सऊदी में निकाह की शर्तों में महिलाएं शामिल करा रहीं यह दो खास मांग

पुरुष अगर निकाहनामे में लिखी किसी शर्त का उल्लंघन करता है तो महिलाएं इस आधार पर उससे तलाक ले सकती हैं.

News18Hindi
Updated: June 25, 2019, 11:14 AM IST
सऊदी में निकाह की शर्तों में महिलाएं शामिल करा रहीं यह दो खास मांग
अल-अजेमी के पास हाल ही में ऐसा पहला निकाहनामा आया है. तस्वीर Reuters
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Updated: June 25, 2019, 11:14 AM IST
सऊदी अरब ने कानूनी तौर पर भले ही महिलाओं को गाड़ी चलाने की अनुमति जरूर दे दी है, लेकिन इस अधिकार के उपयोग में कभी कोई रोड़ा न बने इसके लिए महिलाओं ने नया रुख अख्तियार किया है. महिलाएं निकाह की शर्तों में कार रखने और उसके चलाने के अधिकार को अपने शामिल करा रही हैं.

दम्माम के रहने वाले सेल्समैन माजिद ने हाल ही में अपने निकाह की शर्तों के बारे में बातचीत करते हुए बताया कि कैसे उनकी मंगेतर ने शर्त रखी है कि वह कभी उसे गाड़ी चलाने से नहीं रोकेंगे. दरअसल सऊदी अरब में निकाह की शर्तों का इस्तेमाल महिलाएं और पुरुष दोनों, लेकिन खास तौर से महिलाएं अपने कुछ खास अधिकारों को सुरक्षित कराने के लिए करती हैं.



पितृसत्तात्मक सऊदी अरब में महिलाओं को सामान्य तौर पर अपने पुरुष अभिभावक (पति, पिता या अन्य) की सभी बातें मानने के लिए मजबूर होना पड़ता है और वह कानून की शरण में भी नहीं जा सकती हैं. लेकिन, पुरुष यदि निकाहनामे में लिखी किसी शर्त का उल्लंघन करता है तो महिलाएं इस आधार पर उससे तलाक ले सकती हैं.

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स्वतंत्र रहना चाहती है मंगेतर
अभी तक महिलाएं निकाहनामे का इस्तेमाल अपने लिए मकान, घरेलू सहायिका रखने, आगे पढ़ाई जारी रखने या शादी के बाद भी नौकरी करते रहने जैसी शर्तें रखने के लिए करती थीं. लेकिन अब ड्राइविंग का अधिकार भी इसमें जुड़ रहा है. 29 वर्षीय माजद ने बताया कि कि अगले महीने उनकी शादी होने वाली है. उनकी 21 वर्षीय मंगेतर ने दो शर्तें रखी हैं.. एक वह शादी के बाद भी काम करेंगी और दूसरा कि उन्हें वाहन चलाने का अधिकार होगा. माजद कहते हैं कि वह (मंगेतर) स्वतंत्र रहना चाहती है. मैंने इस पर कहा, ‘हां, क्यों नहीं.’

माजद अपना पूरा नाम साझा नहीं करना चाहते हैं, क्योंकि निकाहनामा और उसकी शर्तें निहायत निजी और पारिवारिक मामला है. रियाद में निकाह पढ़ाने वाले एक मौलवी अब्दुलमोसेन अल-अजेमी का कहना है, ‘निकाह में किसी भी तरह के विवाद से बचने के लिए कुछ महिलाएं ड्राइविंग के अधिकार को निकाहमाने में शामिल करा रही हैं.’
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अल-अजेमी के पास हाल ही में ऐसा पहला निकाहनामा आया है. उनका कहना है कि निकाहनामा एक तरह से सुनिश्वित करता है कि शौहर अपने वादे को नहीं भूलेगा, क्योंकि यह वादा खिलाफ तलाक का आधार बन सकती है. सऊदी सरकार ने महिलाओं को गाड़ी चलाने का अधिकार तो दे दिया है, लेकिन घर के पुरुष अभिभावकों द्वारा ड्राइविंग से मना किए जाने या कार रखने की इजाजत नहीं मिलने की सूरत में क्या किया जा सकता है, उस संबंध में कुछ नहीं कहा है.
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