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22वीं सदी नहीं देख पाएगी दुनिया, धरती को पी जाएगा समुद्र!

22वीं सदी नहीं देख पाएगी दुनिया, धरती को पी जाएगा समुद्र!

वैज्ञानिक खुद हमारी धरती के गर्म होने और बर्फ के पिघलने की रफ्तार से हैरान हैं। डर भारत के लिए भी है, मुंबई खतरे में है, चेन्नई और कोलकाता में भी पानी कहर ढा सकता है।

    नई दिल्ली। समुद्र देखने में शांत और सुंदर लगता है लेकिन उसका पानी तेजी से बढ़ रहा है। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि 2800 साल से ऐसा पहले कभी नहीं हुआ है। जिस तेजी से अंटार्टिका के ग्लेशियर पिघल रहे हैं, उससे ये भविष्यवाणी की गई है कि साल 2100 तक समुद्र का पानी 3-4 फीट तक ऊपर चढ़ जाएगा। अगर ऐसा हुआ तो समुद्र के किनारे बसे तमाम शहर और द्वीप आने वाले कुछ सालों में ही डूब जाएंगे। वैज्ञानिक खुद हमारी धरती के गर्म होने और बर्फ के पिघलने की रफ्तार से हैरान हैं। डर भारत के लिए भी है, मुंबई खतरे में है, चेन्नई और कोलकाता में भी पानी कहर ढा सकता है।

    अमेरिका ही नहीं, भारत के समुद्री इलाकों में इस तबाही की आहट दिखना शुरू हो चुका है। भारत में अंडमान द्वीप समूह के कई हिस्से डूबने लगे हैं, लक्षद्वीप के पास भी कुछ ही साल की जिंदगी बची है। मुंबई में समुद्री लहरें शहर की ओर बढ़ने लगी हैं, चेन्नई में भी समुद्री बालू घटने लगी है, कोलकाता में हुगली नदी के किनारे के इलाके डूबने लगे हैं।

    बढ़ते प्रदूषण से पृथ्वी गर्म हो रही है। अंकार्टिका की बर्फ तेजी से पिघलने लगी है। समुद्र का पानी तेजी से बढ़ने लगा है। भारत ही नहीं पूरी दुनिया में खतरे की घंटियां बज रही हैं। सोमवार को जारी पूरी दुनिया के मौसम और तापमान पर नजर रखने वाली अमेरिका की संस्था क्लाईमेट सेंट्रल की रिपोर्ट और भविष्यवाणी डरा रही है। रिपोर्ट तैयार करने वाले जर्मन समुद्र विज्ञानी डॉ. स्टीफन रैम्सटॉर्फ कहते हैं कि अगर पृथ्वी का तापमान यूं ही बढ़ता रहा तो समुद्र में पानी का स्तर भी तेजी से बढ़ता रहेगा। ये होना ही है, इसे रोकना बेहद मुश्किल है।

    अहमदाबाद में आईएसआर के पूर्व निदेशक डॉ बी के रस्तोगी कहते हैं कि अभी जो स्टडी आई है उसके हिसाब से 20वीं सदी में समुद्र का पानी चार से पांच फुट बढ़ा है। पहले की सदी में ये एक से डेढ़ फुट बढ़ता था। अगली सदी में इससे भी दोगुनी बढ़त की आशंका है। अगर हम रहन-सहन में बदलाव नहीं लाए तो ये होना ही है।

    एक अंदाज के मुताबिक अगर अंटार्टिका की सारी बर्फ पिघल गई तो समुद्र का स्तर 230 फीट तक बढ़ जाएगा। ऐसा हुआ तो सर्वविनाश हो जाएगा। पूरी पृथ्वी डूब जाएगी, सिर्फ पानी ही बचेगा। डॉ. स्टीफन रैम्सटॉर्फ के मुताबिक हमने इतनी कार्बन डाई ऑक्साइड वातावरण में छोड़ दी है कि उसकी मात्रा एक तिहाई तक बढ़ चुकी है। ये सब पिछले सौ साल से हो रहा है। लेकिन अब हालात बेहद खराब हो चुके हैं। ये सदी देखने वाली है कि पृथ्वी का तापमान 3-5 डिग्री तक बढ़ जाएगा। ये धरती जितनी गर्म होगी उतनी ही तेजी से समुद्र का जलस्तर बढ़ेगा।

    रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया के जिन 10 शहरों पर समुद्र का स्तर बढ़ने से खतरा है उनमें मुंबई भी है। मुंबई के 1 करोड़ 10 लाख लोग खतरे में हैं। वैसे भी भारत की आबादी का 25 फीसदी समुद्री किनारों या नदियों के करीब बसा हुआ है। समुद्र का पानी चढ़ने से सीधा असर उनकी जिंदगी पर ही पड़ेगा। क्लाईमेट चेंज पर बने भारत सरकार के पैनल के आंकड़ों के मुताबिक अगर वर्ष 2100 तक समुद्र का स्तर 3 मीटर बढ़ गया तो 3 करोड़ 36 लाख 38 हजार 968 लोग बेघर हो जाएंगे। अगर वर्ष 2100 तक समुद्र का स्तर 5 मीटर तक बढ़ गया तो 4 करोड़ 32 लाख 50 हजार 124 लोग बेघर हो जाएंगे।

    खतरा कोलकाता के लिए भी बड़ा है। क्लाईमेट सेंट्रल की रिपोर्ट में कोलकाता का भी नाम शामिल है। खासतौर पर हुगली नदी के किनारे बसे हावड़ा इलाके का। कहा गया है कि वहां की 60 फीसदी आबादी खतरे में है। मौसम विज्ञानी एम एस राठौड़ के मुताबिक समुद्र का जल स्तर बढ़ने से भारत के सामने समुद्री टापू और तटीय शहरों के डूबने का ही खतरा नही, ग्लेशियर पिघलने से गंगा और ब्रहमपुत्र जैसी नदियों के सूखने का खतरा भी है।

     

    Tags: Global warming

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