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कश्मीर पर पाकिस्तान को सऊदी अरब से फिर झटका, नहीं बुलाई जाएगी OIC की बैठक

भाषा
Updated: February 7, 2020, 11:32 AM IST
कश्मीर पर पाकिस्तान को सऊदी अरब से फिर झटका, नहीं बुलाई जाएगी OIC की बैठक
इमरान खान की फाइल फोटो

बीते साल मार्च 2019 में अबू धाबी में हुई ओआईसी की बैठक को पहली बार संबोधित करना भारत के लिए बहुत बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि थी.

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इस्लामाबाद. सऊदी अरब की अगुआई वाले इस्लामिक सहयोग संगठन (ओआईसी OIC) की कश्मीर पर तुंरत बैठक की बुलाने की पाकिस्तान (Pakistan) की कोशिश असफल होती दिख रही है. मीडिया में गुरुवार को प्रकाशित खबर के मुताबिक सऊदी अरब (Saudi Arab) ने ऐसा कोई भी कदम उठाने की अनिच्छा जताई है.

बता दें कि दिसंबर में सऊदी अरब द्वारा कश्मीर (Kashmir) पर ओआईसी देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक बुलाने की योजना थी. जिसे माना जा रहा था कि सऊदी अरब की पाकिस्तान को खुश करने की कोशिश थी क्योंकि पाकिस्तान ने 57 मुस्लिम देशों के संगठन ओआईसी के मुकाबले में नया संगठन खड़ा करने की कोशिश के लिए मलेशिया में होने वाले सम्मेलन में हिस्सा लेने से मना कर दिया था.

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान (Imran Khan) ने मलेशिया (Malesiya) की मेजबानी में होने वाले सम्मेलन में शामिल होने की सहमति दे दी थी लेकिन सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के दबाव में आखिरी समय में सम्मेलन में शामिल नहीं हुए. बता दें कि सऊदी अरब और यूएई नकदी संकट का सामना कर रहे पाकिस्तान के सबसे बड़े मददगार हैं.

डॉन में प्रकाशित खबर के मुताबिक संगठन के वरिष्ठ अधिकारी नौ फरवरी को विदेश मंत्रियों की परिषद (सीएफएम) की तैयारियों के लिए बैठक करेंगे.

बैठक बुलाने के प्रति अनिच्छा
अखबार ने एक राजनयिक के हवाले से बताया कि सीएफएम बैठक में इस मुद्दे को शामिल कराने में अपनी नाकामी से पाकिस्तान की असहजता बढ़ती जा रही है क्योंकि रियाद ने इस्लामाबाद के अनुरोध पर कश्मीर पर बैठक बुलाने के प्रति अनिच्छा जताई है.

उल्लेखनीय है कि ओआईसी संयुक्त राष्ट्र के बाद दूसरा सबसे बड़ा अंतर सरकारी संगठन है और इसका मुख्यालय जेद्दा में है. ओआईसी का कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान के प्रति समर्थन का रुख रहा है और यहां तक कि कई बार उसने इस्लामाबाद का पक्ष भी लिया है.हाल में अपने मलेशिया दौरे में प्रधानमंत्री इमरान खान ने कश्मीर पर ओआईसी की चुप्पी पर नाराजगी जताई थी. इमरान ने इस हफ्ते कहा, ‘हमारी आवाज नहीं सुने जाने की वजह यह है कि हम बंटे हुए हैं. यहां तक की कश्मीर पर ओआईसी की बैठक पर भी एकसाथ नहीं आ पाए.’

पिछले साल अगस्त में जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा भारत द्वारा खत्म किए जाने के बाद से पाकिस्तान कश्मीर पर ओआईसी के विदेश मंत्रियों की बैठक बुलाने के लिए दबाव बना रहा है.

खाड़ी के अन्य अरब देशों पर प्रभुत्व
हालांकि, न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा की वार्षिक बैठक के इतर समूह ने कश्मीर पर बात की और यहां तक की ओआईसी के स्वतंत्र स्थायी मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट में कश्मीर में लोगों के अधिकारों का कथित हनन करने का आरोप लगाया गया लेकिन इससे सीएफएम की बैठक बुलाने के मुद्दे पर प्रगति नहीं हुई.

विदेशमंत्री शाह महमूद कुरैशी ने पाकिस्तान के लिए सीएफएम के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि कश्मीर मुद्दे पर उम्माह (समुदाय) की ओर से स्पष्ट संदेश देने की जरूरत है. रियाद का समर्थन ओआईसी के किसी कदम के लिए अहम माना जाता है क्योंकि इसका खाड़ी के अन्य अरब देशों पर प्रभुत्व है.

पाकिस्तान विदेश मंत्री को सम्मेलन का बहिष्कार करना पड़ा
सूत्रों के मुताबिक सऊदी अरब ने सीएफएम की बैठक में कश्मीर मुद्दा शामिल करने से बचने के लिए कई प्रस्ताव दिए जिनमें मुस्लिम देशों के संसदीय मंच या अध्यक्षों की बैठक या फलस्तीन एवं कश्मीर मुद्दे पर संयुक्त बैठक शामिल है. हालांकि, पाकिस्तान अपनी मांग पर कायम है.

उन्होंने बताया कि मलेशिया सम्मेलन से पाकिस्तान की अनुपस्थिति के बाद दिसंबर में सऊदी अरब ने कश्मीर पर सीएफएम बुलाने के प्रस्ताव पर कुछ लचीला रुख अपनाया पंरतु यह ज्यादा दिनों तक नहीं रहा और फिर वह पुराने रुख पर आ गया.

उल्लेखनीय है कि पिछले साल मार्च महीने में अबू धाबी में हुई ओआईसी की बैठक को पहली बार संबोधित करना भारत के लिए बहुत बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि थी क्योंकि पाकिस्तान के विरोध के बावजूद ओआईसी ने तत्कालीन विदेशमंत्री सुषमा स्वराज को दिए गए निमंत्रण पर कायम रहा जिसकी वजह से पाकिस्तान विदेश मंत्री को सम्मेलन का बहिष्कार करना पड़ा.

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First published: February 7, 2020, 10:12 AM IST
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