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EXPLAINED: यूक्रेन पर रूस का हमला महीनों की तैयारियों का नतीजा, जानें चेतावनियों के बावजूद कैसे आगे बढ़ते रहे पुतिन

रूसी सैनिकों के घुसने की आशंका के बीच राजधानी कीव की सड़कों पर मोर्चा संभाले यूक्रेनियन सैनिक.

रूसी सैनिकों के घुसने की आशंका के बीच राजधानी कीव की सड़कों पर मोर्चा संभाले यूक्रेनियन सैनिक.

Ukraine & Russia Conflict: तमाम चेतावनी और इनकार के बावजूद रूस ने यूक्रेन पर हमला कर दिया. रूस ने एक बड़ी सैन्य कार्रवा ...अधिक पढ़ें

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वॉशिंगटन: यूक्रेन पर रूस के हमले (Ukraine & Russia Conflict) से हर कोई हैरान है. क्योंकि चेतावनी के बावजूद व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) लगातार यह कहते आए थे कि वह यूक्रेन पर हमला नहीं करेंगे लेकिन आखिरकार रूस ने एक बड़ी सैन्य कार्रवाई को अंजाम दिया. लेकिन इसकी तैयारी रूस पिछले कई महीनों से कर रहा था. इस हमले से पहले संघर्ष के शुरुआती दिनों में रूस समेत सभी पक्षों ने एक दूसरे को हैरान किया. रूस ने अनुमान की तुलना में बड़ा और व्यापक हमला किया और यूक्रेन ने पड़ोसी महाशक्ति के खिलाफ जितना संभव हो सके उससे कहीं अधिक कठिन लड़ाई लड़ी है.

पेंटागन के प्रेस सचिव जॉन किर्बी ने शुक्रवार को कहा कि, यह स्पष्ट तौर पर नहीं कहा जा सकता है कि 24 घंटे के अंदर रूस ने अपनी योजनाओं को क्रियान्वित करने में सक्षम रहा जैसा कि वह चाहता था.

शुरुआती संकेत
पिछले साल 31 मार्च को अमेरिकी सेना ने यूक्रेनी सीमा के पास रूस के सैन्य अभ्यास से उत्पन्न होने वाले “संभावित संकट” की चेतावनी दी थी. हालांकि इसके बाद रूस के सैनिक वापस अपने स्थाई बेस की ओर लौट गए और लगा कि खतरा टल गया.

इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन जिनेवा में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मिले और इस बात पर सहमति बनी व इस समित को इस नजरिये से देखा गया कि रूस ने सैन्य अभ्यास को स्थगित कर दिया. लेकिन गर्मियों के अंत तक यह स्पष्ट होने लगा था कि पुतिन की सैन्य योजनाएँ अभी शुरू हो रही थीं.
भले ही उन्होंने अभी तक आकार नहीं लिया था.

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रूस के इन इरादों को लेकर बाइडेन प्रशासन की चेतावनियां और अधिक स्पष्ट हो गईं और पहली बार, अमेरिकी खुफिया अधिकारियों ने ज़ेलेंस्की, यूरोपीय अधिकारियों और आखिरकार जनता को इस बात की जानकारी देना शुरू कर दिया. व्हाइट हाउस ने महसूस किया कि यह एक शुरुआत है जो कि संभवत: अक्टूबर तक एक बड़े संकट में बदल जाएगी. इंटेलीजेंस रिपोर्ट से इस बात का पता चला कि पुतिन यूक्रेन की ओर बढ़ना चाह रहे थे.

जो बाइडेन चाहते थे कि पुतिन को यह पता चले कि वह इस बारे में क्या जानते हैं इसलिए उन्होंने क्रिमिया के अधिकारियों को चेतावनी देने के लिए सीआईए निदेशक बिल बर्न्स को मास्को भेजा और कहा कि अमेरिका रूस के सैन्य आंदोलनों से पूरी तरह वाकिफ था.

पुतिन की मांगे, अमेरिका का इनकार
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि सैन्य निर्माण ने पश्चिम में एक निश्चित तनाव पैदा किया है और देश की दीर्घकालिक सुरक्षा गारंटी सुरक्षित करने के लिए इसे लंबे समय तक उस स्थिति में रखना जरूरी.

15 दिसंबर को पुतिन ने अपनी मांगें रखीं कि, यूक्रेन और अन्य पूर्व-सोवियत देशों के लिए NATO सदस्यता पर प्रतिबंध लगे, उन देशों में NATO के हथियारों की तैनाती पर रोक और पूर्वी यूरोप से NATO की वापसी हो. इस बीच रूसी सैनिक बेलारूस में यूक्रेन के उत्तर में और उसके पूर्वी सीमाओं पर पहुँचते रहे.

हालांकि अमेरिका और NATO ने रूस की मांगों को खारिज कर दिया और इसके बाद सैनिकों व हथियारों की आवाजाही तेज हो गई. यूक्रेन की सरकारी वेबसाइट्स सामूहिक रूप से डाउन हो गईं, कई ने संदिग्ध रूसी हैकर्स से चेतावनी देते हुए लिखा कि डरें और इससे खराब हालात की उम्मीद करें.

इसके बाद अमेरिका समेत पश्चिमी देशों की चेतावनी के बावजूद रूस ने यूक्रेन पर इस हमले को अंजाम दिया. हालांकि रूस बार-बार इस बात से इनकार करता रहा कि वह यूक्रेन पर हमला नहीं करेगा लेकिन पुतिन की जुबान पर कुछ और दिमाग में कुछ और चल रहा था.

Tags: NATO, Russia, Ukraine

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