ब्रिटेन में इस जगह हो सकता है चेरनोबिल और हिरोशिमा से भी ज्यादा बड़ा परमाणु हादसा

एक अख़बार की एक रिपोर्ट के मुताबिक अगर इस प्लांट में हादसा हुआ तो यह चेरनोबिल परमाणु संयंत्र में हुए हादसे और हिरोशिमा परमाणु हमले से भी कहीं ज्यादा बड़ा और घातक होगा.

News18Hindi
Updated: July 15, 2019, 11:51 PM IST
ब्रिटेन में इस जगह हो सकता है चेरनोबिल और हिरोशिमा से भी ज्यादा बड़ा परमाणु हादसा
ब्रिटेन के एक परमाणु संयंत्र में कभी भी हादसे के आसार बने हुए हैं (फाइल फोटो)
News18Hindi
Updated: July 15, 2019, 11:51 PM IST
आज के युग में जहां कई देश अपने परमाणु हथियारों की धौंस जमाते हैं तो वहीं कई सारे गैर सरकारी संगठन इन परमाणु हथियारों की बेहिसाब ऊर्जा और गंभीर हानियों को गिनाते नहीं थकते. वर्तमान में कई देशों में न्यूक्लियर पावर बनने की होड़ मची हुई है. इसका ताजा उदाहरण अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु शक्ति को लेकर बनी हुई तनातनी है. ऐसे में कई देश गुपचुप तरीके से भी परमाणु क्षमता हासिल करने में लगे रहते हैं. यह देश इन कार्यक्रमों को बिल्कुल खुफिया ढंग से संचालित करते हैं.

ऐसे हालातों में यूके (यूनाइटेड किंगडम) के सेलाफील्ड न्यूक्लियर प्लांट में इतिहास के सबसे बड़े परमाणु खतरे की ख़बर ने दुनिया को चौंका दिया है. द सन अख़बार की एक रिपोर्ट के मुताबिक अगर इस प्लांट में हादसा हुआ तो यह चेरनोबिल परमाणु संयंत्र में हुए हादसे और हिरोशिमा परमाणु हमले से भी कहीं ज्यादा बड़ा और घातक होगा. जानकारों का मानना है कि न्यूक्लियर प्लांट में इतिहास का सबसे बड़ा हादसा कभी भी हो सकता है. इसी के चलते सेलाफील्ड के इस प्लांट को पश्चिमी यूरोप की सबसे खतरनाक औद्योगिक इमारत बताया गया है.

सेलाफील्ड संयंत्र में बड़े स्तर पर पाई गई हैं गड़बड़ियां
ब्रिटेन के द सन अख़बार की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले दो वर्षों में लंदन स्थित इस परमाणु संयंत्र में कम से कम 25 गड़बड़ियां पाई गई हैं. यह सारी ही सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बताई गई हैं. इन रिपोर्ट्स के मुताबिक एक मामला यह भी था कि पानी की लाइन से रेडियेशन हो रहा है. ऐसा इसलिए क्योंकि इसमें लीकेज है.

साथ ही यहां पर अक्सर उस कंटेनर को खुला छोड़ दिया जाता है जिसमें परमाणु कचरा डाला जाता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक यहां पर यूरेनियम पाउडर गिरा हुआ भी पाया गया है. इसके अलावा कुछ फटे पाइपों से एसिड के रिसाव का भी पता चला था. इन रिपोर्ट्स में यह भी साफ किया गया था कि ये रिपोर्ट्स बस कुछ गड़बड़ियों का जिक्र करती है जबकि इस न्यूक्लियर प्लांट में गड़बड़ियों की फेहरिस्त बहुत लंबी है.

2017 में बेकाबू हो चुके हैं हालात
इस परमाणु संयंत्र के रिकॉर्ड्स बताते हैं कि अक्टूबर, 2017 में एक गंभीर रसायन के चलते यहां के हालात बेकाबू हो गए थे. जिसके बाद बम निरोधक दस्ते को बुलाया गया. इसके एक महीने बाद प्लांट में काम करने वाले एक कर्मचारी के कम स्तर के रेडियेशन का शिकार होने का भी पता चला था.
Loading...

इसके अलावा जब इस साल की शुरुआत में हाई वोल्टेज बिजली का तार टूटने से संयंत्र की बिजली चली गई तो न्यूक्लियर रेग्युलेशन ऑफिस को वहां से हटा दिया गया. उस समय कहा गया कि ऐसा ऑफिस में सुधारकार्यों के चलते किया गया है.

सेलाफील्ड संयंत्र के आसपास दहशत में जी रहे हैं लोग (फाइल फोटो)


दहशत में जी रहे हैं संयंत्र के आसपास के लोग
इंटरनेशनल मीडिया का मानना है कि कंब्रिया नाम के इस परिसर में 140 टन रेडियोएक्टिव पदार्थ प्लूटोनियम के भंडार हैं. इसके अलावा यहां यूके के क्रियाशील परमाणु रिएक्टरों का कचरा भी आता है. जिसका सही निस्तारण बहुत ज्यादा खतरनाक हो सकता है. यही कारण है कि इस परिसर को यूरोप की सबसे खतरनाक जगह भी घोषित किया जा चुका है. और इन्हीं सब कारणों के चलते इस परिसर के आसपास रहने वाले लोगों के बीच में डर का माहौल है. इस संयंत्र के आसपास संयंत्र में काम करने वाले मजदूरों के परिवार रहते हैं. ऐसे में अगर ऐसी कोई भी दुर्घटना हुई तो उसके सबसे पहले शिकार इस संयंत्र में काम करने वाले मजदूर और उनके परिवार वाले बनेंगे.

प्लांट का प्रबंधन करने वाले किसी भी गड़ब़ड़ी से करते हैं इंकार
संयंत्र के प्रवक्ता ने कहा है कि पिछले दो सालों में यहां कोई गड़बड़ी नहीं हुई है. उन्होंने कहा है कि वे सभी पारदर्शिता को लेकर प्रतिबद्ध है. और छोटी से छोटी गड़बड़ी की भी अच्छे से जांच की जाती है. पारदर्शिता के लिए की जाने वाली इस जांच की रिपोर्ट को वे अपनी वेबसाइट पर भी अपलोड करते हैं.

कितनी ख़तरनाक थी चरनोबिल की परमाणु दुर्घटना
परमाणु संयंत्र के मामले में थोड़ी सी हीलाहवाली भी बड़ी दुर्घटना को न्यौता दे सकती है. यह बात 26 अप्रैल, 1986 को यूक्रेन के चेरनोबिल स्थित परमाणु संयंत्र की दुर्घटना में साबित हो चुका है. जानकार मानते हैं कि अगर ब्रिटेन के इस संयंत्र में कोई दुर्घटना हुई तो यह चेरनोबिल की दुर्घटना के भी ज्यादा खतरनाक होगी.

आज भी चेरनोबिल दुर्घटना के इलाके में बच्चे पैदाइशी अपंगता का होते हैं शिकार (सेलाफील्ड संयंत्र की फाइल फोटो)


दरअसल चेरनोबिल के न्यूक्लियर रिएक्टर चार में 1986 में धमाका हो गया था. ये धमाका 500 परमाणु बमों के बराबर शक्ति का था. यह विस्फोट इतना ताकतवर था कि संयंत्र के ऊपर बनी 1000 टन की छत उड़ गई थी. संयंत्र में हुए इस विस्फोट में 50 लोगों की जानें गई थीं. इससे भी ज्यादा खतरनाक बात यह थी कि संयंत्र में मौजूद 190 टन यूरेनियम डाईऑक्साइड का 4% हिस्सा हवा में रेडियेशन के लिए फैल गया था.

डराने वाली बात यह थी कि संयंत्र से महज 3 किमी की दूरी पर लोगों के घर थे. लेकिन फिर भी इन लोगों को इस दुर्घटना के 30 घंटे बाद इनके घरों से निकाला गया. तब तक हजारों लोग परमाणु विकिरण की चपेट में आ चुके थे. इस दुर्घटना के बाद छह लाख लोगों को विकिरण रोकने के काम में लगाया गया था. माना जाता है कि इस दुर्घटना के चलते रूस, यूक्रेन और बेलारूस के 50 लाख से ज्यादा लोग विकिरण की चपेट में आए थे. जिसके चलते आज भी कई लोगों की संतानें विकलांग पैदा हो रही हैं.

यह भी पढ़ें: ड्राइवरों को सोने नहीं देगा ये इज़राइली सेंसर डिवाइस

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए दुनिया से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: July 15, 2019, 11:44 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...