के अवसर के रूप में देखा था.

बताया गया कि रूस ने जब शहर पर कब्जा किया तो उसने यूक्रेन के गद्दारों और अपने वफादारों को प्रमुख पद पर बैठाया. हालांकि, जब यूक्रेन ने वापस अपना कंट्रोल पा लिया तो ऐसे लोगों ने पद को छोड़ दिया और रूस भागने की कोशिश की, मगर रूसियों ने उन्हें अपनी सीमा में दाखिल नहीं होने दिया. ओलेग कलैदा भी उन्हीं में से था, जो रूसी कब्जे के दौरान बालाकलिया का पुलिस प्रमुख बना बैठा था. यूक्रेनी सेना के हत्थे चढ़ने से पहले वह भी रूस भागने की फिराक में था.

हालांकि, रूस की मदद करने के आरोपी स्थानीय अधिकारियों ने यूक्रेन के पत्रकारों से कहा कि उन्होंने अपनी मर्जी से सहयोग किया था और रूसियों ने उन्हें जनरल रैंक से पुरस्कृत किया. अब उन्हें देशद्रोह के आरोप में 15 साल तक की जेल का सामना करना पड़ रहा है. बताया गया कि कलैदा की पत्नी ने भी रूस का साथ दिया था.

जब रूसी कब्जे के दौरान कलैदा पुलिस प्रमुख बना था, तब उसने बर्बर्ता की हद पार कर दी थी. यूक्रेन के अन्य लोगों ने बताया कि पुलिस प्रमुख के रूप में कलैदा के शासनकाल के दौरान बहुत अत्याचार किया गया. उसके शासनकाल में एक व्यक्ति का कान काट दिया गया तो एक की पिटाई से मौत हो गई थी. गद्दारों की लिस्ट में इवान सुशको का नाम भी शामिल है जो पहले शादियों में टोस्टमास्टर का काम करता था, मगर रूसी कब्जे के बाद जपोरिझझिया क्षेत्र का मेयर बन गया था. हालांकि, अगस्त में कार विस्फोट में वह मारा गया. इतना हीनहीं, एक गद्दार पूर्व एक्ट्रेस भी थी, जिसका नाम है नटालिया रोमनिचेंको. उसने तो अपने बेटो के रूसी सेना का वर्दी तक पहनाना शुरू कर दिया था.

खार्किव क्षेत्र में प्रमुख पुलिस अन्वेषक सर्गेई बोलविनोव ने कहा कि उस दौरान अलग-अलग अत्याचार थे, जिसका वर्णन नहीं किया जा सकता. मगर इतना कहा जा सकता है कि सबसे हल्का अत्याचार था बिजली का झटका देना. रूसी कब्जे के दौरान बलाकलिया के थाने में रखे गए एक व्यक्ति ने बताया कि कैसे गार्ड ने शोर करने वाले वेंटिलेशन सिस्टम को बंद कर दिया था ताकि हर कोई बिजली के झटके से लोगों के दर्द की चीखें सुन सके. यही वजह है कि यूक्रेन से गद्दारी करने वाले लोगों के खिलाफ स्थानीय लोगों में काफी क्रोध है.

इसी तरह रूस का एक सहयोगी 45 वर्षीय दिमित्री चिग्रीनोव है, जो पूर्वी यूक्रेन में अपहरण और बंधकों की पिटाई के आरोपों का सामना कर रहा है. हालांकि, अभी वह जमानत पर रिहा है. उस पर आरोप है कि जब रूसी सेना ने इलाके पर कब्जा किया तो उसने रूसी झंडे फहराए और दुश्मन देशों की सेना को भोजन उपलब्ध कराए और यूक्रेनी अधिकारियों के नामों की लिस्ट उपलब्ध कराई और हिरासत में लिए गए मेहर को पद से हटाने के प्रयास का आरोप है ताकि वह उसकी जगह ले सके.

Tags: Russia ukraine war, Ukraine

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