मसूद अज़हर ने बनाई जैश के आतंकियों की 'नेवी ब्रिगेड', 26/11 दोहराने की 'साजिश'

पिछले 19 साल से मसूद अज़हर पाकिस्तान में बैठ कर अपने आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद की कमान संभाल रहा है. मसूद अज़हर के निशाने पर हिंदुस्तान और ख़ासकर कश्मीर घाटी है. जैश-ए-मोहम्मद पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी ISI की शह पर एक बार फिर आतंक के नक्शे पर आ चुका है और एक बार फिर उसने अपने गुर्गों के ज़रिए कश्मीर को दहलाने की साज़िशें तेज़ कर दी हैं.


Updated: July 7, 2018, 11:48 PM IST

Updated: July 7, 2018, 11:48 PM IST
पिछले 19 साल से मसूद अज़हर पाकिस्तान में बैठ कर अपने आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद की कमान संभाल रहा है. मसूद अज़हर के निशाने पर हिंदुस्तान और ख़ासकर कश्मीर घाटी है. दरअसल कंधार हाई-जैकिंग में रिहा होने के फ़ौरन बाद मसूद अज़हर पाकिस्तान गया और पाकिस्तान पहुंचते ही उसने हरक़त उल अंसार से अलग होकर अपने खुद के आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद की बुनियाद रख दी थी.

जैश-ए-मोहम्मद पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी ISI की शह पर एक बार फिर आतंक के नक्शे पर आ चुका है और एक बार फिर उसने अपने गुर्गों के ज़रिए कश्मीर को दहलाने की साज़िशें तेज़ कर दी हैं.

मसूद अज़हर का जन्म 10 जुलाई 1968 को पाकिस्तान के बहावलपुर शहर में हुआ था. मसूद के वालिद अल्लाह बक़्श शबीर एक सरकारी स्कूल में हेडमास्टर थे. मसूद अज़हर ने अपनी तालीम कराची के जामिया उलूम अल इस्लामिया से पूरी की लेकिन यहीं उसकी मुलाकात हरक़त उल मुजाहिदीन के सरगनाओं से हुई. दरअसल ये वो सरगना थे जो अफ़गानिस्तान में जंग लड़ रहे थे.

1989 में 21 साल की उम्र में मसूद एक इस्लामिक स्कॉलर बन चुका था. इसी दौरान मसूद की मुलाकात हरक़त उल मुजाहिदीन के सरगना मौलाना फ़ज़लुर्र रहमान ख़लील से हुई और उसके ही कहने पर मसूद अफ़गानिस्तान के यूवर इलाके के एक आतंकी ट्रेनिंग कैंप में चला गया. चूंकि मसूद का क़द सिर्फ़ 5 फुट 2 इंट था और वज़न ज़्यादा था, लिहाज़ा वो अपनी आतंकवाद की ट्रेनिंग पूरी नहीं कर पाया.

इसके बाद मसूद को वापिस कराची के जामिया इस्लामिया भेज दिया गया, जहां वो बच्चों को इस्लाम की तालीम देने लगा. इसके साथ ही मसूद सदा ए मुजाहिदीन नाम की मैगज़ीन निकालने लगा. जल्द ही उसकी मैगज़ीन जेहादियों में काफ़ी पसंद की जाने लगी. ये देख कर हरक़त उल मुजाहिदीन के सरगना मौलाना फ़ज़लुर्र रहमान ख़लील ने मसूद को दुनियाभर में घूम कर जेहाद के नाम पर चंदा जुटाने  करने का काम सौंपा.

पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी ISI की निगेहबानी में मसूद अज़हर ने 31 जनवरी 2000 को पाकिस्तान के कराची शहर में अपने आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद की नींव रख दी और खुद को एक नया ख़िताब दे डाला और बन गया आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का सरगना मौलाना मसूद अज़हर.
जैश ए मोहम्मद का सिर्फ और सिर्फ एक ही मकसद है और वो है कश्मीर को पाकिस्तान में मिलाना और हिंदुस्तान को अपने आतंकी हमलों और साज़िशों से दहलाना और अपनी पहली रैली में ही मसूद अज़हर ने भारत को बर्बाद कर देने की कसम खाई थी, जिसमें 10 हज़ार लोग थे.

मसूद अज़हर ओसामा बिन लादेन का करीबी था और जब मसूद अज़हर ने अपना आतंकी संगठन बनाया था तो ओसामा ने मसूद अज़हर की काफी मदद भी की थी.
आज जैश ए मोहम्मद को कई नामों से जाना जाता है, मसलन जैश-ए-मोहम्मद, तहरीक-ए-फ़ुरक़ान, ख़ुदम-उल-इस्लाम, जमात-उल फ़ुरक़ान.
दरअसल मौलाना मसूद अज़हर ने अपने आतंकी संगठन के ये सभी नाम इसलिए भी रखे हैं ताकि वो दुनिया को धोखा दे सके. इसके अलावा वो अल राशिद नाम से एक ट्रस्ट भी बना रखा है जिसके ज़रिए वो दुनियाभर में मौजूद अपने समर्थकों से चंदा मंगवाता रहता है लेकिन अपनी तमाम शातिर चालों के बावजूद अमेरिका समेत दुनिया के कई देशों ने जैश और उससे जुड़ी दूसरी संस्थाओं पर बैन लगाया हुआ है और जैश को एक आतंकी संगठन घोषित कर रखा है. आतंक का यही वो आक़ा है जो हिंदुस्तान की जेल में 5 साल बिता चुका है और मोस्ट वांटेड है.

भारतीय ख़ुफ़िया सूत्रों के मुताबिक, अब जैश ए मोहम्मद भी लश्कर की ही तरह अपनी नेवी ब्रिगेड बनाने में लगा हुआ है लेकिन मसूद अज़हर के मंसूबे हाफ़िज़ सईद से भी ज़्यादा ख़तरनाक हैं. सूत्रों की मानें तो मसूद अज़हर समंदर के रास्ते जेहाद को करना ही चाहता है पर वो अदन की खाड़ी में अपना आतंक का साम्राज्य खड़ा करने की फ़िराक़ में है.

जैश का हेडक्वार्टर करीब 16 एकड़ में फैला है जहां आतंकियों को ट्रेनिंग देने का इंतजाम है और मौलाना मसूद अज़हर अपने इसी ठिकाने से कश्मीर और पाकिस्तान के नौजवानों को आतंक की ट्रेनिंग देकर हिंदुस्तान में आतंकवादी हमले करने के लिए भेजता है. इतना ही नहीं जैश का ये हेडक्वार्टर दुनियाभर के आतंकियों की आरामगाह भी बना हुआ है. जैश-ए-मोहम्मद में इस वक्त 1500 से 2000 आतंकी हैं और जैश पाकिस्तान का दूसरा सबसे बड़ा आतंकी संगठन है. जैश के ज़्यादातर आतंकी पाकिस्तान के मुल्तान, बहावलपुर और यार रहीम ख़ान सूबों से हैं. इसके साथ ही जैश में अफ़गान और अरब आतंकियों की भी अच्छी-खासी तादाद है. भारतीय ख़ुफ़िया एजेंसियों के मुताबिक, मसूद अज़हर के पास 300 ट्रेंड फिदाईन हमलावर हैं.

आतंक के आका यानि मसूद अज़हर के पाकिस्तान में पल रहे दूसरे आतंकी संगठनों के साथ अच्छे रिश्ते हैं और भारतीय ख़ुफ़िया सूत्रों के मुताबिक मसूद अज़हर अपने आतंकियों को अल-क़ायदा, लश्कर-ए-तैयबा, अफ़गानिस्तान में तालिबान और हिज़्ब उल मुजाहिदीन की मदद करने के लिए भेजता रहता है.

पहले अपने आतंकी कैंप पाकिस्तान की सीमा से सटे अफ़गानिस्तान के इलाकों में चलाया करता था.लेकिन बाद में पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी ISI के इशारे पर उसने अपने कैंप बालाकोट, पेशावर, ख़ायबर-पख़्तूनवा और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के मुज़फ़्फ़राबाद में शिफ़्ट कर दिए. आज भी जैश पाकिस्तान के मुरिदके में लश्कर-ए-तैयबा, गोजरा में सिपाह-ए-साहाबा और पंजाब में लश्कर-ए-जांगहवी के साथ मिलकर आतंकी साज़िशों को अंजाम तक पहुंचाता है. इतना ही नहीं वो अफ़गानिस्तान में तालिबान और अल-क़ायदा की भी मदद कर रहा है.

आलम ये है कि आज जैश-ए-मोहम्मद पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी ISI की शह पर एक बार फिर आतंक के नक्शे पर आ चुका है और एक बार फिर उसने अपने गुर्गों के ज़रिए कश्मीर को दहलाने की साज़िशें तेज़ कर दी हैं.

ये कहने की कोई जरूरत नहीं कि पाकिस्तान आतंकवाद और आतंकवादियों को लेकर जो कुछ कहता है, उसका सच से कोई लेना-देना नहीं होता.  पाकिस्तान में मसूद अजहर जैसे आतंकी खुलेआम घूम रहे हैं और पाकिस्तान सरकार उन्हें रोकने की बजाए उन्हें उनके नापाक मंसूबों को शह देती रहती है.

 
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