सऊदी अरब पाकिस्‍तान के साथ डबल गेम खेल रहा : ऑस्‍ट्रेलियाई कॉ‍लमनिस्‍ट

वर्लमैन के मुताबिक सऊदी अरब खुद को इस्‍लाम का रक्षक मानता है और मुस्लिम दुनिया का रहनुमा कहलाना चाहता है. फाइल फोटो/एपी

ऑस्‍ट्रेलियाई कॉलमनिस्‍ट की ओर से रोहिंग्‍या मुसलमानों पर होने वाले अत्याचारों पर सऊदी अरब की खामोशी को भी आलोचना का निशाना बनाया गया है.

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    पाकिस्‍तान (Pakistan) और सऊदी अरब (Saudi Arabia) की दोस्‍ती गहरी रही है. सऊदी अरब ने हर मुश्किल वक्‍त में पाकिस्‍तान की मद्द खुल कर की है. हालांकि 'मिडिल ईस्‍ट आई' (Middle East Eye) अखबार के एक मशहूर ऑस्‍ट्रेलियाई कॉ‍लमनिस्‍ट (Columnist) सी जे वर्लमैन (CJ Werleman) ने सऊदी अरब पर पाकिस्‍तान के साथ डबल गेम खेलने का आरोप धर दिया है.

    उन्‍होंने अपने कॉलम की शुरुआत में कहा है कि सऊदी अरब के युवराज मुहम्‍मद बिन सलमान के नेतृत्‍व में सऊदी देश उसूलों की बजाय फायदे की पॉलिसी को अहमियत दे रहा है. वर्लमैन के मुताबिक सऊदी अरब खुद को इस्‍लाम का रक्षक करार देता है और इस दावे को सच्‍चा साबित करने के लिए इस्‍लामी देशों को हर साल बढ़-चढ़ कर आर्थिक मद्द भी देता है. ताकि वह मुस्लिम दुनिया का इकलौता रहनुमा कहलाए.

    1975 से 2005 के दौरान सऊदी अरब की ओर से इस्‍लामी दुनिया को कुल 90 अरब अमेरिकी डॉलर की मद्द दी गई, जो उसकी सालान आय का 3-7 फीसदी है. वर्लमैन के मुताबिक सऊदी अरब के युवराज मुहम्‍मद बिन सलमान खुद ही देश के तमाम मामले देखते रहे हैं और सारे फैसले भी उन्‍हीं की ओर से लिए जा रहे हैं. वह मुस्लिम दुनिया की समस्‍याओं या मामलों को लेकर संवेदनशील नहीं हैं, बल्कि वह बड़ी समझ-बूझ के साथ सिर्फ सियासी और आर्थिक फायदों को सामने रख कर चल रहे हैं.

    वर्लमैन ने आरोप लगाया है कि सऊदी अरब पाकिस्‍तान के साथ भी डबल गेम खेल रहा है. कुछ माह पहले जब भारत की ओर से मुस्लिम बाहुल्‍य वाले कश्‍मीर को लेकर पाकिस्‍तान ने सऊदी अरब से ओआईसी (Organisation of Islamic Cooperation) का एक खास सत्र बुलाए जाने का आग्रह किया था, जो सऊदी अरब की ओर से रद्द कर दिया गया. 07 फरवरी, 2020 को पाकिस्‍तान की ओर से दूसरी बार आग्रह किया गया कि कश्‍मीर के मसले पर ओआईसी का सत्र बुलाया जाए. मगर सऊदी अरब की ओर से एक बार फिर पाकिस्‍तान का यह आग्रह नहीं माना गया.

    इसी पर पाकिस्‍तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को यह कहना पड़ा था कि 'हम कश्‍मीर की समस्‍या पर ओआईसी का सत्र बुला कर एकता भी जाहिर नहीं कर सकते.' ऑस्‍ट्रेलियाई कॉलमनिस्‍ट की ओर से अंत में कहा गया है कि भारत अपनी एक अरब से अधिक आबादी के बाजार की वजह से सऊदी अरब के लिए व्‍यापारिक लिहाज से बहुत अहमियत पा चुका है. वहीं उन्‍होंने रोहिंग्‍या मुसलमानों पर होने वाले अत्याचारों पर सऊदी अरब की खामोशी को भी अपनी आलोचना का निशाना बनाया है.

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