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काबुल: तालिबान के डर के साए में दोबारा शुरू होंगे स्कूल, कोरोना के चलते लगे थे ताले

कक्षाएं 6 अगस्त से दोबारा शुरू हो जाएंगी. (सांकेतिक फोटो)

कक्षाएं 6 अगस्त से दोबारा शुरू हो जाएंगी. (सांकेतिक फोटो)

School Reopening in Afghanistan: अफगानिस्तान की शिक्षा मंत्रालय और उच्च शिक्षा मंत्रालय ने शिक्षण संस्थान दोबारा शुरू करने का फैसला किया है. 24 जुलाई शनिवार को मंत्रालय की बैठक के बाद देश के 11 प्रांतों में विश्वविद्यालयों की कक्षाएं दोबारा शुरू करने का निर्णय लिया गया था.

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    काबुल. तालिबान (Taliban) की बढ़ती ताकत के बीच अफगानिस्तान (Afghanistan) में हालात बिगड़ते जा रहे हैं. इसी बीच एक अच्छी खबर यह है कि कोरोना के कारण बंद हुआ राजधानी काबुल का एक गर्ल्स स्कूल दोबारा शुरू होने जा रहा है. स्थानीय छात्राओं में भी स्कूल दोबारा खुलने की खुशी साफ नजर आ रही है. देश में फिर कद बढ़ा रहे तालिबान के खतरे के बावजूद भी लड़कियों में स्कूल लौटने की उत्साह ज्यादा है.

    मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कोरोना महामारी के चलते स्कूल पर ताला लग गया था, लेकिन अब दो महीनों बाद यह फिर से खुलने के लिए तैयार है. रिपोर्ट्स बताती हैं कि हाईस्कूल में पढ़ने वाली छात्राओं की संख्या 8500 के आसपास है. इधर, तालिबान लगातार लड़कियों की शिक्षा के विरोध में काम कर रहा है. कहा जा रहा है कि तालिबान 10 साल या इससे ज्यादा उम्र की लड़कियों के स्कूल के खिलाफ है.

    खामा प्रेस न्यूज एजेंसी के मुताबिक, अफगानिस्तान की शिक्षा मंत्रालय और उच्च शिक्षा मंत्रालय ने शिक्षण संस्थान दोबारा शुरू करने का फैसला किया है. 24 जुलाई शनिवार को मंत्रालय की बैठक के बाद देश के 11 प्रांतों में विश्वविद्यालयों की कक्षाएं दोबारा शुरू करने का निर्णय लिया गया था. रिपोर्ट के अनुसार, कक्षाएं 6 अगस्त से दोबारा शुरू हो जाएंगी.

    यह भी पढ़ें: अफगान बलों को बड़ी सफलता, बाख प्रांत के अहम जिले को तालिबान से छुड़ाया

    मीडिया रिपोर्ट्स में जारी आंकड़े बताते हैं कि अफगानिस्तान में बच्चों की संख्या 90 लाख है. इनमें 66 फीसदी लड़के और 37 फीसदी लड़कियां शिक्षा हासिल कर रहे हैं. जबकि, 37 लाख बच्चे पढ़ाई से दूर हैं. देश में 60 प्रतिशत लड़कियों को शिक्षा नहीं मिल रही है. रिपोर्ट में एक स्कूल टीचर के हवाले से बताया गया है कि लड़कियां पढ़ाई तो करना चाहती हैं, लेकिन तालिबान और हमलों के डर के चलते परिवार उन्हें स्कूल नहीं भेजना चाहते.

    साल 1999 में एक भी लड़की माध्यमिक शिक्षा के लिए स्कूल में दाखिल नहीं हुई थी. उस दौरान तालिबान अपने चरम पर था. कहा जा रहा है कि अगर अब देश में तालिबान की पैठ दोबारा मजबूत हुई, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं.

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