लाइव टीवी

रूसी विदेश मंत्री ने UNSC में भारत की स्थायी सदस्यता का किया पुरजोर समर्थन

भाषा
Updated: January 16, 2020, 6:11 AM IST
रूसी विदेश मंत्री ने UNSC में भारत की स्थायी सदस्यता का किया पुरजोर समर्थन
रूसी विदेश मंत्री ने अमेरिका की आलोचना भी की (रूसी विदेश मंत्री की भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ फाइल फोटो, AP/PTI)

रूसी विदेश मंत्री (Russian Foreign Minister) सर्गेई लावरोव ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् (UNSC) में भारत और ब्राजील (Brazil) की स्थायी सदस्यता की दावेदारी का पुरजोर समर्थन किया.

  • Share this:
नई दिल्ली. रूसी विदेश मंत्री (Russian Foreign Minister) सर्गेई लावरोव ने बुधवार को अमेरिका नीत हिंद-प्रशांत पहल (US-led Indo-Pacific initiative) की सख्त आलोचना करते हुए इसे मौजूदा क्षेत्रीय ढांचों में व्यवधान डालने वाला और इस क्षेत्र में चीन (China) के प्रभाव को रोकने वाला करार दिया.

साथ ही, उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् (UNSC) में भारत और ब्राजील (Brazil) की स्थायी सदस्यता की दावेदारी का भी पुरजोर समर्थन किया. उन्होंने जोर देते हुए कहा कि नई दिल्ली वैश्विक प्रभाव रखने वाले नये केंद्रों में शामिल है.

'अमेरिका अंतरराष्ट्रीय नियमों का कर रहा है असम्मान'
रूसी विदेश मंत्री ने अमेरिका (America) की आलोचना भी की. इसके पीछे उन्होंने यह तर्क दिया कि वह अपने स्व हित में नियम आधारित वैश्विक व्यवस्था के बारे में चुनिंदा तरीके से बात करते हुए वह अंतरराष्ट्रीय नियमों का असम्मान कर रहा.

लावरोव ने अमेरिका समर्थित हिंद-प्रशांत रणनीति का उल्लेख करते हुए कहा कि यह मौजूदा ढांचे को नया आकार देने और क्षेत्र में आसियान (ASEAN) केंद्रित आमराय से दूर जाने की कोशिश है.

'अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, जापान ने शुरू की हिंद-प्रशांत रणनीति'
लावरोव ने कहा, ‘‘हिंद-प्रशांत रणनीति के नाम से एक नयी अवधारणा बनाई गई, जिसे अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, जापान ने पहले पहल शुरू किया...जब हम इसकी पहल करने वालों से यह पूछते हैं कि हिंद-प्रशांत रणनीतियों और आसियान केंद्रित क्षेत्रीय सहयोग के बीच क्या अंतर है, वे कहते हैं कि हिंद-प्रशांत कहीं अधिक खुला, अधिक लोकतांत्रिक है.’’उन्होंने कहा, ‘‘यदि आप करीब से देखेंगे तो यह कहीं से ऐसा मामला नहीं है.’’

जयशंकर ने किया साफ- भारत का रुख बाधा डालने वाला नहीं
जयशंकर ने अपने संबोधन में कहा कि भारत का रुख बाधा डालने वाला नहीं है. हालांकि, उन्होंने इसे विस्तार से नहीं बताया. लेकिन उनकी टिप्पणी को हिंद-प्रशांत बहस के परिप्रेक्ष्य में देखा जा रहा है.

लावरोव ने कहा, ‘‘ हमें एशिया प्रशांत को हिंद प्रशांत कहने की क्या जरूरत है? जवाब स्पष्ट है, ताकि चीन को बाहर किया जा सके. शब्दावली जोड़ने वाली होनी चाहिए, विभाजनकारी नहीं. ना तो एससीओ और ना ही ब्रिक्स किसी को अलग-थलग करता है.’’

उन्होंने कहा, ‘‘ जब हम हिंद-प्रशांत के पहलकर्ताओं से पूछते हैं कि यह एशिया प्रशांत से अलग क्यों है, तो हमें कहा जाता है कि यह अधिक लोकतांत्रिक है. हम ऐसा नहीं सोचते.’’

रूसी मंत्री ने कहा- हम आसियान और भारत के रुख का करते हैं समर्थन
हिंद-प्रशांत पिछले कुछ वर्षों में भारत की विदेश नीति का प्रमुख केन्द्र रहा है और देश इस क्षेत्र में शांति और स्थिरता को बढ़ावा दे रहा है. रूसी विदेश मंत्री ने कहा कि हम आसियान और भारत के रूख का समर्थन करते हैं.

उन्होंने कहा, ‘‘इसे हिंद-प्रशांत क्यों कहा जाता है--जवाब है चीन को रोकना. भारतीय मित्र इस जाल को समझने के लिए पर्याप्त रूप से स्मार्ट हैं. हमें विभाजनकारी नहीं होना चाहिए.’’ उन्होंने कहा, ‘‘हमें शब्दावली को लेकर सावधान होना चाहिए जो कि अच्छी लगती तो है पर है नहीं. ’’

लावरोव ने पश्चिमी (शक्तिशाली) देशों को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि ये देश अक्सर ही नियम अधारित व्यवस्था की बात करते हैं ‘‘लेकिन इसका पालन नहीं करते.’’ भारत के बारे में उन्होंने कहा कि यह आर्थिक और वित्तीय शक्ति का केंद्र है.

रायसीना डायलॉग में हिस्सा ले रहे हैं 12 देशों के विदेश मंत्री
रायसीना डायलॉग के पांचवें संस्करण का आयोजन विदेश मंत्रालय और ‘ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन’ सम्मिलित रूप से कर रहा है. इसमें सौ से अधिक देशों के 700 अंतरराष्ट्रीय भागीदार हिस्सा लेंगे और इस तरह का यह सबसे बड़ा सम्मेलन है.

मंगलवार से शुरू हुए इस तीन दिवसीय सम्मेलन में 12 विदेश मंत्री हिस्सा ले रहे हैं. इनमें रूस, ईरान, ऑस्ट्रेलिया, मालदीव, दक्षिण अफ्रीका, एस्तोनिया, चेक गणराज्य, डेनमार्क, हंगरी, लातविया, उज्बेकिस्तान और ईयू के विदेश मंत्री शामिल हैं.

यह भी पढ़ें: भारत ने RCEP को लेकर अपने दरवाजे बंद नहीं किए हैं: जयशंकर

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए देश से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: January 16, 2020, 6:11 AM IST
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर