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अच्छी खबर: वैज्ञानिकों ने खेतों में उगा लिए रंगीन कपास, त्वचा और पर्यावरण के लिए अनुकूल

अच्छी खबर: वैज्ञानिकों ने खेतों में उगा लिए रंगीन कपास, त्वचा और पर्यावरण के लिए अनुकूल

वैज्ञानिकों ने रंगीन कपास विकसित कर लिया है.

वैज्ञानिकों ने रंगीन कपास विकसित कर लिया है.

वैज्ञानिकों का दावा है कि रंगीन कपास (Colour Cotton) के विकास के बाद अब कपड़ों को रसायनिक रंगों में रंगने की दरकार नहीं रह) जाएगी. वैज्ञानिकों की टीम के प्रमुख काेलिन मैकमिलन ने कहा कि हमने अलग-अलग रंगों के पौधों के टिश्यू विकसित कर लिए हैं.

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    कैनबरा. क्या आपने कभी रंगीन कपास (Colour Cotton) के बारे में सुना है? नहीं न? अब इस खबर को पढ़ने के बाद आप भी कह सकेंगे कि हां रंगीन कपास होता है. ऑस्ट्रेलिया के वैज्ञानिकों (Scientist Of Australia) ने रंगीन कपास तैयार कर लिया है. वैज्ञानिकों का दावा है कि रंगीन कपास के विकास के बाद अब कपड़ों को रसायनिक रंगों में रंगने की दरकार नहीं रह (No Need To Chemical Colour) जाएगी. इस कपास को तैयार करने वाले वैज्ञानिकों की टीम के प्रमुख काेलिन मैकमिलन ने कहा कि हमने अलग-अलग रंगों के पौधों के टिश्यू विकसित कर लिए हैं. इसे हम खेतों में उगा सकने में समर्थ पा रहे हैं. हम ऐसे प्राकृतिक कपास की किस्म तैयार कर रहे हैं, जिसके धागों से बने कपड़ाें में सिलवटें नहीं पड़ेगी. इन कपास से तैयार कपड़े स्ट्रेचेबल होंगे. इससे सिंथेटिक कपड़ाें का उपयाेग कम करने में आसानी हाेगी.

    इस रंगीन कपास को तैयार करने वाले कॉमनवेल्थ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च ऑर्गनाइजेशन का कहना है कि हमारे वैज्ञानिकों ने कपास के आणविक रंग के जेनेटिक कोड को पाने में सफलता हासिल कर ली है.

    एक किलो कपड़े रंगने में बर्बाद होता है 1000 लीटर पानी

    रिसर्च टीम के सदस्यों ने बताया कि दुनिया में अभी 60 फीसदी से ज्यादा पॉलिएस्टर कपड़ों का निर्माण हो रहा है. यह कपड़े 200 वर्षों तक नष्ट नहीं होते हैं. इसके साथ ही एक किलो कपड़े को रंगने के लिए एक हजार लीटर पानी बर्बाद होता है. अब इस कपास से बने धागे को रासायनिक रंगों से रंगने की जरूरत नहीं पड़ेगी. यह शरीर व पर्यावरण के अनुकूल होंगे.

    काेलिन मैकमिलन ने कहा कि हमने कपास के आणविक जेनेटिक कलर काेड काे इस प्रकार राेपित किया, जिससे पाैधे खुद ही अलग-अलग कलर वाले कपास पैदा करेंगे. हमने तंबाकू के पाैधे में इसका प्रयाेग किया तो पत्तियाें में रंगीन धब्बे उभरकर सामने आए और इसके बाद ही हमारे मन में रंगीन कपास तैयार करने का विचार आया. यह खोज दुनिया के टेक्सटाइल इंडस्ट्रीज में बड़ा बदलाव ला सकती है. उन्होंने बताया कि अभी हम जो फाइबर तैयार कर रहे हैं, वह बायोडिग्रेडेबल और रिन्युएबल तो है मगर रंगीन नहीं है.

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    भारत में भी रंगीन कपास को लेकर काफी प्रयोग हो चुके हैं. वैज्ञानिकों को भूरे और हरे रंग के अलावा अन्य कलर पाने में सफलता नहीं मिली. नॉर्दर्न इंडिया टेक्सटाइल रिसर्च एसोसिएशन ने रंगीन कपास के 15 पेटेंट भी हासिल किए हैं.

    Tags: Australia, Designer clothes, Science

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