श्रीलंका में गहराया राजनीतिक संकट, बर्खास्त PM विक्रमसिंघे का सरकारी आवास खाली करने से इनकार

श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रिपाला सिरिसेना ने शनिवार को अपदस्थ प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे की सुरक्षा वापस ले ली

News18India
Updated: October 28, 2018, 2:39 PM IST
श्रीलंका में गहराया राजनीतिक संकट, बर्खास्त PM विक्रमसिंघे का सरकारी आवास खाली करने से इनकार
विक्रमसिंघे के घर के बाहर हजारों समर्थक
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Updated: October 28, 2018, 2:39 PM IST
श्रीलंका में राजनीतिक संकट लगातार गहराता जा रहा है. बर्खास्त प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे को सरकारी आवास खाली करने को कहा गया है. लेकिन विक्रमसिंघे ने इसका भारी विरोध करते हुए सरकारी आवास खाली करने से मना कर दिया है.  इस बीच विक्रमसिंघे के घर के बाहर हजारों समर्थक नारेबाज़ी कर रहे हैं.

रानिल विक्रमसिंघे को सरकारी आवास खाली करने के लिए पहले ही नोटिस भेजा गया था लेकिन उन्होंने डेडलाइन को नजरअंदाज कर दिया. विक्रमसिंघे अपनी बर्खास्तगी को पहले ही असंवैधानिक कह चुके हैं. इस बीच श्रीलंका के कुछ बड़े अधिकारियों का कहना है कि सरकारी आवास को खाली कराने के लिए वो कोर्ट से ऑर्डर ले कर आएंगे.



इससे पहले श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रिपाला सिरिसेना ने शनिवार को अपदस्थ प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे की सुरक्षा वापस ले ली. विक्रमसिंघे का अब भी दावा है कि संवैधानिक तौर पर वही देश के प्रधानमंत्री हैं.

इससे पहले सिरिसेना ने संसद को 16 नवंबर तक निलंबित कर दिया क्योंकि विक्रमसिंघे ने बहुमत साबित करने के लिए आपात सत्र बुलाने की मांग की थी. सरकारी सूत्रों के मुताबिक सिरीसेना सोमवार को नये कैबिनेट का ऐलान कर सकते हैं.

दूसरी ओर अपदस्थ प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे ने दावा किया है कि 225 सदस्यीय सदन में उनके पास अब भी बहुमत है.

हालात को लेकर विदेश में चिंता
श्रीलंका में आए राजनीति तूफान पर अमेरिका ने कड़ी आपत्ति जताई है. अमेरिका ने श्रीलंका को संविधान के मुताबिक काम करने की सलाह दी है. अमेरिका ने श्रीलंका की सभी राजनीतिक पार्टियों से संविधान का पालन करने और हिंसा से दूर रहने की अपील की है.जबकि भारत की तरफ से इस मसले पर अभी तक कोई अधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है लेकिन माना जा रहा है कि विदेश मंत्रालय स्थिति पर नजर बनाए हुए है.
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संवैधानिक संकट
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि राजपक्षे को प्रधानमंत्री बनाने के सिरिसेना के कदम से संवैधानिक संकट पैदा हो सकता है क्योंकि संविधान में 19वां संशोधन बहुमत के बिना विक्रमसिंघे को प्रधानमंत्री पद से हटाने की अनुमति नहीं देगा.

इससे पहले 72 साल के राजपक्षे ने शपथ लेने के बाद सिरिसेना के साथ अपनी एक तस्वीर साझा की. सिरिसेना के राजनीतिक मोर्चे यूनाइटेड पीपुल्स फ्रीडम अलायंस (यूपीएफए) ने घोषणा की कि उसने मौजूदा गठबंधन सरकार से समर्थन लेने का फैसला किया है. ये गठबंधन यूनाइटेड नेशनल पार्टी (यूएनपी) के साथ था जिसके नेता रानिल विक्रमसिंघे अब तक प्रधानमंत्री थे.

घटनाक्रम पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए वित्त मंत्री मंगला समरवीरा ने कहा कि प्रधानमंत्री के रूप में राजपक्षे की नियुक्ति असंवैधानिक और गैरकानूनी है.

2015 में विक्रमसिंघे के समर्थन से सिरिसेना राष्ट्रपति बने थे. इससे पहले करीब एक दशक तक राजपक्षे की सरकार थी. उनकी सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रहे सिरिसेना ने उनसे अलग होकर राष्ट्रपति चुनाव लड़ा था.

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