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भारतीय मूल के इस शख्स को मिलेगा ब्रिटेन के प्रधानमंत्री से भी ज्यादा शक्तिशाली पद!


Updated: October 21, 2019, 1:41 PM IST
भारतीय मूल के इस शख्स को मिलेगा ब्रिटेन के प्रधानमंत्री से भी ज्यादा शक्तिशाली पद!
शैलेश वारा ब्रिटेन की सत्तारूढ़ कन्जर्वेटिव पार्टी के पूर्व उपाध्यक्ष हैं. (स्रोत: शैलेश वारा ट्विटर हैंडल - @ShaileshVara )

अब इस शक्तिशाली पद को हासिल करने की दौड़ में जो नौ लोग हैं उनमें एक भारतीय मूल (PIO) का ब्रिटिश नागरिक (British Citizen), शैलेश वारा (Shailesh Vara) भी है.

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लंदन. पिछले 600 सालों से यह पद ब्रिटेन (Great Britain) के सबसे शक्तिशाली पदों में से एक है. इस पद पर रहने वाले को ब्रिटेन के प्रधानमंत्री (Prime Minister of Great Britain) से भी ज्यादा सैलेरी मिलती है. यही नहीं ब्रिटेन की राजनीतिक-प्रशासनिक व्यवस्था (British Politics) में इस व्यक्ति का ओहदा यहां की सरकार (British Government) से कहीं ऊपर है. ब्रिटेन में इस पद को हासिल करने वाला किसी सम्राट जैसे ठाट-बाट के साथ रहता है. यही नहीं इस पद पर रहने वाले का हर फरमान ब्रिटेन के सांसदों को मानना होता है. यह पद है ब्रिटेन संसद (British Parliament) में हाउस ऑफ कॉमेंस  के स्पीकर (Speaker of House of Commons) का.

अब इस शक्तिशाली पद को हासिल करने की दौड़ में जो नौ लोग हैं, उनमें एक भारतीय मूल (Person of Indian Origin) का ब्रिटिश नागरिक, शैलेश वारा (Shailesh Vara) भी है.

शैलेश वारा का जन्म युगाण्डा में एक अप्रवासी गुजराती परिवार में 04 सितम्बर 1960 को हुआ था
शैलेश वारा का जन्म युगाण्डा में एक अप्रवासी गुजराती परिवार में 04 सितम्बर 1960 को हुआ था


कौन हैं शैलेश वारा?

भारत में गुजरात से ताल्लुक रखने वाले शैलेश वारा ब्रिटेन की संसद में हाउस ऑफ कॉमेंस के स्पीकर पद की रेस में हैं. शैलेश वारा ब्रिटेन की सत्तारूढ़ कन्जर्वेटिव पार्टी के पूर्व उपाध्यक्ष हैं. वो थेरेसा मे सरकार के दौरान उत्तरी आयरलैंड के राज्यमंत्री भी रह चुके हैं. हालांकि स्पीकर पद के लिए शैलेश वारा की राह आसान नहीं है. इस पद के लिए कम-से-कम नौ उम्मीदवार मैदान में हैं. ऐसे समय में जब ब्रेक्जिट के प्रारुप पर ब्रिटेन की संसद को अंतिम फैसला लेना है, यहां के स्पीकर का महत्व और बढ़ जाता है. नये स्पीकर के लिए 4 नवंबर को वोटिंग होनी है.

वारा ने बरको पर सांसदों को डराने, धमकाने और बेइज्जत करने का आरोप लगाया.
वारा ने बरको पर सांसदों को डराने, धमकाने और बेइज्जत करने का आरोप लगाया.


ब्रिटेन में स्पीकर के ठाठ
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वारा ने बरको पर सांसदों को डराने, धमकाने और बेइज्जत करने का आरोप लगाया. ब्रिटेन के प्रधानमंत्री का पद स्पीकर के आगे फीका है और नया भी. ब्रिटेन में पहला स्पीकर 600 साल पहले चौदहवीं शताब्दी में थॉमस हंगरफोर्ड को बनाया गया था, जबकि यहां प्रधानमंत्री का पद 18वीं शताब्दी के दौरान अस्तित्व में आया.

शैलेश वारा ब्रिटेन की सत्तारूढ़ कन्जर्वेटिव पार्टी के पूर्व उपाध्यक्ष हैं. (स्रोत: शैलेश वारा ट्विटर हैंडल - @ShaileshVara )
शैलेश वारा ब्रिटेन की सत्तारूढ़ कन्जर्वेटिव पार्टी के पूर्व उपाध्यक्ष हैं. (स्रोत: शैलेश वारा ट्विटर हैंडल - @ShaileshVara )


ब्रिटेन के स्पीकर का पद हमेशा से इतना शक्तिशाली नहीं था. पहले यह राजशाही के रहम-ओ-करम पर निर्भर था. 1394 से 1535 के बीच ब्रिटेन के सात स्पीकरों को सजा-ए-मौत दी गई. 1510 में ब्रिटेन के महाराज हेनरी VIII ने एक ही दिन में दो पूर्व स्पीकरों का सर कलम करवा दिया था. लेकिन सन् 1642 में स्पीकर विलियम लेन्थैल ने ब्रिटेन के तत्कालीन महाराज चार्ल्स 1 का आदेश ठुकराकर नई परंपरा गढ़ दी. महाराज ने पांच सांसदों के खिलाफ देशद्रोह का आरोप लगाते हुए उन्हें  गिरफ्तार करने का आदेश दिया था. इसके बाद से ब्रिटेन के किसी महाराजा या महारानी ने आजतक हाउस ऑफ कॉमेंस के किसी अधिकार से छेड़छाड़ करने की हिमाकत नहीं की. लोकतंत्र की स्थापना के बाद स्पीकर का पद और मजबूत हुआ है. अब अधिकारों और रसूख के मामले में स्पीकर भी किसी सम्राट से कम नहीं आंका जाता.

शैलेश वारा की पृष्ठभूमि
ऐसे पद के लिए पहली बार कोई भारतीय मूल का व्यक्ति मैदान में है. भारत में गुजरात से ताल्लुक रखन वाले शैलेश वारा ब्रिटेन की संसद में हाउस ऑफ कॉमेंस के स्पीकर पद की रेस में हैं. न्यू यॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक माने तो शैलेश वारा ने निवर्तमान स्पीकर जॉन बरको पर सबसे तीखे हमले बोले हैं. वारा ने बरको पर सांसदों को डराने, धमकाने और बेइज्जत करने का आरोप लगाया.

शैलेश वारा का जन्म युगाण्डा में एक अप्रवासी गुजराती परिवार में 04 सितम्बर 1960 को हुआ था. वारा का परिवार उनके जन्म के चार साल बाद ही 1964 में ही ब्रिटेन आ गया था. यहां वारा ने वकालत की डिग्री हासिल की और 1980 के दशक से ही ब्रिटेन की कंजर्वेटिव पार्टी के साथ जु़ड़ गए.

ब्रिटेन समेत हांगकांग में वकालत का अनुभव रखने वाले वारा पहली बार 2005 में सांसद बने. वारा ताइक्वांडो में ब्लैक बैल्ट हैं. (न्यूयॉर्क टाइम्स से साभार)

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First published: October 21, 2019, 12:34 PM IST
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