राहत भरी खबर: स्वेज नहर में फंसा कार्गो जहाज चल पड़ा, अब निकल सकेंगे 350 शिप

स्वेज नहर में फंसे पोत को आखिरकार निकाल लिया गया (फोटो साभार-AP)

स्वेज नहर में फंसे पोत को आखिरकार निकाल लिया गया (फोटो साभार-AP)

Container Ship: इस जहाज का नाम 'एमवी एवर गिवेन' है, जो लगभग 400 मीटर लंबा और 59 मीटर चौड़ा है. ये जहाज चीन से नीदरलैंड्स के पोर्ट रोटेरडम जा रहा था.

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स्वेज. स्वेज नहर में करीब सप्ताह भर से फंसे एक मालवाहक पोत को सोमवार शाम सफलतापूर्वक निकाल लिया गया. नहर में सेवाएं देने वाली एक कंपनी ने यह जानकारी दी. 'लेथ एजेंसीज' ने सोमवार सुबह बताया था कि फंसे हुए पोत को निकालने के लिए 10 'टगबोट' की मदद ली गई. कंपनी ने बताया कि सोमवार शाम पोत को पानी की सतह पर लाने में कामयाबी मिल गई. इस जहाज का नाम 'एमवी एवर गिवेन' है, जो लगभग 400 मीटर लंबा और 59 मीटर चौड़ा है. ये जहाज चीन से नीदरलैंड्स के पोर्ट रोटेरडम जा रहा था. ऐसा कहा जा रहा है कि पिछले एक हफ्ते से स्वेज नहर में जहाज अटकने से 350 से ज्‍यादा जहाज फंस गए थे.

टगबोट पोत को ग्रेट बिटर झील की तरफ खींच रही है, जहां इसका निरीक्षण किया जाएगा. एशिया और यूरोप के बीच माल लेकर जाने वाला, पनामा के ध्वज वाला 'द एवर गिवन' जहाज स्वेज़ शहर के समीप मंगलवार को नहर में फंस गया था, जिससे यातायात बाधित हो गया. यह जलमार्ग वैश्विक परिवहन के लिए अहम है.

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल 19,000 पोत इस नहर से होकर गुजरे थे. इस नहर से दुनिया का करीब 10 प्रतिशत व्यापार होता है. यह जलमार्ग तेल के परिवहन के लिए अहम है.

करीब 12 व्यापार के लिए स्वेज नहर रूट का होता है इस्तेमाल
एशिया से यूरोप के बीच माल ढुलाई करने वाला पनामा का 'द एवर गिवन' जहाज स्वेज नहर में मंगलवार को फंस गया था, जिससे यातायात बाधित हो गया. यह बहुत बड़ा जहाज है, जिस पर तेल लदा है. 'एवर गिवन' की तकनीकी प्रबंधक बर्नहार्ड शुल्त शिपमैनमेंट ने कहा कि शुक्रवार को नहर का रास्ता खुलवाने के प्रयास विफल रहे. मिस्र के अधिकारियों ने जहाज फंसने की जगह पर मीडिया को जाने की इजाजत नहीं दी है.

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भारत के साथ इन देशों पर भी होगा असर

स्वेज नहर से जहाजों की आवाजाही बाधित होने का सबसे ज्यादा असर यूरोप पर पड़ा है. लेकिन जल्द इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ने की आशंका है. इसकी वजह यह है कि खाने-पीने की उन चीजों की कमी हो सकती है, जिनकी ढुलाई इस रास्ते से होती है. दुनिया में करीब 12 व्यापार के लिए स्वेज नहर रूट का इस्तेमाल होता है. सप्लाई में देरी की आशंका से लंदन में रोबस्टा के फ्यूचर्स में 2.8 फीसदी का उछाल आया. शुक्रवार को मई डिलीवरी और जुलाई डिलीवरी के फ्यूचर्स के बीच फर्क 30 फीसदी से ज्यादा बढ़ गया. अगर यह रूट जल्द नहीं खुलता है तो कॉफी के फ्यूचर्स में और उछाल दिख सकता है.
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