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अरामको पर ड्रोन हमले से आधा हुआ सऊदी का तेल उत्पादन, ईरान के साथ चरम पर तनाव

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Updated: September 15, 2019, 10:53 AM IST
अरामको पर ड्रोन हमले से आधा हुआ सऊदी का तेल उत्पादन, ईरान के साथ चरम पर तनाव
हमले का असर- सऊदी में तेल का कुल उत्पादन आधा हो जाएगा.

यमन (Yemen) में मौजूद ईरान (Iran) समर्थित हूती विद्रोही (Houthi rebels) संगठन के एक वरिष्ठ सदस्य याह्या सारए ने बताया कि इस हमले को अंजाम देने के लिए 10 ड्रोन सऊदी अरब (Saudi Arabia) भेजे गए थे.

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  • Last Updated: September 15, 2019, 10:53 AM IST
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सऊदी अरब (Saudi Arabia) में अरामको (Aramco) के दो बड़े संयंत्रों अब्कैक और खुरैस पर हूती विद्रोहियों के ड्रोन अटैक से लगी आग पर काबू पा लिया गया है. अंतरराष्ट्रीय मीडिया की रिपोर्ट्स में बताया गया है कि इन हमलों के बाद वहां तेल उत्पादन में हर दिन 50 लाख बैरल की कमी आई है. ये सऊदी अरब के कुल तेल उत्पादन का आधा हिस्सा है. ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में भारी इजाफे की आशंका जताई जा रही है.

सऊदी की सरकारी मीडिया का कहना है कि इस हमले में दोनों प्रतिष्ठानों में भीषण आग लग गई. जारी की गई तस्वीरों में साफ दिखाई दे रहा है कि अरामको की सबसे बड़ी रिफाइनरी वाले इलाके में भयानक आग लगी थी. दूसरा ड्रोन हमला खुरैस तेल के इलाके में हुआ और वहां भी आग लग गई.

हमले का असर, सऊदी में तेल का कुल उत्पादन आधा हुआ

यमन के हूती विद्रोहियों (Houthi rebels) ने सऊदी अरब की सबसे बड़ी तेल कंपनी अरामको पर किए ड्रोन हमले किए थे. सऊदी अरब में तेल की दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी के दो संयंत्रों में शनिवार को ड्रोन से हमला किया गया था. ऐसा माना जाता है कि हूति विद्रोहियों को ईरान का समर्थन प्राप्त है.

यमन के विद्रोहियों द्वारा ये हमला ऐसे समय में किया गया है, जब यह कंपनी शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने की तैयारी कर रही है. इस हमले के बाद सऊदी अरब के तेल का कुल उत्पादन लगभग आधा हो गया है. आधिकारिक सऊदी समाचार एजेंसी ने गृह मंत्रालय के एक बयान के हवाले से कहा, 'अंतरराष्ट्रीय समयानुसार एक बजे अरामको के औद्योगिक सुरक्षा दलों ने अब्कैक और खुरैस में ड्रोन हमले के कारण लगी आग से निपटना शुरू किया.' उन्होंने बताया, "दोनों संयंत्रों में लगी आग पर नियंत्रण पा लिया गया है.'

हमले के बाद सऊदी और ईरान के बीच तनाव चरम पर

ईरान (Iran) के साथ चल रहे क्षेत्रीय तनावों के बीच यह हमला हुआ है. इन हमलों से पता चलता है कि ईरान से जुड़े हूती विद्रोही सऊदी अरब में तेल प्रतिष्ठानों के लिए कैसे गंभीर खतरा बन गए हैं. सऊदी अरब दुनिया में कच्चे तेल का सबसे बड़ा निर्यातक है. हाल के महीनों में हूती विद्रोहियों ने सीमा पार सऊदी अरब के हवाईअड्डों और अन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाते हुए मिसाइल और ड्रोन हमले तेज कर दिए हैं. इसे वह यमन में विद्रोहियों के कब्जे वाले इलाकों में सऊदी अरब के नेतृत्व में लंबे समय से की जा रही बमबारी का बदला बताते हैं. हमले के बाद सऊदी अरब और ईरान के बीच तनाव चरम पर है.
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अमेरिका और सऊदी के अधिकारियों ने दिया बयान

इस हमले से दुनिया के शक्तिशाली देशों (P5+1) के साथ परमाणु समझौते को लेकर ईरान की बातचीत खटाई में पड़ने के आसार है. वहीं अमेरिका के साथ भी उसका तनाव बढ़ सकता है. अमेरिका और सऊदी अरब खाड़ी में टैंकरों पर हुए हमलों के लिए ईरान को भी जिम्मेदार ठहरा रहे हैं.

आधिकारिक सऊदी समाचार एजेंसी ने ऊर्जा मंत्री शहजादा अब्दुलअजीज के हवाले से बताया कि हमले की वजह से अब्कैक और खुरैस में अस्थायी तौर पर उत्पादन का काम रोक दिया गया है. इसी बीच अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने इन हमलों के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया. पोम्पिओ ने कहा, "ईरान ने दुनिया के ऊर्जा आपूर्ति पर अप्रत्याशित हमला किया."

हमले के लिए 10 ड्रोन सऊदी भेजे गए थे

यमन में मौजूद ईरान समर्थित हूती विद्रोही संगठन के एक वरिष्ठ सदस्य याह्या सारए ने बताया कि इस हमले को अंजाम देने के लिए 10 ड्रोन सऊदी भेजे गए थे. याह्या ने अल-मसिरह टीवी को बताया कि आने वाले वक्त में ऐसे हमलों को अंजाम दिया जा सकता है. सऊदी अरब के अधिकारियों की तरफ से अब तक याह्या के दावों का कोई जवाब नहीं आया है.



फरवरी 2006 में भी हुई थी हमले की कोशिश

अभी ये साफ नहीं है कि हमलों में कोई घायल हुआ है या नहीं. धहरान से 250 किलोमीटर दूर स्थित खुरैस अरामको का प्रमुख ऑयल फील्ड है. अरामको के धहरान मुख्यालय से 60 किलोमीटर दक्षिणपश्चिम में स्थित अब्कैक संयंत्र कंपनी के सबसे बड़े तेल रिफायनरी का गढ़ है. पहले भी आतंकवादी इसे निशाना बनाते रहे हैं. अल-कायदा के आत्मघाती विस्फोटकों ने फरवरी 2006 में इस तेल कंपनी पर हमला करने की कोशिश की थी, लेकिन वे नाकाम रहे थे.

(भाषा इनपुट के साथ)

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First published: September 15, 2019, 9:40 AM IST
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