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रूस की प्राइवेट आर्मी जो भाड़े पर मचाती है कोहराम, इतने पैसों में कोई भी कर सकता है हायर!

यूक्रेन की सुरक्षा सेवा द्वारा प्रकाशित एक तस्वीर में अज्ञात स्थान पर वैगनर समूह के भाड़े के सैनिकों को दिखाने का दावा किया गया है. (Image: ssu.gov.ua)

यूक्रेन की सुरक्षा सेवा द्वारा प्रकाशित एक तस्वीर में अज्ञात स्थान पर वैगनर समूह के भाड़े के सैनिकों को दिखाने का दावा किया गया है. (Image: ssu.gov.ua)

Wagner Group Mercenaries: वैगनर ग्रुप एक रूसी अर्धसैनिक संगठन है जिसे भाड़े के सैनिकों का एक नेटवर्क, या अक्सर रूसी राष ...अधिक पढ़ें

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हाइलाइट्स

वैगनर समूह के लड़ाके देश के अतिरिक्त लीबिया, सीरिया, मध्य अफ्रीकी गणराज्य और माली, सहित अन्य देशों में लड़ चुके
1 मई 2014 को, रूसी देशभक्तों के एक समूह का जन्म हुआ, जिसे बाद में वैगनर बटालियन कहा जाने लगा
एक रिपोर्ट के मुताबिक वैगनर समूह के 400 से अधिक भाड़े के सैनिकों को ज़ेलेंस्की की हत्या के लिए कीव भी भेजा गया था

मॉस्को. रूसी व्यवसायी और पुतिन के करीबी माने जाने वाले येवगेनी प्रिगोझिन (Russian businessman Yevgeny Prigozhin) द्वारा निजी सैन्य कंपनी की स्थापना किये जाने की बात ने सबको चौंका दिया है. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार प्रिगोझिन ने कहा कि उन्होंने 2014 में वैगनर ग्रुप (Wagner Group private military company) की स्थापना की थी जिसके भाड़े के सैनिकों (mercenaries) ने पैसे लेकर कई युद्ध में भाग लिया है. रिपोर्ट के मुताबिक वैगनर समूह के लड़ाके देश के अतिरिक्त लीबिया, सीरिया, मध्य अफ्रीकी गणराज्य और माली सहित अन्य देशों में लड़ चुके हैं.

यह खुलासा प्रिगोझिन की कॉनकॉर्ड कैटरिंग फर्म की प्रेस सेवा ने एक रूसी समाचार साइट के प्रश्न पर किया है जहां सोशल नेटवर्क VKontakte पर उनसे उनके वैगनर समूह के साथ संबंध पर चर्चा की जा रही थी. प्रिगोझिन ने आगे कहा कि उन्होंने खुद पुराने हथियारों को साफ किया, खुद बुलेटप्रूफ जैकेट को ठीक किया और ऐसे एक्सपर्ट्स से मिले जो उनकी सहायता कर सकते थे. उन्होंने बताया कि उसके बाद 1 मई 2014 को, देशभक्तों के एक समूह का जन्म हुआ, जिसे बाद में वैगनर बटालियन कहा जाने लगा. वहीं प्रिगोझिन की कॉनकॉर्ड कैटरिंग फर्म ने रॉयटर्स को बयान के सत्य होने की पुष्टि भी की है.

प्रिगोझिन है पुतिन के करीबी
अपनी कंपनी के सरकार के साथ खानपान के अनुबंधों के कारण प्रिगोझिन को पुतिन का शेफ भी कहा जाता है. प्रिगोझिन की पुतिन के साथ नजदीकी और वैगनर में उनकी भूमिका के लिए संयुक्त राज्य और यूरोपीय संघ ने उन पर कई प्रतिबंध लगाए हुए हैं. साथ ही अमेरिका प्रिगोझिन पर आरोप भी लगा चुका है कि एक ट्रोल आर्मी की मदद से उन्होंने अमेरिकी चुनावों को प्रभावित करने की कोशिश की थी. वैगनर पर यूक्रेन के पूर्वी डोनबास क्षेत्र में रूस समर्थक अलगाववादियों को सहायता प्रदान करने के आरोप भी लगते आए हैं.

क्या होते हैं मसनरी
मसनरी ऐसे लोगों की फौज होती है जो पैसों के लिए युद्ध में भाग लेती है. ऐसे सैनिक किसी भी सेना या देश के लिए लड़ाई करते हैं और फीस के तौर पर मोटी रकम वसूलते हैं. जिनेवा कन्वेंशन के मुताबिक भाड़े के सैनिक या मसनरी को आम सैनिकों की तरह वैध लड़ाकों के रूप में मान्यता प्राप्त नहीं है और उन्हें सशस्त्र बलों के कब्जे वाले सेवा कर्मियों के समान कानूनी सुरक्षा प्रदान करने की आवश्यकता भी नहीं है. दुनिया के कई देशों ने भाड़े के सैनिकों के लिए बेहद कठोर कानून बनाए हुए हैं जो उनके नागरिकों को मसनरी बनने से रोकते हैं.

क्या है वैगनर ग्रुप
वैगनर ग्रुप एक रूसी अर्धसैनिक संगठन है जिसे भाड़े के सैनिकों का एक नेटवर्क, या अक्सर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की एक वास्तविक निजी सेना के रूप में भी देखा जाता है. वैगनर ग्रुप को अमेरिकी सैन्य अधिकारी एक खूंखार सैन्य संगठन बताते हैं जो यूक्रेन में रूसी सेनाओं का साथ दे रहा है. टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक रूस के वैगनर समूह के 400 से अधिक भाड़े के सैनिकों को यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की की हत्या के लिए कीव भी भेजा गया था. साथ ही अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने युद्ध में वैगनर के शामिल होने के कुछ संकेत भी देखे हैं. हालांकि इन दावों की आज तक पुष्टि नहीं हो सकी है लेकिन समय समय पर अमेरिका वैगनर समूह के यूक्रेन में एक्टिव होने की बात कहता रहता है.

कितना लेते हैं वेतन
मसनरी को भाड़े पर लेने वाले देशों या संगठनों को भारी कीमत भी चुकानी पड़ती है. टाइम्स की ही एक रिपोर्ट के अनुसार यूक्रेन युद्ध में लड़ने के लिए ऐसे एक लड़ाके को प्रति दिन 2000 अमेरिकी डॉलर का ऑफर दिया गया था. भारतीय मुद्रा में बात करें तो ऐसे लड़ाकों को एक दिन के एक लाख 63 हजार रुपये दिए जा रहे थे. वहीं कई मीडिया रिपोर्ट के अनुसार एक मसनरी कमांडर को एक महीने से कम की सर्विस के लिए 5 लाख डॉलर तक दिए जाते हैं जो कि भारतीय मुद्रा में चार करोड़ से अधिक बनते हैं. हालांकि वैगनर ग्रुप द्वारा अपने मसनरी को कितना धन दिया जाता है यह अभी भी एक जांच का विषय बना हुआ है.

Tags: Russia, Russia ukraine war, Vladimir Putin

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