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US के अटॉर्नी जनरल ने भी ट्रंप के 'फ्रॉड' से जुड़े दावे ख़ारिज किए, अजीत पई देंगे इस्तीफ़ा

ट्रंप के दावों को यूएस अटॉर्नी ने ख़ारिज किया.
ट्रंप के दावों को यूएस अटॉर्नी ने ख़ारिज किया.

US Election Result Update: अमेरिका के अटॉर्नी जनरल विलियम बार (US Attorney General William Barr) ने स्पष्ट कर दिया है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के चुनाव धांधली से जुड़े दावों में कोई सच्चाई नहीं है. अटॉर्नी जनरल ने कहा, ''अब तक हमें उस स्तर की धांधली के कोई सबूत नहीं मिले हैं जिनसे चुनावी नतीजे प्रभावित हुए हों.''

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 2, 2020, 8:19 AM IST
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वाशिंगटन. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) को न सिर्फ रीकाउंटिंग के दौरान हार का सामना करना पड़ा है बल्कि उनके ही प्रशासन ने अब उनके चुनाव धांधली से जुड़े दावों पर सवाल उठाना शुरू कर दिया है. अमेरिका के अटॉर्नी जनरल विलियम बार (US Attorney General William Barr) ने कहा है कि उनके जस्टिस डिपार्टमेंट को ट्रंप के दावों के मुताबिक़ 2020 के राष्ट्रपति चुनाव में किसी भी तरह की धांधली के सबूत नहीं मिले हैं. अटॉर्नी जनरल ने कहा, ''अब तक हमें उस स्तर की धांधली के कोई सबूत नहीं मिले हैं जिनसे चुनावी नतीजे प्रभावित हुए हों.''

विलियम बार का यह बयान ट्रंप के लिए गहरा झटका है, जिन्होंने अब तक हार स्वीकार नहीं किया है. ट्रंप और उनके कैंपेन की तरफ़ से उन राज्यों में चुनावी नतीजों को कोर्ट में चुनौती दी गई थी जहाँ उन्हें हार का सामना करना पड़ा था. अब इन राज्यों ने जो बाइडन को जीत का सर्टिफिकेट देना शुरू कर दिया है. तीन नवंबर को हुए मतदान के बाद से ही ट्रंप लगातार अप्रमाणिक दावा कर रहे हैं कि चुनाव में व्यापक पैमाने पर धांधली हुई है. ट्रंप की लीगल टीम बाइडन की जीत में अंतरराष्ट्रीय साज़िश होने का दावा करती रही है. विलियम बार ने समाचार एजेंसी एपी से मंगलवार को कहा, ''एक दावा यह है कि धांधली सुनियोजित तरीक़े से हुई है और चुनावी नतीजों को बदल दिया गया. बैलेट मशीन हैक करने का दावा भी किया गया, जिससे बाइडन को ज़्यादा वोट मिले. डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस और डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्यॉरिटी ने इन दावों की जांच की और हमें कोई ठोस सबूत नहीं मिला.''

अजीत पई देंगे इस्तीफ़ा
उधर अमेरिका में भारतीय मूल के अजीत पई ने फेडरल कम्युनिकेशंस कमीशन (एफसीसी) के चेयरमैन पद से इस्तीफा देने की घोषणा की है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उनको चेयरमैन नियुक्त किया था. पई ने कहा कि वह 20 जनवरी को पद छोड़ देंगे. इसी दिन जो बाइडन अमेरिका के 46वें राष्ट्रपति के तौर पर पदभार संभालेंगे. वह ट्रंप प्रशासन में भारतीय मूल के वरिष्ठ अधिकारियों में एक हैं. पई ने ट्रंप के साथ मिलकर हुआवे और जेडटीई जैसी चीनी कंपनियों के दूरसंचार उपकरणों के अमेरिका में इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने के लिए काम किया था. इन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा माना गया था.
पई ने एक बयान में कहा, 'मुझे देश और विदेश में राष्ट्रीय सुरक्षा के खतरों से अपने संचार नेटवर्क की आक्रामक तरीके से रक्षा करने पर गर्व है.' पई को अपने कार्यकाल के दौरान विवादास्पद नेट न्यूट्रैलिटी को समाप्त करने की योजना पर भारी विरोध का सामना करना पड़ा था. अमेरिका में एफसीसी एक स्वतंत्र एजेंसी है, जो रेडियो, टेलीविजन, वायर, सेटेलाइट और केबल की सेवाओं को नियंत्रित करती है.



ट्रंप की उम्मीद ख़त्म!
अटॉर्नी जनरल के इस बयान पर ट्रंप कैंपेन के वकील रूडी जुलियानी और जेना एलिस ने संयुक्त बयान जारी कर कहा है, ''अटॉर्नी जनरल के प्रति पूरे सम्मान के साथ कहना चाहता हूं कि उनका बयान बिना किसी जानकारी या जांच और सुनियोजित धांधली के सबूतों को देखे बिना दिया गया मालूम पड़ता है.'' अटॉर्नी जनरल के बयान के बाद डोनाल्ड ट्रंप की बची उम्मीद ख़त्म हो गई है. ट्रंप को लगता था कि फेडरल जाँचकार्ता उनकी कुर्सी बचा ले जाएंगे.

जस्टिस डिपार्टमेंट का यह कहना कि 2020 के राष्ट्रपति चुनाव में धांधली के दावों के पक्ष में कोई सबूत नहीं मिला, यह चौंकाने वाला नहीं है. ट्रंप के वकील भी अपने दावों के पक्ष में कोई ठोस सबूत नहीं दे पाए हैं. यह अहम है कि विलियम बार ने इस मामले में चुप रहने के बजाय सार्वजनिक रूप से बोलना पसंद किया. न्यूज़ रिपोर्ट के अनुसार ट्रंप निजी बातचीत में विलियम बार और एफ़बीआई से समर्थन नहीं मिलने की शिकायत कर रहे थे. ट्रंप पहले से ही एरिज़ोना और जॉर्जिया के गवर्नरों से अनबन कर चुके हैं.



ट्रंप के सलाहकार का इस्तीफा
समाचार एजेंसी पीटीआइ के अनुसार, कोरोना वायरस पर राष्ट्रपति ट्रंप के विवादास्पद विशेष सलाहकार डॉ. स्कॉट एटलस ने इस्तीफा दे दिया है. जनस्वास्थ्य या संक्रामक बीमारियों के बारे में अनुभवहीन एटलस ने कोरोना महामारी को रोकने में मास्क और दूसरे उपायों की जरूरत पर सवाल उठाए थे. स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के 65 वर्षीय न्यूरोरेडियोलॉजिस्ट को 130 दिनों के लिए विशेष सलाहकार नियुक्त किया गया था. उन्होंने कार्यकाल के अंतिम दिन इस्तीफा देने की घोषणा की.
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