अक्टूबर में भारत की यात्रा कर सकती हैं शेख हसीना

मोमीन ने बताया कि प्रधानमंत्री की यात्रा के एजेंडे में सभी द्विपक्षीय और क्षेत्रीय मुद्दे सम्मिलित हैं जिनमें 54 साझी नदियों, खासकर, तीस्ता नदी के जल बंटवारे का मुद्दा भी शामिल है.

भाषा
Updated: August 4, 2019, 11:16 PM IST
अक्टूबर में भारत की यात्रा कर सकती हैं शेख हसीना
मोमीन ने बताया कि प्रधानमंत्री की यात्रा के एजेंडे में सभी द्विपक्षीय और क्षेत्रीय मुद्दे सम्मिलित हैं जिनमें 54 साझी नदियों, खासकर, तीस्ता नदी के जल बंटवारे का मुद्दा भी शामिल है.
भाषा
Updated: August 4, 2019, 11:16 PM IST
बांग्लादेश के विदेश मंत्री डॉ ए के मोमीन ने रविवार को कहा कि प्रधानमंत्री शेख हसीना अक्टूबर में भारत यात्रा पर जा सकती हैं जहां वह लंबे वक्त से लंबित तीस्ता जल बंटवारा संधि और रोहिंग्या संकट समेत कई द्विपक्षीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा कर सकती हैं. तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने के बाद यह हसीना की पहली भारत यात्रा होगी.

मोमीन ने पीटीआई-भाषा को बताया, ‘‘ हमें उम्मीद है कि यह यात्रा अक्टूबर के पहले हफ्ते में होगी. हम इस महीने के उत्तरार्ध में होने वाली भारत के विदेश मंत्री जयशंकर की सरकारी यात्रा के बाद हसीना की यात्रा की तारीख और एजेंडे को अंतिम रूप देंगे.’’ जयशंकर 20 अगस्त को दो दिन की यात्रा पर ढाका आएंगे.

मोमीन ने बताया कि प्रधानमंत्री की यात्रा के एजेंडे में सभी द्विपक्षीय और क्षेत्रीय मुद्दे सम्मिलित हैं जिनमें 54 साझी नदियों, खासकर, तीस्ता नदी के जल बंटवारे का मुद्दा भी शामिल है.

ममता की आपत्ति के बाद नहीं हुए थे समझौते पर हस्ताक्षर
तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सितंबर 2011 की बांग्लादेश यात्रा के दौरान तीस्ता समझौते पर हस्ताक्षर होने थे लेकिन पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की आपत्ति के बाद आखिरी मिनट में इसे टाल दिया गया.

रोहिंग्या संकट भी एजेंडा में शामिल
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तीस्ता बांग्लादेश के लिए अहम है, खासकर, दिसंबर से मार्च की अवधि के दौरान जब पानी का स्तर 5000 क्यूसेक से घटकर 1000 क्यूसेक से भी कम हो जाता है. मोमीन ने कहा कि सैद्धांतिक तौर पर हम तीस्ता पर समझौते पर सहमत थे लेकिन पश्चिम बंगाल के ऐतराज के बाद इसे टाल दिया गया. उन्होंने कहा कि हसीना की यात्रा के दौरान रोहिंग्या संकट पर भी बातचीत हो सकती है.

मंत्री ने कहा, ‘‘ नई दिल्ली ने ढाका से कहा है कि रोहिंग्या मुसलमानों को उनके वतन वापसी भेजने की प्रक्रिया तुरंत शुरू हो जानी चाहिए... मुझे यकीन है कि यह प्रक्रिया जल्द शुरू होगी.’’

 म्यांमार ने जताई थी रोहिंग्या मुसलमानों को वापस लेने की इच्छा
बता दें हाल में ही म्यांमार ने रोहिंग्या मुसलमानों को वापस लेने के लिए अपनी इच्छा व्यक्त की थी, हालांकि इसको लेकर बांग्लादेश का कहना था कि पड़ोसी देश को वापसी प्रक्रिया शुरू करने के लिए पहले उत्पीड़ित अल्पसंख्यक समूह का विश्वास अर्जित करना चाहिए.

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First published: August 4, 2019, 11:16 PM IST
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