लिपुलेख में मिसाइल तैनाती की तैयारी कर रहा चीन, सामने आई तस्वीरें...

लिपुलेख में मिसाइल तैनाती की तैयारी कर रहा चीन, सामने आई तस्वीरें...
फाइल फोटो.

चीन (China) की पीपल्स लिबरेशन आर्मी ने लिपुलेख के ट्राई जंक्शन एरिया (Tri Junction Area) में सर्फेस टू एयर मिसाइल साइट का निर्माण शुरू कर दिया है. यह वही इलाका है जिसे लेकर भारत और नेपाल के बीच विवाद चल रहा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 20, 2020, 10:33 PM IST
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लिपुलेख. भारत के रिश्ते इन दिनों चीन और नेपाल (Nepal) के साथ कुछ खास नहीं चल रहे हैं. हालांकि, दोनों ही देश सामने से तो शांति की बात करते हैं लेकिन चीन (China) ने फिर से ऐसा कुछ कर दिया है जिससे उस पर बिल्कुल भी विश्वास नहीं किया जा सकता. मीडिया रिपोर्ट्स का दावा है कि लिपुलेख (Lipulekh) में चीन ने मिसाइल तैनात करने के लिए साइट का निर्माणकार्य शुरू कर दिया है. इस दावे को अब सामने आईं सैटलाइट तस्वीरों से बल भी मिल रहा है. लिपुलेख वही इलाका है जिसे लेकर भारत और नेपाल के बीच विवाद गर्माया है.ओपन सोर्स इंटेलिजेंस detresfa ने सैटलाइट तस्वीरें जारी की हैं जिनमें दिख रहा है कि लिपुलेख पास में ट्राई- जंक्शन एरिया में चीन ने न सिर्फ सैन्य तैनाती की है बल्कि मिसाइल के ठिकानों के निर्माणकार्य की तैयारी भी कर रहा है.

डेटरेफ्सा के मुताबिक इस इलाके में 100 किमी की GEOINT स्कैनिंग से पीपल्स लिबरेशन आर्मी की ऐक्टिविटी का पता चला है. यहां सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल के लिए साइट का निर्माण मानसरोवर झील के पास किया जा रहा है. मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि चीनी सेना यहां सैन्य तैनाती कर रही है. यहां मई 2020 से इन्फ्रास्ट्रक्चर और रिहायश के लिए तैयारी की जा रही है. लिपुलेख इलाका भारत, नेपाल और चीन की सीमाओं को मिलानेवाली जगह है जो पिछले दिनों से काफी चर्चा में है. पिछले दिनों जानकारी के मुताबिक, चीन ने लिपुलेख में अपनी सेना तैनात की है. उसने सैनिकों की एक बटालियन मतलब करीब 1 हजार से ज्यादा जवान लिपुलेख के पास तैनात कर दिए हैं.


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क्या है लिपुलेख विवाद
लिपुलेख पास वही इलाका है जहां से भारत ने मानसरोवर यात्रा के लिए नया रूट बनाया है. यह पिछले दिनों तब चर्चा में आया था जब नेपाल ने यहां भारत की बनाई 80 किलोमीटर की सड़क पर एतराज जताया था. फिर नेपाल ने अपने यहां नया नक्शा पास कर विवाद बढ़ा दिया था. इसमें कालापानी, जिसमें लिपुलेख भी शामिल था उसे अपना हिस्सा बताया था.
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